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कभी सख्त मां तो कभी प्यारी दादी बनकर दर्शकों के दिलों में बस गईं थीं दीना पाठक, आजादी की लड़ाई में भी हुई थीं शामिल

Thu, 04 Mar 2021 08:59 AM IST
विजयाश्री गौर एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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दीना पाठक - फोटो : फाइल
बॉलीवुड में मां का किरदार हमेशा से खास रहा है। निरुपा रॉय से किरण खेर तक बॉलीवुड में मां के अलग अलग रूप देखने को मिले। इस लिस्ट में अभिनत्री दीना पाठक का नाम भी शामिल है जिन्होंने पर्दे पर सख्त मां से लेकर प्यारी दादी तक कई किरदार निभाए। 4 मार्च 1922 को गुजरात के अमरेली में जन्मीं दीना पाठक ने पर्दे पर अपने अभिनय से एक अलग छाप छोड़ी थी। उनके जन्मदिन के मौके पर बताते हैं आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।
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दीना पाठक - फोटो : सोशल मीडिया
दीना पाठक का नाम बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों में शामिल है जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को भावुक भी किया और उनका दिल भी जीता। फिल्मों में उन्हें देख ऐसे लगता था कि पड़ोस में ही रहने वाली कोई बुजुर्ग महिला है या फिर अपनी ही दादी हैं। दीना पाठक स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान काफी सक्रिय थीं। उनके अंदर स्वतंत्रता का जोश कुछ ऐसा था कि मुंबई की सेंट जेवियर्स कॉलेज से उन्हें निकाल दिया गया था।
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दीना पाठक
मार्च 1979 में 'फिल्मफेयर' पत्रिका में दीना पाठक ने बताया था कि कॉलेज से बाहर निकाले जाने के बाद उन्होंने दूसरे कॉलेज में पढ़ाई कर अपनी बी.ए. की डिग्री ली। दीना की शादी बलदेव पाठक से हुई। वह मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया के पास कपड़े सिलने की दुकान चलाते थे। बलदेव पाठक, राजेश खन्ना और दिलीप कुमार के कपड़े डिजाइन करते थे। उन्होंने ही राजेश खन्ना के लिए 'गुरु कुर्ता' और ऐसे अन्य कपड़े डिजाइन किए थे।

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दीना पाठक
हालांकि दीना की जिंदगी में ये सुख भी लंबे समय तक नहीं रहा। जब राजेश खन्ना की फिल्में फ्लॉप होने लगीं तो इसका असर बलदेव की दुकान पर पड़ने लगा और एक वक्त ऐसा आया जब उनकी दुकान बंद हो गई। 52 साल की उम्र में बलदेव का निधन हो गया। निधन के बाद दीना की जिंदगी में उनकी दो बेटियां रह गईं रत्ना पाठक शाह और छोटी बेटी सुप्रिया पाठक जो आज अभिनय की दुनिया में जाना-माना नाम हैं।
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दीना पाठक
दीना पाठक ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को अपना फैन बनाया था। उन्होंने 1966 में अपने करियर की पहली हिंदी फिल्म 'उसकी कहानी' में काम किया था। इसके बाद वो 'सात हिंदुस्तानी' और 'सत्यकाम' में नजर आईं। साल 1972 में आई फिल्म 'कोशिश' में उन्होंने गूंगी बहरी लड़की आरती जिसका किरदार जया भादुड़ी ने निभाया था वो उनके मां के रोल में नजर आईं थी। इसके बाद साल 1975 में आई फिल्म 'मौसम' और 1977 की फिल्म 'किताब और किनारा' में वो सशक्त भूमिका में नजर आईं।
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दीना पाठक
1977 में रिलीज हुई श्याम बेनेगल की फिल्म 'भूमिका' में काम कर दीना पाठक ने इंडस्ट्री में खुद को एक बेहतरीन अभिनेत्री के तौर पर स्थापित किया। इसके बाद 'चित्तचोर' में अपने किरदार से वो दर्शकों की पसंदीदा बन गईं। ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म 'खूबसूरत' और 'गोलमाल' में वो एक कड़क मां के किरदार में भी नजर आई। उन्होंने आर्ट और फिर कमर्शियल दोनो ही सिनेमा में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। फिल्म 'परदेस' में उन्होंने महिला चौधरी की दादी का किरदार निभाया जिसे दर्शकों का खूब प्यार मिला। इसके बाद 'देवदास' और 'पिंजर' उनके करियर की आखिरी फिल्में रही। 11 अक्टूबर 2002 को दर्शकों की प्यारी मां और प्यारी दादी बनने वाली दीना पाठक ने हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा को कह दिया।
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