आयुष्मान, पहले तो आपको इस कामयाबी के लिए बधाई। पिछले साल आपकी फिल्में हिंदी सिनेमा में सबसे ज्यादा कारोबार करने वाली फिल्मों में शामिल रहीं। शीर्ष पर आकर कुछ बदला है?
मुझे लगता है हमारी इंडस्ट्री बहुत ही परिवर्तनशील है। यहां हर फ्राइडे सब कुछ बदल जाता है, यहां फ्लेवर ऑफ द सीजन होते हैं। किसी की फिल्म हिट हो जाए तो बस उसी को महत्त्व दिया जाता है। मेरी कोशिश यही रहती है कि ज्यादा से ज्यादा अच्छी स्क्रिप्ट करूं जो लोगों को पसंद आए। फिर एक जगह बनती है, हर कलाकार यही कोशिश करता है। अच्छा लगता है सुनकर कि लोगों को मेरी फिल्में पसंद आ रही हैं। चीन में अंधाधुन ने इतना अच्छा कारोबार किया है तो मन को संतोष भी मिलता है।
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आयुष्मान खुराना
- फोटो : सोशल मीडिया
आपकी फिल्मों से लोगों को अब ये उम्मीद रहती है कि इसमें कुछ वाकई हटके कहानी होगी, कैसे चुनते हैं अपनी फिल्मों की कहानियां?
मेरा बस एक पैमाना है कि हर कहानी आम इंसान से जुड़ी हुई होनी चाहिए। मौलिक होनी चाहिए। मैं ऐसी कोई फिल्म नहीं करना चाहता जिसकी कहानी सुनकर लोग कहें कि ये तो पहले कहीं देखा है। मैं हर बार कुछ नया करना चाहता हूं। हमारा देश कहानियों से भरा पड़ा है। सामाजिक कलंकों और सामाजिक अंधविश्वासी की सैकड़ों कहानियां हैं। हमारे देश में बहुत मसाला है।
इसे थोड़ा और समझाइए।
हर फिल्म की स्क्रिप्ट सुनते ही मेरे दिमाग में उसका ट्रेलर चलने लगता है। फिर सोचता हूं की क्या लोग इस ट्रेलर को देखने के बाद फिल्म देखेंगे या नहीं। कहीं ऐसी कहानी पहले तो नहीं बनीं। यही सब खयाल आते हैं मन में। मैं हमेशा अपने मन की सुनता हूं और तुरंत प्रतिक्रिया भी देता हूं। स्क्रिप्ट को ज्यादा पढ़ने से इसे लेकर निष्पक्षता खत्म हो जाती है।
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आयुष्मान खुराना
- फोटो : सोशल मीडिया
इन किरदारों को परदे पर निभाने की प्रेरणा कहां से आती है?
यह सब कहानी पर निर्भर करता है। कई चीजें जिंदगी में हम देख चुके होते हैं तो उन्हें निभाने में आसानी होती है। लेकिन, बधाई हो की कहानी मेरे साथ कभी नहीं हुई। हां, लेकिन वैसे एक व्यक्ति को मैं जानता हूं। अंधाधुन की बात करें तो मैं किसी अंधे व्यक्ति या संगीतकार को नहीं जानता। ऐसे किरदारों के लिए वर्कशॉप्स की जरूरत पड़ती है। हम उनकी जगह जाकर उनका रहन सहन सीखते हैं। हर जगह की एक अपनी खासियत होती है। मैं उन्हीं से प्रेरणा लेता हूं।
अंधाधुन जैसी फिल्म जब चीन में दो सौ तीन सौ करोड़ रुपये की कमाई करती है, तो आपके लिए ये क्या चुनौती लेकर आती है?
मुझे लगता है कि आगे की राह इससे कठिन ही होगी क्योंकि मैंने खुद के लिए एक पैमाना तय कर दिया है। मेरे लिए आसानी ये होगी क्योंकि जिस तरह पहले मैने फिल्मों का चयन किया है, वैसे ही अब आगे भी करूंगा।
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Ayushmann Khurrana
आपका अपना म्यूजिक बैंड भी है, तो संगीत का शौक आपको कैसे लगा?
