Bhumi Pednekar
- फोटो : Amar ujala, Mumbai
हिंदी सिनेमा में इन दिनों कथानक आधारित सिनेमा का बड़ा हल्ला है, आपके हिसाब से इसकी परिभाषा क्या है?
कथानक आधारित सिनेमा में हीरो इसकी कहानी होती है। पिछले आठ साल में जिस तरह से इंटरनेट ने हमारी दुनिया बदली है, उसमें लोगों का नजरिया बदल रहा है। कथानक आधारित सिनेमा जिसे मुंबई में कंटेंट ड्रिवेन सिनेमा कहते हैं, मेरे हिसाब से वह सिनेमा है जिसे देखते हुए लोगों का मनोरंजन भी हो और वह दर्शकों के सोच विचार में भी बदलाब लाए। मेरी जैसी अभिनेत्री इस इंडस्ट्री में इसीलिए अपने पैर जमा सकी क्योंकि अब हिंदी सिनेमा में हीरो और हीरोइन की परिभाषा भी बदल चुकी हैं। दम लगाके हईशा जैसी कहानी को वो प्यार दे रहे हैं, जिसका नायक एक विफल इंसान है और जिसकी नायिका 90 किलो मोटी लड़की है।