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उन्होंने कहा, ‘‘ बदलाव देखने के लिए मुझे बार-बार तेजाब पीड़ितों की कहानियां बयां नहीं करनी पड़ेगी। मैं उम्मीद करती हूं कि हमारी फिल्म के साथ हम एक समाज के रूप में और तेजाब पीड़ितों के लिए, खुद को बदलना शुरू कर देंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो समाजिक तौर पर हमने जरूर कुछ गलत किया होगा। सिनेमा एक दमदार माध्यम है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि यह वह बदलाव ला सकेगा, जो हम चाहते हैं।’’