आग का दरिया है और नाचते-गाते, रूठते-मनाते, हंसते-हंसाते, उम्र को छिपाते, अभिनय पर जमते, कभी विवादों से उखड़ते पार उतरना होता है। कोई चार दशक से मैदान में हैं, तो कोई दो दशक से। बॉलीवुड में उन्होंने कितने बसंत देखे और कितनी बार पतझड़ को महसूस किया, इसका सटीक लेखा-जोखा तो बॉक्स ऑफिस के पास होता है, लेकिन दर्शकों का प्यार भी मायने रखता है।