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EXCLUSIVE: भूल भुलैया 2 के निर्देशक बोले- मेरा नाम देख फिल्म देखने गईं थीं यश चोपड़ा की पत्नी

Sat, 12 Oct 2019 06:53 AM IST
Mishra Mishra मुंबई डेस्क, अमर उजाला
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Anees Bazmee - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
सुपरहिट फिल्म भूल भुलैया की सीक्वेल के हीरो कार्तिक आर्यन जब पैदा भी नहीं हुए थे, इस फिल्म के निर्देशक अनीस बज्मी बतौर लेखक अपनी पहली सुपरहिट फिल्म स्वर्ग की कामयाबी देख चुके थे। मशहूर शायर अब्दुल हमीद बज्मी के बेटे अनीस के निर्देशन में बनी फिल्म पागलपंती भी रिलीज को तैयार है। अपने 29 साल के फिल्मी सफरनामे पर अनीस बज्मी ने अमर उजाला से की ये एक्सक्लूसिव मुलाकात।

आप भूल भुलैया का सीक्वेल बना रहे हैं, नो एंट्री के सीक्वेल की चर्चा महीनों से चल रही है, सुना है पागलपंती का भी सीक्वेल तय हो चुका है?
हां, ये सही बात है। बात पागलपंती के पहले दिन की शूटिंग की है। सब लोग शूटिंग करके होटल लौट चुके थे तो मेरे पास फोन आया। मैं नीचे आया तो वहां फिल्म के निर्माता भूषण कुमार, कुमार मंगत, अभिनेता जॉन अब्राहम, अरशद वारसी आदि बैठे थे। मेरे पहुंचते ही सब लोग बोले कि हमने एक फैसला लिया है। आज पहले दिन की शूटिंग में जो हम सबको आनंद आया तो हमने तय किया है कि इस फिल्म की सीक्वेल भी जरूर बननी चाहिए। किसी फिल्म की शूटिंग के पहले दिन ही उसकी सीक्वेल तय हो जाना एक और जिम्मेदारी है। मेरा मानना है कि फिल्म की रिलीज से पहले एक निर्देशक से लोगों को उम्मीदें होनी ही चाहिए बनिस्बत इसके कि लोग फिल्म की चर्चा ही न करें।
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No Entry - फोटो : Social Media
और नो एंट्री का सीक्वेल?
नो एंट्री का सीक्वेल मैं लिख चुका हूं। फिल्म के निर्माता बोनी कपूर हैं तो बस उनका ही इंतजार है। उनके और सलमान भाई के बीच कुछ चल रहा है। अपनी तरफ से मैं सलमान को फिल्म की पटकथा सुना चुका है। उनको बहुत अच्छी लगी फिल्म। सलमान खान का अगर मैं दूसरा नाम बोलूं तो वो दिलखान हैं। उनका दिल है तो वह सब कुछ करेंगे। अगर दिल नहीं है तो मुगले आजम भी लिखकर ले आओ वह बोलेंगे कि बाद में देखते हैं। वह प्यार मोहब्बत वाले इंसान हैं। दूसरों की मदद करने वाले इंसान हैं। इस उम्र में भी उनके चेहरे पर एक तरह की मासूमियत झलकती है और ये इस तरह का तेज तब आता है जब इंसान अंदर से अच्छा होता है।
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Anees Bazmee - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
गुजरात से मुंबई के सफर के बारे में कुछ बताइए, बचपन में तो आपने तमाम शायरों की खिदमत की होगी?
लिखना मेरे खून में है। अपने वालिद के साथ मुंबई के वजीर होटल में मैंने उस दौर के तमाम बड़े शायरों को चाय पिलाई है, उनके लिए पान-सिगरेट लेकर आया हूं। उसी दौर में 11-12 साल की उम्र में लिखने का शौक पनपा। शुरू में शायरी की कोशिश की लेकिन जल्द ही समझ आ गया कि मैं इसके लिए नहीं बना हूं। एक बार और कोशिश की मैंने जब गीतकार समीर को मैंने अपनी एक फिल्म का सीन लिखने को कहा और मैंने उनके गीत का मुखड़ा लिखने की जिम्मेदारी ले ली। दो तीन दिन बाद हम दोनों मिले तो मैंने छूटते ही कहा कि भाई, ये बहुत मुश्किल है। तो समीर बोले, कि ज्यादा मुश्किल काम ये है जो आप करते हैं।

