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EXCLUSIVE: मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में और गहराएगा संकट, सर्दियों से पहले शूटिंग शुरू होने के आसार नहीं

Sat, 25 Apr 2020 01:05 PM IST
शिप्रा सक्सेना पंकज शुक्ल, मुंबई
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Cinema - फोटो : Instagram
कोरोना संक्रमण से जूझ रहे शहर मुंबई में अगले छह महीनों तक फिल्म या टेलीविजन धारावाहिकों की शूटिंग शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। फिल्मों की शूटिंग से जुड़ी सारी कामगार यूनियनों की फेडरेशन को इस बारे में सरकार की तरफ से गाइडलाइंस तय किए जाने का इंतजार है। वहीं, फिल्म निर्देशकों की संस्था का मानना है कि पहली जरूरत मुंबई में कोरोना से जंग जीतने की है, सिनेमा उसके बाद की प्राथमिकता है।
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
शनिवार सुबह से मुंबई में ये सूचना आग की तरह फैली है कि स्वीडेन और डेनमार्क जैसे देशों ने अपने यहां की सरकारी की तरफ से बनाई गई सरकारी गाइडलाइंस के हिसाब से शूटिंग शुरू कर दी है। हॉलीवुड के फिल्म निर्देशकों की संस्था डायरेक्टर्स गिल्ड ने भी इस दिशा में काम शुरू किया है। कोई 12 दिन पहले गिल्ड ने मशहूर निर्देशक स्टीवन सोडरबर्ग की अध्यक्षता में एक समिति बनाई, जिसका काम है लॉक डाउन खत्म होने के बाद की स्थिति का अध्ययन करना और ये तय करना कि शूटिंग कब से शुरू की जा सकती है। गौरतलब है कि इस कोरोना काल में स्टीवन निर्देशित फिल्म कंटेजियन दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखी जा रही है।
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Mumbai Lockdown - फोटो : Social Media
मुंबई में फिलहाल ऐसा कोई अध्ययन नहीं चल रहा है जिससे देश की सबसे तेजी से तरक्की करती रहे मनोरंजन उद्योग का काम फिर से शुरू करने की कोई योजना बन सके। इंडस्ट्री की सारी यूनियनों की संरक्षक फेडेरशन ऑफ वेस्टर्न इंडियन सिने एम्प्लाइज का मानना है कि इसके लिए केंद्र सरकार को दिशा निर्देश बनाने चाहिए। हालांकि, फेडरेशन के महासचिव अशोक दुबे कहते हैं, “कानून बनाने से भी ज्यादा कुछ मुंबई में होने वाला नहीं है क्योंकि कामगारों के हितों की रक्षा को बने 1981 के कानून को ही अभी तक यहां लागू नहीं कराया जा सका है। शूटिंग के दौरान काम करने वालों को शौचालय तक की सुविधा ढंग से नहीं मिलती तो सैनेटाइजर, दास्ताने, मास्क और पीपीई किट जैसा कुछ उन्हें मिल सकेगा, ये कहना मुश्किल है।”

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Ashoke Pandit - फोटो : file photo
इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक पंडित का अनुमान है कि मुंबई में शूटिंग सितंबर-अक्टूबर से पहले शुरू हो पाना मुश्किल है और वह भी तब जब हालात और गंभीर नहीं होते। वह कहते हैं, “अभी शहर की पहली प्राथमिकता कोरोना को हराना है। बाकी सब इसके बाद होगा।” यह पूछे जाने पर कि क्या अभी फिल्म इंडस्ट्री की तरफ से कोई पहल कोरोना काल के बाद के समय में होने वाली शूटिंग के लिए गाइडलाइंस बनाने की हुई है, वह कहते हैं, “इस बारे में जो भी फैसला होगा वह सारे लोग मिलकर लेंगे।” फेडरेशन के महासचिव दुबे बताते हैं कि फिल्म निर्माताओं की तरफ से इस बारे में सोच विचार के लिए फेडरेशन को पत्र मिला है।
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कोरोना जांच करता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
दुबे का कहना ये भी है कि कोरोना काल के बाद कम लोगों के साथ शूटिंग करने का प्रस्ताव ठीक नहीं है। अगर किसी सीरियल या फिल्म की शूटिंग पर सौ लोग काम करते हैं तो वही शूटिंग 50 लोगों के साथ पूरी करने से आगे चलकर ये परंपरा भी बन सकती है और इंडस्ट्री के लाखों लोग बेराजगार हो सकते हैं। उनका कहना है कि इस बारे में केंद्र सरकार को पहल कर फिल्म इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ विचार विमर्श करना चाहिए। लेकिन, जिस सरकार ने लॉक डाउन का एक महीना बीत जाने के बाद भी फिल्म इंडस्ट्री के लोगों की सुधि नहीं ली, उससे ज्यादा उम्मीद वह नहीं कहते।
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पीएम नरेंद्र मोदी का राष्ट्र को संबोधित - फोटो : Social Media
दुबे कहते हैं, “मनोरंजन इंडस्ट्री का टर्न ओवर 2.36 लाख करोड़ का है। लेकिन सरकार की तरफ से इस उद्योग में काम करने वालों को कोई सहूलियत नहीं मिलती। कर्मचारियों का वेतन तक सरकार नहीं दिला पाती। सरकार कहती है कि किसी कर्मचारी के वेतन में कोरोना के चलते कटौती नहीं होगी, लेकिन हमें शिकायत मिली है कि एकता कपूर ने अपने कर्मचारियों का वेतन रोक लिया है। हमने प्रधानमंत्री से लेकर सूचना व प्रसारण मंत्रालय, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और बीएमसी तक को सिने कामगारों की मदद के लिए पत्र लिखे हैं, लेकिन इन पर अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।”

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