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इन 10 किरदारों ने दीपिका को बनाया हीरोइन नं. 1, हर किरदार में दिखा अलहदा और असरदार अभिनय

Sat, 04 Jan 2020 04:22 PM IST
प्रतीक्षा राणावत मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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दीपिका पादुकोण - फोटो : अमर उजाला
बहुमुखी प्रतिभा की धनी अभिनेत्री दीपिका पादुकोण मौजूदा दौर में हिंदी सिनेमा की नंबर वन हीरोइन हैं। वह सबसे ज्यादा मेहनताना पाने वाली अदाकारा तो हैं, हिंदी सिनेमा में उन्हें अब तक तीन बार फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वह देश और दुनिया की सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली हस्तियों में से भी एक हैं। दीपिका ने फिल्म दर फिल्म खुद को निखारा है, आज हम आपको बताते हैं इनके 10 बेहतरीन किरदारों के बारे में।
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Om Shanti Om - फोटो : twitter

किरदार : शांतिप्रिय / सैंडी
फिल्म : ओम शांति ओम (2007)


यह फिल्म एक फिल्मी दुनिया का ही ड्रामा है। शांतिप्रिया (दीपिका पादुकोण) सिनेमा की एक अभिनेत्री है, जिसने गुप्त रूप से एक बड़े निर्माता मुकेश मेहरा (अर्जुन रामपाल) से शादी कर ली है। इंडस्ट्री के एक जूनियर कलाकार ओमप्रकाश मखीजा (शाहरुख खान) को शांतिप्रिया से प्यार हो जाता है। दोनों के रिश्ते को कोई मुकाम तो नहीं मिलता बल्कि ओम एक हादसा होते हुए देखता है जिसमें मुकेश शांति को जिंदा जला देता है। यह घटना ओम की आंखों के सामने हमेशा नाचती रहती है। दीपिका की यह पहली फिल्म है और इसी फिल्म से उन्हें पहचान मिलना शुरू हो गई थी। इस फिल्म में उनके कई रूप देखने को मिले। एक अभिनेत्री होकर अभिनेत्री का किरदार निभाना एक मंजे हुए कलाकार के लिए आसान होता होगा लेकिन इंडस्ट्री में कदम रखने वाले कलाकार के लिए तो ये एक चुनौतीपूर्ण किरदार ही माना जाएगा। यह उनकी शुरुआत थी फिर भी उन्होंने अपने हिस्से का पूरा अभिनय बड़ी शालीनता से किया। इसके लिए उन्हें बेस्ट डेब्यू फीमेल का फिल्मफेयर अवार्ड मिला।
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Love Aaj Kal - फोटो : amar ujala mumbai

किरदार : मीरा पंडित
फिल्म : लव आज कल (2009)


मीरा पंडित (दीपिका पादुकोण) एक बहुत ही समझदार लड़की है। वह अपने सारे फैसले बड़े सोच समझकर लेती है। वह लंदन में अपने बॉयफ्रेंड जय (सैफ अली खान) के साथ रहती है। दोनों की जिंदगी बहुत अच्छी चल रही होती है तभी उनके करियर डगमगा जाते हैं। अब एक-दूसरे का बोझ उठाने और नीचा दिखाने से अच्छा वह एक दूसरे से अलग होना पसंद करते हैं। मीरा भारत वापस लौटती है और अपना काम आगे जारी करती है। एक हल्की-फुल्की कहानी में दीपिका ने अपने अभिनय से फिल्म में पूरी जान डाल दी है। ऐसी कहानियां तो हम अक्सर टीवी पर देखा करते हैं लेकिन ऐसा अभिनय थोड़ा कम ही देखने को मिलता है। मीरा का किरदार एक साधारण लड़की का ही है। बस मीरा और जय का रिश्ता आज के जमाने का है। भले ही यह रिश्ता आज के जमाने का है, लेकिन उनका प्यार फेसबुक और व्हाट्सएप वाला नहीं है। बस समय के साथ उनके नजरिए बदलते रहते हैं। इस फिल्म में दीपिका के अभिनय को बहुत सराहा गया, और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित भी किया गया।

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Cocktail - फोटो : amar ujala mumbai

किरदार : वेरोनिका मलानी
फिल्म : कॉकटेल (2012)