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Pyaar To Hona Hi Tha - फोटो : Social Media
बतौर निर्देशक आपने पहली दो फिल्में अजय देवगन के साथ कीं। फिल्म प्यार तो होना ही था में अजय को रूमानी नायक बनाने का ख्याल कैसे आया, उन दिनों के तो वह एक्शन स्टार थे?
प्यार तो होना ही था, अजय की पूरी तरह से पहली रोमांटिक फिल्म थी। अजय के लिए जो पहली फिल्म मैंने बनाई, उस समय तक मैं उनको जानता नहीं था। निर्माता ने कहा कि फिल्म अनीस बज्मी निर्देशित करेंगे और अजय ने मना नहीं किया। ये बहुत बड़ा भरोसा जताया उन्होंने मुझ पर। अजय एक बेहतरीन अभिनेता हैं। पहली फिल्म नहीं चली तो मैं दूसरी फिल्म लेकर उनके पास गया। उन्होंने इस बार भी भरोसा जताया। फिल्म इस बार सुपरहिट रही। अजय को इस फिल्म से एक नई इमेज मिली और मुझे मिला भरोसे पर खरा उतरने का सुकून।
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Deewangee - फोटो : Social Media
और, अजय से पहला निगेटिव किरदार भी आपने ही कराया?
मैं लगातार बदलाव में यकीन रखता हूं। निर्देशक का असली काम है समय के साथ खुद को बदलते रहना। लव स्टोरी के बाद मैंने रोमांटिक थ्रिलर बनाने का फैसला किया। अजय उससे पहले तमाम ग्रे शेड्स के किरदार ठुकरा चुके थे लेकिन दीवानगी उन्होंने की सिर्फ मुझ पर भरोसा करके। आज भी लोग इस फिल्म में अजय देवगन के अभिनय को उनकी बेहतरीन अदाकारी मानते हैं।
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Naseeb - फोटो : Social Media
आपकी फिल्मों पर मशहूर निर्माता निर्देशक मनमोहन देसाई की छाप दिखती है, ऐसा है क्या?
मनजी (मनमोहन देसाई) की फिल्म नसीब में मैंने शत्रुघ्न सिन्हा के बचपन का रोल किया है। और, फिर एक दिन ऐसा भी आया जब मैंने उनके लिए फिल्म दीवाना मस्ताना लिखी। इस फिल्म के निर्देशक डेविड धवन के लिए पहले मैं तमाम फिल्में लिख चुका था लेकिन जब वह दीवाना मस्ताना लेकर मेरे पास आए तो मैं दूसरे कामों में व्यस्त था लिहाजा मैंने मना कर दिया। तो मनजी का फोन आ गया मेरे पास। वह मुझसे कहना चाहते थे कि अनीस, मैं चाहता हूं ये फिल्म तुम करो। लेकिन, वह इतना ही कह पाए कि मैं चाहता हूं और मैंने जवाब दिया कि मनजी मैं आपके लिए ये फिल्म कर रहा हूं। इतनी इज्जत करता हूं मैं उनकी कि मैंने उन्हें पूरा वाक्य भी नहीं बोलने दिया। मनजी ने लगातार खुद को समय के साथ बनाए रखा। मैं भी उनकी तरह हर उम्र के लोगों के साथ उठता बैठता हूं। बच्चों के साथ वक्त बिताता हूं और उनकी सोच को अपने सिनेमा में लाने की कोशिश करता हूं।
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Anees Bazmee - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
लेखकों के लिए भी आपने कुछ कोशिशें शुरू की हैं, उसके बारे में बताइए कुछ?
मेरा शुरू से मानना रहा है कि अगर आपको रेस में लंबी दूर तक जाना है तो आपको टीमवर्क से ही आगे बढ़ना चाहिए। मैं लेखकों को आगे लेकर चलता हूं। मेरे पास लेखकों की एक टीम है जो मेरे साथ बरसों से काम कर रही है। ये लोग मुझे टोकते हैं, मेरे हर कदम की समीक्षा करते हैं और मैं अपनी टीम के जूनियर से जूनियर साथी के सुझाव की कद्र करता हूं। उसकी बात सुनता हूं। फैसला क्या होगा,ये बाद की बात है लेकिन टीम के हर सदस्य की राय सुनना टीम लीडर का पहला कर्तव्य होता है। नए लेखकों से कहानियां सुनने का काम भी मैंने शुरू किया है।

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Bhool Bhulaiyaa 2 - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
इंडस्ट्री में आने वाले नए लोगों के लिए आप क्या कहना चाहते हैं?
मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि इस इंडस्ट्री के दरवाजे सबके लिए खुले हैं। तमाम बड़े बड़े स्टार्स के बच्चे यहां फेल हो चुके हैं लेकिन नवाजुद्दीन सिद्दीकी, राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर जैसे लोगों ने अपनी काबिलियत से यहां अपनी जगह बनाई है। यहां तैयारी के साथ आने वाली की इज्जत है। इंडस्ट्री पहले लोगों को आठ-दस फिल्मों तक सीखने का मौका देती थी, अब वह समय नहीं रहा।

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Bhool Bhulaiyaa 2 - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
जमाना डिजिटल एंटरटेनमेंट का है, इसके लिए कोई भविष्य की तैयारी?
मेरे सात-आठ लेखकों की टीम पिछले सवा साल से एक कहानी पर काम कर रही है। एक पटकथा अभी तैयार हुई है जिस पर मैं एक मेगा बजट वेब सीरीज निर्देशित करने की तैयारी कर रहा हूं।
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Swarg - फोटो : Social Media
राजेश खन्ना से लेकर कार्तिक आर्यन तक हिंदी सिनेमा के कलाकारों की तीन पीढ़ियों के साथ आपने काम किया है। आज भी लोग अनीस बज्मी का नाम पोस्टर पर देखकर फिल्म देखने जाते हैं, कितनी बड़ी जिम्मेदारी है ये?
अपनी शोहरत की कसौटी पर खरा उतरने की ये बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इस बात का एहसास मुझे अपनी पहली फिल्म स्वर्ग के दिनों से है। इस फिल्म की रिलीज के तुरंत बाद यश चोपड़ा जी के यहां से मुझे फोन आया। मैं मिलने गया तो उनकी पत्नी पामेला चोपड़ा ने मेरी अगली फिल्म प्रतिबंध का जिक्र किया। चिरंजीवी उस फिल्म के हीरो थे लेकिन पामेला जी ने कहा कि हम लोग पोस्टर पर आपका नाम देखकर फिल्म देखने गए। किसी फिल्म को देखे बिना सिर्फ नाम देखकर लोगों में जो उम्मीदें बंधती हैं, ये एक बहुत बड़ी जिम्मेदार है।
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