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Paloma Dhillon: सोचती थी एक दिन फुटबॉल खिलाड़ी बनना है, फिर एक्टिंग शुरू की तो कोई दूसरी बात दिमाग में नहीं आई

Sat, 30 Sep 2023 06:39 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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पलोमा ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी सिनेमा में सितारों के बच्चों की एक नई खेप इस साल के बाकी बचे तीन महीनों में मैदान में उतरने वाली है। ‘नेटफ्लिक्स’ की फिल्म ‘आर्चीज’ से लॉन्च हो रहे तमाम स्टार किड्स से पहले राजश्री पिक्चर्स की फिल्म ‘दोनों’ में भी तीन नए चेहरे बड़े परदे पर लॉन्च हो रहे हैं। दो कैमरे के सामने और तीसरा कैमरे के पीछे। फिल्म के हीरो राजवीर देओल का इंटरव्यू आप ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ पर ही पढ़ ही चुके हैं, अब मिलिए नवोदित निर्देशक अवनीश बड़जात्या की फिल्म ‘दोनों’ की हीरोइन पलोमा ढिल्लों से। उनसे एक खास मुलाकात के जरिये...
Rajveer Deol: दादाजी ने एक ही बात सिखाई, ये कभी मत सोचना कि तुम एक स्टार के बेटे हो
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पलोमा ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

राजश्री की फिल्म में मौका मिलना हर कलाकार का सपना होता है। 'दोनो' से जुड़ने का अवसर कैसे मिला?  

इस फिल्म के लिए मेरा चार बार ऑडिशन हुआ। इस प्रक्रिया में बहुत कुछ सीखने को मिला। उस समय कोविड का समय था तो पहला ऑडिशन घर से ही बनाकर भेजा। दूसरा ऑडिशन जूम पर हुआ। फिर तीसरी बार राजश्री ऑफिस में बुलाया गया। फाइनल ऑडिशन राजवीर देओल के साथ हुआ, तब जाकर यह फिल्म मिली।

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पलोमा ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, अभिनय की तरफ रुझान कब से हुआ?

कॉलेज के समय ही सोच लिया कि मुझे एक्टिंग में करियर बनाना है। कॉलेज में मैंने नाटकों में भाग लेना शुरू कर दिया था। फिर मैंने यशराज फिल्म्स के कास्टिंग डिपार्टमेंट में शानू शर्मा के सहायक के तौर पर काम किया। इसी दौरान थियेटर में मैंने मकरंद देशपांडे को असिस्टेंट किया। मैने ‘नीरजा’ फिल्म में भी असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया है।

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पलोमा ढिल्लों - फोटो : सोशल मीडिया
कभी कुछ और भी बनने का ख्याल आया, कि बस एक्टर ही बनना था...
जब मैं स्कूल में थी तब स्पोर्ट्स में दिलचस्पी लेती थी। उस समय सोच रही थी कि फुटबॉल खिलाड़ी बनना है। वह दौर ऐसा होता है कि दिमाग में बहुत सारी बातें चलती थी। किसी एक चीज पर आपका फोकस नहीं होता है। मुझे जानवरों से बहुत प्यार है, सोचा था कि वेटरनरी डॉक्टर बनाना है। लेकिन जब पहली बार एक्टिंग की तो उसके बाद फिर कोई बात दिमाग नहीं आई।
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अवनीश बड़जात्या, पूनम ढिल्लों, पलोमा ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मम्मी की कौन सी फिल्में आपने देखी, और उनसे क्या सीखा?

मम्मी (पूनम ढिल्लों) तो मेरी बहुत बड़ी प्रेरणा स्रोत रही हैं। उन्होंने 15 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था। कभी कभी उनकी फिल्में देखकर बहुत इंजॉय करती थी। तो, कभी कभी बहुत इमोशनल हो जाती थी। मैने मम्मी की 'नूरी', 'त्रिशूल' जैसी फिल्मों के अलावा उनके बहुत सारे नाटक भी देखे हैं। 'नूरी' जब पहली बार देखी तो इतनी इमोशनल हो गई थी कि काफी समय तक मम्मी की फिल्में देखनी बंद कर दी थीं।

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पलोमा ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपकी मम्मी ने सनी देओल के साथ फिल्में कीं और आप राजवीर के साथ शुरुआत कर रही हैं। कैसे इंसान लगे वह?
राजवीर के साथ बहुत आसान रहा काम करना। हम दोनों ने दो साल तक इस फिल्म के लिए तैयारी की। फिल्म के निर्देशक अवनीश भी साथ होते थे। शूटिंग पर जाने से पहले हम तीनों आपस में इतने घुल मिल गए कि शूटिंग के दौरान माहौल बहुत सहज हो गया था। राजश्री ने तो परिवार की तरह रखा। सूरज जी (सूरज बड़जात्या) हम तीनों को अपने बच्चे की तरह प्यार करते थे। जिस तरह से वह पारिवारिक फिल्में बनाते हैं, उसी तरह से पूरी यूनिट को एक परिवार की तरह से रखते हैं। सनी सर और मम्मी की फिल्में 'सोहनी महिवाल', 'समंदर', और 'सवेरे वाली गाड़ी' मैंने देखी हैं। 'सवेरे वाली गाड़ी' तो मेरे दिल के बहुत करीब है।
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पलोमा ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म 'दोनों' में आपका क्या किरदार है?
इस फिल्म में मेघना का किरदार निभा रही हूं। वह मुंबई की लड़की है। उसका अपना एक अतीत है। वह ब्रेकअप से निकली है और खुद को खुद में ढूंढ रही है। फिल्म के पहले दिन की शूटिंग का बहुत ही मजेदार अनुभव रहा है। पहले दिन हम कमला मिल कंपाउंड में नाइट क्लब का एक गाना शूट कर रहे थे। फिल्म के निर्देशक अवनीश का इस गाने के लिए बहुत ही खूबसूरत दृष्टिकोण था। वह भी शूटिंग शुरू करने के लिए बहुत ही ज्यादा उत्साहित थे। पहले दिन थोड़ी सी घबराहट थी कि कैसे क्या होगा?  लेकिन इस गाने की शूटिंग के दौरान सारी घबराहट दूर हो गई। 'खट मीठिया' बहुत ही प्यारा गाना है। यह इस फिल्म का मेरा बहुत ही पसंदीदा गीत है।
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