Mumbai Lockdown
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मुंबई में फिलहाल ऐसा कोई अध्ययन नहीं चल रहा है जिससे देश की सबसे तेजी से तरक्की करती रहे मनोरंजन उद्योग का काम फिर से शुरू करने की कोई योजना बन सके। इंडस्ट्री की सारी यूनियनों की संरक्षक फेडेरशन ऑफ वेस्टर्न इंडियन सिने एम्प्लाइज का मानना है कि इसके लिए केंद्र सरकार को दिशा निर्देश बनाने चाहिए। हालांकि, फेडरेशन के महासचिव अशोक दुबे कहते हैं, “कानून बनाने से भी ज्यादा कुछ मुंबई में होने वाला नहीं है क्योंकि कामगारों के हितों की रक्षा को बने 1981 के कानून को ही अभी तक यहां लागू नहीं कराया जा सका है। शूटिंग के दौरान काम करने वालों को शौचालय तक की सुविधा ढंग से नहीं मिलती तो सैनेटाइजर, दास्ताने, मास्क और पीपीई किट जैसा कुछ उन्हें मिल सकेगा, ये कहना मुश्किल है।”