Karunanidhi
करुणानिधि की लिखी फिल्मों में हमेशा सामाजिक संदेश छुपा होता था। इन फिल्मों में विधवा पुनर्विवाह, छुआछूत, जमींदारी का खात्मा, धर्म के नाम पर अंधविश्वास जैसे विषय शामिल होते थे। सामाजिक मुद्दों को उठाने की वजह से उन्हें कई बार बैन का भी सामना करना पड़ा। 1950 के दशक में उनके दो नाटकों पर रोक लगा दी गई थी।