साहित्य से मेरा गहरा लगाव बना, चुटकुले और व्यंग्य का फर्क सीखा, संगीत को समझने की कोशिश की। दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों को एक सैलानी की तरह देखा और राजनीतिक समझ विकसित हुई। जिंदगी और दुनिया को देखने का नजरिया बदल गया। मेरे विचारों को विस्तार मिला। एमए, बीए तो लाखों लोग करते रहते हैं, लेकिन पढ़-लिखकर जो ज्ञान हासिल किया उसे निजी जीवन में भी जिया जाए, ऐसा बहुत कम लोग कर पाते हैं। तिग्मांशु ऐसे ही हैं, सहज, सरल, ज्ञानी और बेहतरीन इंसान और नए विचारों का स्वागत करने वाले एक विद्यार्थी।