एक महल हो सपनों का
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एक महल हो सपनों का (1975 )
'एक महल हो सपनों का' देवेंद्र गोयल द्वारा निर्देशित फिल्म 1975 में प्रदर्शित हुई थी । इसमें अशोक कुमार, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, लीना चंदावरकर, देवेन वर्मा की प्रमुख भूमिका थी। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने विशाल और शर्मिला टैगोर ने अरुणा का किरदार निभाया था। विशाल और अरुणा की मुलाकात होती है और दोनों को प्यार हो जाता है। अरुणा को डॉ. माथुर से पता चलता है कि वह छह महीने के भीतर अंधी हो जाएगी क्योंकि वह ऑप्टिक एट्रोफी से पीड़ित है। अरुणा ने विशाल को छोड़ने का फैसला किया क्योंकि वह उस पर बोझ नहीं डालना चाहती, जो पहले से ही अपनी विकलांग मां की देखभाल कर रहा है।