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राष्ट्रपति भवन के बाहर रूप बदलकर पहुंचीं दीपिका, कई दिनों से दिल्ली में ऐसे ही बिता रहीं वक्त

Tue, 23 Apr 2019 06:21 PM IST
शिप्रा सक्सेना एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Deepika Padukone with chhapaak crew - फोटो : twitter
दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) बीते कई दिनों से दिल्ली में भेष बदलकर घूमते हुए देखी जा रही थीं। कभी वह ऑटो से उतरती हुई दिखाई दीं तो कभी बाइक पर सवार। इतना ही नहीं वह दिल्ली के मशहूर बाजार जनपथ में भी शॉपिंग करते हुए नजर आई थीं। खास बात यह है कि दीपिका को उनके फैंस भी पहचान नहीं पा रहे थे। इस तरह से दिल्ली की सड़कों पर दीपिका क्यों घूम रही थीं इस बात का खुलासा अब बॉलीवुड की मशहूर डॉयरेक्टर ने किया।
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Deepika Padukone with chhapaak crew - फोटो : twitter
दरअसल, दीपिका 'छपाक' फिल्म की शूटिंग कर रही थीं जिस वजह से उन्हें कई बार देखा गया। हालांकि अब दीपिका वापस मुंबई चली गई हैं क्योंकि फिल्म की आधी शूटिंग पूरी हो चुकी है। इस बात की जानकारी फिल्म की डायरेक्टर मेघना गुलजार ने ट्वीट करके दी। मेघना गुलजार ने लिखा- 'आखिरकार फिल्म की आधी शूटिंग पूरी हो गई। दिल्ली शिड्यूल पूरा हो गया।' 
 

 
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Deepika Padukone with chhapaak crew - फोटो : twitter
इस ट्वीट के साथ मेघना गुलजार ने फिल्म की स्टारकास्ट के साथ दो तस्वीरें भी शेयर की हैं। इन तस्वीरों में दीपिका, मेघना गुलजार और पूरी स्टारकास्ट राष्ट्रपति भवन के बाहर पोज देती हुई नजर आई। आपको बता दें, मेघना गुलजार के निर्देशन में बन रही 'छपाक' से लक्ष्मी अग्रवाल लगातार चर्चाओं में हैं। लक्ष्मी अग्रवाल वहीं एसिड पीड़िता हैं जिन पर 'छपाक' फिल्म आधारित है। 

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chhapaak - फोटो : social media
हाल ही में लक्ष्मी ने सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी को लेकर एक इमोशनल पोस्ट लिखा। इस पोस्ट के साथ लक्ष्मी ने अपनी एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो भी शेयर की। लक्ष्मी लिखती हैं, 'आज मेरे अटैक को 14 साल हो गए हैं। इन 14 सालों में बहुत कुछ बदला है, बहुत सारी चीजें अच्छी हुईं बहुत सारी चीजें बुरी जिसके बारे में सोच कर भी डर लगता है, लोगों को लगता है एसिड अटैक हुआ है ये सबसे बड़ा दुःख है, सबको यही दिखता है।'
 
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laxmi agarwal - फोटो : twitter
'जब कोई भी अटैक होता है। ना सिर्फ हमारे पूरे परिवार की जिंदगी बदल जाती है बल्कि अचानक से एक नया मोड़ आ जाता है क्योंकि वो इंसान एक बार अटैक करता है, सोसाइटी बार-बार अटैक करती है। जीने नहीं देती जिससे जिसके ऊपर क्राइम हुआ है, वो या परिवार का कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। मुझे पता है कि हर साल ये तारीख मेरे जीवन में आएगी और आज का दिन उस दिन जैसा ही तकलीफ भरा होता है। उस वक्त तो पापा भाई भी थे पर आज वो भी नही हैं, हर 22 अप्रैल मेरे लिए कुछ नई तकलीफ़ देता है, जिसके बारे में सोच कर भी डर जाती हूं, आखिर मैं भी इंसान हूं।'
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