भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में इमरजेंसी लगाई थी। इंदिरा गांधी के इस फैसले को 44 साल हो चुके हैं। इस इमरजेंसी को देश के लोकतंत्र में काले अध्याय के तौर पर याद किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि 44 साल पहले जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी का फैसला लिया था तो उनकी बड़े राजनेता सहित फिल्मी हस्तियों ने भी काफी आलोचना की थी।
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देवानंद
- फोटो : file photo
इमरजेंसी के 44 साल पूरे होने पर हम आपको फिल्मी कलाकारों और निर्देशकों से जुड़ा किस्सा बताने जा रहे हैं। 1975 में जब देश में इमरजेंसी लगी तो देश की राजनीति में बहुत बदलाव आए थे। नई पार्टियों ने इस दौर को अपने लिए बेहतरीन मौका समझा। जहां एक ओर जनसंघ, जनता पार्टी का रूप लेकर कांग्रेस को टक्कर देने की तैयारी में जुटा था वहीं दूसरी ओर कुछ फिल्मी सितारे भी तत्कालीन राजनीति में उतरने का मन बना चुके थे ।
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इमरजेंसी खत्म होने के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को पहली बार मुंह की खानी पड़ी थी। पहली बार देश को एक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री मिला और वो थे मोरारजी देसाई, लेकिन कांग्रेस (ओ), जनसंघ, भारतीय लोकदल और समाजवादी पार्टी के गठजोड़ से बनी यह पार्टी लंबे समय तक देश की सत्ता नहीं संभाल पाई। 1979 में जनता सरकार के पतन के साथ नए चुनाव का एलान हुआ जिसके लिए फिल्मी सितारों ने भी कमर कस ली थी।
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चार सितंबर 1979 को मुंबई के ताजमहल होटल में हुई एक प्रेस कांफ्रेंस में ‘नेशनल पार्टी’ के गठन की घोषणा की गई। इसी के साथ पार्टी का घोषणापत्र भी जारी किया गया। इस पार्टी के अध्यक्ष थे अभिनेता देव आनंद। इस पार्टी का मुख्यालय वी. शांताराम के मुंबई के परेल स्थित राजकमल स्टूडियो में बनाया गया। हालांकि इसका सक्रिय संचालन देव आनंद के दफ्तर से ही होता था।
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इस पार्टी में देव आनंद और उनके भाई विजय आनंद के अलावा निर्माता-निर्देशक वी. शांताराम, जीपी सिप्पी, श्रीराम बोहरा, आइएस जोहर, रामानंद सागर, आत्माराम, शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेंद्र, हेमामालिनी, संजीव कुमार जैसे अनेक सितारे भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी से जुड़ गए थे। इस पार्टी से लोग बड़ी संख्या में जुड़ने लगे थे। पार्टी की रैलियों में भी खूब भीड़ जमा होती थी, जिसे देख मुख्यधारा की पार्टी की पेशानी पर लकीरें बढ़ने लगी।
सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जनता सरकार और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जीपी सिप्पी और रामानंद सागर जैसी असरदार फिल्मी हस्तियों को नसीहत दी कि चुनाव के बाद होने वाली मुश्किल से फिल्म उद्योग को बचाना है तो वे इस ‘तमाशे’ को बंद कर दें। धीरे- धीरे नेशनल पार्टी में सक्रिय फिल्मी कलाकार किनारा करने लगे और देव आनंद लगभग अकेले ही रह गए। बाद में उन्होंने भी नेशनल पार्टी के विचार को हमेशा-हमेशा के लिए त्याग दिया।