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शुरू से लेकर आज तक, कितना बदल गया बॉलीवुड, स्टारडम तक पहुंचे एक्टर्स ने ऐसे भी गुजारी जिंदगी

Sun, 20 Jan 2019 02:51 PM IST
विजय जैन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Amitabh Bachchan, Rajesh Khanna - फोटो : file photo
आग का दरिया है और नाचते-गाते, रूठते-मनाते, हंसते-हंसाते, उम्र को छिपाते, अभिनय पर जमते, कभी विवादों से उखड़ते पार उतरना होता है। कोई चार दशक से मैदान में हैं, तो कोई दो दशक से। बॉलीवुड में उन्होंने कितने बसंत देखे और कितनी बार पतझड़ को महसूस किया, इसका सटीक लेखा-जोखा तो बॉक्स ऑफिस के पास होता है, लेकिन दर्शकों का प्यार भी मायने रखता है।
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dilip kumar, raj kapoor - फोटो : file photo
कभी तीन सितारे चमकते थे- दिलीप कुमार, राज कपूर और देवानंद। ढेर सारी सफल फिल्में और असफलताएं भी कम नहीं लेकिन तब शायद दर्शकों का प्यार कुछ अलग किस्म का था। फिल्में चलें तो ठीक। न चले तो भी प्यार प्यार ही रहता था। इस तिकड़ी के बाद भी ढेर सारे सितारे आए। धूम मची। 
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rajesh khanna - फोटो : file photo
फिल्मों के हिट होने या फ्लॉप होने पर सितारों की कहानियां भी बदलती गईं। असली स्टारडम शुरू हुआ राजेश खन्ना के उदय से। 6 फिल्मों में हल्की-फुल्की चर्चा के बाद जब 'आराधना' आई तो सिनेमा का नया दौर शुरू हो चुका था। लगातार एक के बाद एक हिट। 1966 में उनकी 'आखिरी खत' आई थी और लगभग 1975 तक हिंदी सिनेमा का बॉक्स ऑफिस उन्हीं के नाम से शुरू होता था। 

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Amitabh Bachchan, Rajesh Khanna - फोटो : file photo
2012 तक उनकी फिल्में आती रहीं, लेकिन राजनीतिक सक्रियता और कुछ कारणों से बॉक्स ऑफिस पर वह दमदार नहीं रहे। उन कुछ कारणों में एक कारण था, अमिताभ बच्चन का कद। अमिताभ बच्चन 1969 में 'सात हिंदुस्तानी' के साथ फिल्मों में आए थे। वह राजेश खन्ना के साथ 'आनंद' और 'नमक हराम' में नजर आए लेकिन 'जंजीर' के बाद उनकी मौजूदगी का मतलब बदल गया। वे जहां खड़े हो जाते, लाइन वहीं से शुरू होती। आज भी हालात बदले नहीं हैं। राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन ने सफलता का जो दौर देखा वो और किसी के लिए संभव नहीं हो पाया। फिर खान तिकड़ी की चर्चा होने लगी। 
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Aamir Khan Shah rukh Khan and Salman Khan - फोटो : file photo
आमिर-शाहरुख-सलमान। 1990 से लेकर अब तक इसी तिकड़ी का बॉलीवुड पर जलवा रहा। इस तिकड़ी से अलग गोविंदा, अजय देवगन, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और सैफ अली खान भी 90 के दशक के प्रमुख अभिनेता में शामिल रहे, लेकिन 2000 आते-आते अक्षय कुमार, अजय देवगन और सैफ अली खान ही खुद को बॉलीवुड में प्रासंगिक रख सके। गोविंदा पहले राजनीति में गए और राजनीति से लौटने के बाद उन्होंने कुछ फिल्में कीं लेकिन ‘पार्टनर’ को छोड़कर उनकी एक भी फिल्म हिट की दहलीज पर नहीं पहुंच सकी। 
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hrithik roshan - फोटो : file photo
कुछ ऐसा ही हाल सुनील शेट्टी का रहा, अब सुनील शेट्टी ज्यादातर अतिथि कलाकार के रूप में ही फिल्मों में नजर आते हैं। 2000 के शुरुआती वर्षो में बॉलीवुड को अभिनेताओं के रूप में कुछ नए चेहरे मिले, जिनमें ऋतिक रोशन, अर्जुन रामपाल, जॉन अब्राहम, अभिषेक बच्चन, तुषार कपूर प्रमुख रहे लेकिन वर्तमान में ऋतिक रोशन और जॉन अब्राहम ही अपने फिल्मी करियर को बचा पाने में सबसे ज्यादा सफल रहे। 2018 में जॉन की दोनों फिल्में हिट रहीं, वहीं ऋतिक रोशन एक हिट, एक फ्लॉप फिल्म के सिलसिले के साथ आगे बढ़ रहे हैं। 
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ayushmann khurrana - फोटो : file photo
तुषार कपूर तो बहुत पहले ही रेस से बाहर हो गए थे, लेकिन अर्जुन रामपाल और अभिषेक बच्चन ने मल्टी स्टारर फिल्मों में काम करके खुद को बॉलीवुड में प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश की लेकिन उनकी यह रणनीति ज्यादा नहीं चल पाई। अभिषेक बच्चन को ‘मनमर्जियां’ फिल्म से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन फिल्म के औसत प्रदर्शन से उनका करियर फिर धरातल पर चला गया। 2010 आते-आते रणबीर कपूर, रणवीर सिंह, अर्जुन कपूर, वरुण धवन, सिद्धार्थ मल्होत्रा, आयुष्मान खुराना, राजकुमार राव और टाइगर श्रॉफ जैसे नए सितारों का बॉलीवुड में आगमन हुआ। 

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siddharth malhotra - फोटो : file photo
इनमें से कुछ सितारे जहां अपने स्टारडम को बरकरार रखने में कामयाब रहे हैं, जबकि कुछ का करियर उठापटक के दौर से गुजर रहा है। इनमें अर्जुन कपूर और सिद्धार्थ मल्होत्रा प्रमुख नाम हैं। वहीं 2018 जाते-जाते एक और बदलाव का सूचक बन गया कि अब कंटेंट ही किंग है। स्क्रिप्ट ही किंग मेकर है। फिल्मी गलियारे में अब यही बातें हो रहीं हैं कि अगर फिल्म की कहानी अच्छी है, तो फिल्म में कोई भी कलाकार हो, फिल्म हिट है। 
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stree - फोटो : file photo
पिछले वर्ष रिलीज हुईं ‘बधाई हो’ और ‘स्त्री’ की सफलता ने यही साबित किया। वहीं अगर फिल्म की कहानी अच्छी नहीं है तो कितना भी बड़ा कलाकार क्यों न हो, फिल्म फ्लॉप हो जाएगी। अब फिल्मों की कहानियां भी बदल रही हैं, मारधाड़ और एक्शन से अलग अब ऐसे विषयों पर फिल्में बन रही हैं, जिनके बारे में कभी सोचा भी नहीं जाता था। 
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