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Birthday Special: हेमा ही नहीं शर्मिला के साथ भी हिट रही धर्मेंद्र की जोड़ी, ये हैं दोनों की कमाल आठ फिल्में

Thu, 08 Dec 2022 07:56 AM IST
निधि पाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर - फोटो : सोशल मीडिया

8 दिसंबर को बॉलीवुड की दो मशहूर शख्सियतों का जन्मदिन होता है। एक तो बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र और दूसरी अपने जमाने की मशहूर अदाकारा शर्मिला टैगोर। आज धर्मेंद्र अपना 87वां जन्मदिन मना रहे हैं तो वहीं शर्मिला टैगोर आज अपना 76वां जन्मदिन मना रही हैं। धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर ने कई यादगार फिल्में साथ की हैं। ऋषिकेश मुखर्जी ने धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर को पहली बार अपनी फिल्म 'अनुपमा' में साथ लेकर आए थे। आइए आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके करियर की फिल्मों के बारे में      

 
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अनुपमा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अनुपमा (1966)

साल 1966 में रिलीज हुई फिल्म 'अनुपमा' में ऋषिकेश मुखर्जी ने धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर पहली बार एक साथ पेश किया था।  'अनुपमा' में शर्मिला टैगोर ने एक ऐसी बेटी का किरदार निभाया था, जो हमेशा अपने पिता के प्यार के लिए तरसती रहती है।  वहीं धर्मेंद्र ने एक लेखक और शिक्षक का किरदार निभाया था। इस फिल्म के बाद धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर की जोड़ी को काफी पसंद किया जाने लगा। इस फिल्म में लता मंगेशकर द्वारा गाया गीत  'धीरे धीरे मचल ऐ दिले बेकरार' आज भी खूब पसंद किया जाता है।

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देवर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

देवर (1966)

मोहन सहगल द्वारा निर्देशित फिल्म 'देवर' साल 1966 में प्रदर्शित धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर की दूसरी फिल्म थी। यह फिल्म प्रसिद्ध बंगाली लेखक तारा शंकर बंदोपाध्याय के लघु उपन्यास 'ना' पर आधारित थी। इस फिल्म को मोहन सहगल की उत्कृष्ट कृति माना जाता है और धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर के शानदार प्रदर्शन और देवेन वर्मा की सराहनीय नकारात्मक भूमिका के लिए खूब प्रशंसा हुई थी। 'देवर' के सभी गाने उस समय बड़े हिट थे और अभी भी बहुत लोकप्रिय हैं, जिसमें विशेष रूप से मुकेश का  'बहारों ने मेरा चमन लूटकर', 'आया है मुझे फिर याद', और लता मंगेशकर गीत 'दुनिया में ऐसा कहा' है।

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मेरे हमदम मेरे दोस्त - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मेरे हमदम मेरे दोस्त  (1968)

अमर कुमार के निर्देशन में बनी  साल 1968 में फिल्म 'मेरे हमदम मेरे दोस्त' धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर के करियर की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर के अलावा ओम प्रकाश, रहमान और मुमताज जैसे बड़े नामों ने काम किया था।  फिल्म में धर्मेंद्र, सुनील की भूमिका में थें, जो अपनी मां और बहन के साथ दिल्ली में रहता है और एक चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप काम करता है।  एक दिन वो अनीता यानी शर्मिला टैगोर को देखता है और उसे अपना दिल दे बैठता है।

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यकीन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

यकीन (1969) 

साल 1969 में रिलीज  बृज सदाना द्वारा निर्देशित फिल्म 'यकीन' में धर्मेंद्र ने दोहरी भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में वह हीरो और  खलनायक की भूमिका में नजर आए थे। 'यकीन' धर्मेंद्र और  शर्मिला टैगोर की सफल फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने एक वैज्ञानिक राजेश का किरदार निभाया था। वह रीता नाम की लडकी से प्यार करता है, जिसका किरदार शर्मिला टैगोर ने निभाया था। राजेश, रीता से मिलने उसके घर जाता है और उसकी मां से उसका हाथ मागता है,जो सहमत हो जाती है। यह जासूसी थ्रिलर फिल्म थी।

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सत्यकाम - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सत्यकाम (1969)

साल 1969 में रिलीज फिल्म 'सत्यकाम' को शर्मिला और धर्मेंद्र के करियर की बेस्ट फिल्मों में से एक माना जाता है।  इस फिल्म में शर्मिला, धर्मेंद्र की पत्नी के रोल में थीं। 'सत्यकाम' के जरिए फैन्स ने धर्मेंद्र का भावुक चेहरा देखा था। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने ईमानदार सत्यप्रिय की भूमिका निभाई थी तो वहीं संजीव कुमार इस फिल्म में धर्मेंद्र के बेस्ट फ्रेंड बने थे। इस फिल्म का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था।

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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

चुपके चुपके (1975)

साल 1975 में रिलीज फिल्म 'चुपके चुपके'  ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर की तीसरी फिल्म थी। इस फिल्म में धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर के अलावा अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, असरानी, ओम प्रकाश काम किया था। 'चुपके चुपके' की कहानी के अलावा इस फिल्म के संगीत की खूब तारीफ हुई थी, जिसे एस.डी. बर्मन ने दिया था। इस फिल्म को धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन के कॉमिक एक्ट के लिए याद किया जाता है।

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एक महल हो सपनों का - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

एक महल हो सपनों का (1975 ) 

'एक महल हो सपनों का' देवेंद्र गोयल द्वारा निर्देशित फिल्म 1975 में प्रदर्शित हुई थी । इसमें अशोक कुमार, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, लीना चंदावरकर, देवेन वर्मा की प्रमुख भूमिका थी। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने विशाल और शर्मिला टैगोर ने अरुणा का किरदार निभाया था। विशाल और अरुणा की मुलाकात होती है और दोनों को प्यार हो जाता है। अरुणा को डॉ. माथुर से पता चलता है कि वह छह  महीने के भीतर अंधी हो जाएगी क्योंकि वह ऑप्टिक एट्रोफी से पीड़ित है। अरुणा ने विशाल को छोड़ने का फैसला किया क्योंकि वह उस पर बोझ नहीं डालना चाहती, जो पहले से ही अपनी विकलांग मां की देखभाल कर रहा है। 

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सनी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सनी (1984)

साल 1984 में राज खोसला के निर्देशन में बनी फिल्म 'सनी'  में धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर के अलावा वहीदा रहमान, सनी देओल और अमृता सिंह ने भी काम किया था। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने  इंद्रजीत का किरदार निभाया था। जिसकी शादी  गायत्री (वहीदा रहमान) होती है, लेकिन वह इस शादी से नाखुश है, क्योंकि वह उसके लिए कोई संतान पैदा करने में असमर्थ है। वह अक्सर वेश्यालयों में जाने लगता है, जहां उसकी मुलाकात सितारा (शर्मिला टैगोर) नाम की एक आकर्षक वेश्या से होती है। दोनों प्यार में पड़ जाते हैं। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने अपने बेटे सनी देओल के पिता की भूमिका निभाई थी। 

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