laxmi agarwal
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'जब कोई भी अटैक होता है। ना सिर्फ हमारे पूरे परिवार की जिंदगी बदल जाती है बल्कि अचानक से एक नया मोड़ आ जाता है क्योंकि वो इंसान एक बार अटैक करता है, सोसाइटी बार-बार अटैक करती है। जीने नहीं देती जिससे जिसके ऊपर क्राइम हुआ है, वो या परिवार का कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। मुझे पता है कि हर साल ये तारीख मेरे जीवन में आएगी और आज का दिन उस दिन जैसा ही तकलीफ भरा होता है। उस वक्त तो पापा भाई भी थे पर आज वो भी नही हैं, हर 22 अप्रैल मेरे लिए कुछ नई तकलीफ़ देता है, जिसके बारे में सोच कर भी डर जाती हूं, आखिर मैं भी इंसान हूं।'