इमरान हाशमी
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कौन सा जोनर है जिसे भारतीय सिनेमा अब तक एक्सप्लोर नहीं कर पाया?
साइंस फिक्शन। हमने इसे छुआ जरूर है, लेकिन कभी गहराई से नहीं बनाया। सच यह है कि साइंस फिक्शन तभी सफल हो सकता है जब निर्देशक मजबूत हो और विषय वास्तव में नया और अलग हो। नहीं तो यह जोनर प्रभाव नहीं डाल पाता।
बॉक्स ऑफिस नंबर और ओटीटी व्यूअरशिप का प्रेशर आप कैसे संभालते हैं?
देखिए, दबाव हमेशा रहता है लेकिन वैसा नहीं जैसा लोग बाहर से समझते हैं। जब आप कोई फिल्म करते हैं, तो बस यही उम्मीद होती है कि ऑडियंस उसे स्वीकार करे। सच यह है कि कोई नहीं जानता कि फिल्म थिएटर में चली या ओटीटी पर पसंद की जाएगी। अगर आप हर समय इसके बारे में सोचते रहेंगे, तो आपका ध्यान काम से हट जाएगा। यह सब आपके कंट्रोल में नहीं होता। आपकी जिम्मेदारी बस ईमानदारी से अपना काम करना है। फिर आज यह समझना और भी मुश्किल हो गया है कि क्या चलेगा और क्या नहीं। बॉक्स ऑफिस पर शुक्रवार को आंकड़े आते ही सभी चिंतित हो जाते हैं। प्रोड्यूसर को भी इसी बात की चिंता रहती है कि अगर फिल्म अच्छी शुरुआत नहीं कर पाई तो आगे क्या होगा? ओटीटी पर भी यही दबाव होता है। अगर पहले वीकएंड में व्यूअरशिप कम रहती है, तो शो या फिल्म की सक्सेस धीमी हो जाती है। इंडस्ट्री में अब सब कुछ आंकड़ों पर बेस्ड है। और कई बार ये आंकड़े भी सही नहीं होते, क्योंकि उनमें जानबूझकर बदलाव कर दिए जाते हैं। हम सबको इस स्थिति में काम करना पड़ रहा है।