संगीत मेरे जीवन का हमेशा से हिस्सा रहा है। मेरी जिंदगी में हमेशा बैकग्राउंड म्यूजिक चलता रहता है। पापा बांसुरी बजाते हैं। दादी गाया करती थीं। बड़ी म्यूजिकल फैमिली थी हमारी शुरू से। मैं स्कूल में होने वाले म्यूजिकल कंपटीशन्स में हिस्सा लिया करता था। स्कूल में जब म्यूजिक और थिएटर में से एक को चुनने का मौका आया तो मैंने थिएटर चुना। यहां हर लिखने की, गाने की, खुद गाने बनाने की आजादी हासिल थी।
स्कूल के दिनों के संगीत के साथी अब कहां हैं?
मेरी पहली फिल्म विकी डोनर में गाया मेरा गाना, पाणी दा रंग.. ही मेरा पहला गाना है। इस गाने को बनाने में संगीतकार रोचक कोहली का बहुत बड़ा हाथ है। मैं और रोचक साथ पढ़े हैं। स्कूल के दिनों में हमारा ग्रैविटी नाम का बैंड भी हुआ करता था। हम दोनों ने स्कूल के दिनों में खूब सारे शोज किए साथ में। साडी गली आजा, गाना भी हम दोनों ने मिलकर ही बनाया।
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ayushmann khurrana
- फोटो : अमर उजाला
ट्विटर पर जो कविताएं लिखते हैं, वे क्या हैं?
कभी कभी बैठे बैठे दिमाग में कुछ आ जाता है और मैं लिख देता हूं। मेरी कविताएं या शायरी दिल टूटने की होती हैं और लोग इन्हें खूब पसंद भी करते हैं। लेकिन, राज की बात ये है कि मेरा दिल कभी नहीं टूटा है, मेरा ये मानना है कि हर चीज को जीना जरूरी नहीं होता।
फिल्म निर्देशकों में से ऐसे भी कोई निर्देशक है, जिनके साथ काम करने की आपकी दिली तमन्ना हो?
सच पूछें तो मैं निर्देशक से ज्यादा पटकथा पर ध्यान देता हूं। बड़े निर्देशकों में मैंने अभी सिर्फ श्रीराम राघवन और शूजीत सरकार के साथ ही काम किया है। इनके अलावा जिनके साथ काम किया वे फिल्म रिलीज होने के बाद ही बड़े बने। रही बात विश लिस्ट की तो मैं शिमित अमीन और शकुन बत्रा के साथ काम करने का ख्वाहिशमंद हूं।
अगली फिल्म आर्टिकल 15 में आपने पहली बार पुलिस की वर्दी पहनी है। वर्दी वाले किरदारों करते समय क्या वाकई कोई जिम्मेदारी की भावना आती है?
ऐसा नहीं है। कुछ लोग वर्दी पहनकर भी बगैरत होते हैं। वहीं, कुछ लोग बिना वर्दी के भी जिम्मेदार होते हैं। मेरे पिता के और मेरे भी कई दोस्त आईपीएस अफसर हैं। ये आज के समय की कहानी है। और, जो कुछ मैंने देखकर सीखा है, वही इस फिल्म में काम आया है।
अगली फिल्मों ड्रीम गर्ल और बाला के बारे में बताइए, बाला में तो आपकी भूमि पेडनेकर के साथ हैट्रिक लगने जा रही है।
ड्रीम गर्ल में मैंने साड़ी पहनकर एक्टिंग की है जो आसान नहीं रहा। साड़ी पहनना ही अपने आप में एक टास्क है। दो लोग मिलकर मुझे साड़ी पहनाते थे। भूमि की पहली फिल्म मेरे साथ थी। मुझे लगता है मेरी और उनकी जोड़ी काफी लकी है। आशा करता हूं कि बाला में भी ये जोड़ी लकी साबित होगी।