वेरोनिका के रूप में ये दीपिका बहुत ही अलग है। इस पर सिर्फ अपनी जिंदगी खुलकर जीने का भूत सवार है। वह पार्टी करती है, उसके खुले विचार हैं, न किसी का दखल अपनी जिंदगी में चाहती है और न किसी की जिंदगी में दखल देती है, लेकिन दिल की बहुत साफ और अच्छी है। लन्दन जैसे बड़े, महंगे और मीरा (डायना पेंटी) के लिए बेगाने शहर में वेरोनिका एक दोस्त की तरह उसकी मदद करती है। वह उसे जानती नहीं है फिर भी उसके आंसू पोंछकर अपने घर ले आती है। एक दिन वेरोनिका और मीरा पार्टी करने के लिए एक क्लब में जाते हैं, और वहां वेरोनिका को गौतम (सैफ अली खान) मिलता है। वह उसके साथ पहले नाचती है और फिर हमबिस्तर हो जाती है। ये उसके लिए आम बात थी। शारीरिक संबंधों के बाद वह जज्बात का कोई रिश्ता नहीं बनाना चाहते, फिर भी गौतम, मीरा और वेरोनिका अच्छे दोस्त बन जाते हैं। बाद में मीरा थोड़ा गंभीर भी होती है, और हैप्पी एंडिंग भी होती है। वैसे तो मीरा अपने आप से ही बहुत खुश थी, लेकिन उसका किरदार यही तो बताता है कि आप कितने भी मजे में मस्त रहो लेकिन एक दिन आपको गम्भीर होना ही पड़ता है। इस फिल्म में भी दीपिका के बेहतरीन अभिनय जारी रहा और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामांकन मिला।
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chennai express

किरदार : मीनालोचनी अजगुसुन्दरम
फिल्म : चेन्नई एक्सप्रेस (2013)


जब दीपिका पादुकोण फिल्म में शाहरुख खान को अपना पूरा नाम बताती हैं तो वो यही कहते हैं कि मेरे लिए सिर्फ मीना ही बहुत है। तो यहां हमारे लिए भी मीना ही बहुत है। मीना अपने घर से भाग जाती है और उसकी मुलाकात गलती से राहुल (शाहरुख खान) से होती है। अब राहुल खुश तो बहुत होता है क्योंकि उसे पता नहीं रहता कि मीना अपने इलाके के सबसे बड़े गुंडे की लड़की है। जब उसे यह बात पता चलती है तो उसके पैरों के नीचे से जमीन निकल जाती है। इसके बाद तो मीना खुश और राहुल के दिन भर गए। दीपिका पादुकोण खुद हैदराबाद से हैं और ये फिल्म तमिलनाडु की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में उनकी हिंदी, तमिल और मराठी भाषा बोलने का लहजा बिल्कुल एक दक्षिण भारतीय इंसान जैसा है। यह देखने में काफी प्रामाणिक और मजाकिया लगता है और इससे ये भी पता चलता है कि दीपिका ने अपने इस किरदार पर मेहनत की है। इस मेहनत का उन्हें फल भी मिला। इसके लिए दीपिका को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड में नामित किया गया।
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RAAM LEELA

किरदार : लीला सनेड़ा
फिल्म : गोलियों की रासलीला राम-लीला (2013)


दीपिका पादुकोण की यह फिल्म अपने नाम को लेकर काफी विवादों में रही थी। पहले इसका नाम सिर्फ रामलीला रखा गया था। जब हिन्दू समुदाय के लोगों ने इसका विरोध किया तो फिल्म के निर्माताओं ने इसका नाम बदलकर गोलियों की रासलीला राम-लीला रखा। इस फिल्म में रजाड़ी और सनेड़ा नाम के दो समुदाय हैं जो एक दूसरे के कट्टर विरोधी हैं। लीला (दीपिका पादुकोण) सनेड़ा समुदाय से है और उसे रजाड़ी समुदाय के राम (रणवीर सिंह) से प्यार हो जाता है। दोनों का प्यार परवान चढ़ रहा होता हैं तब उनके इस कृत्य की खबर उनके समुदायों के लोगों को हो जाती है और वो लोग इन दोनों की जान के दुश्मन बन जाते हैं। और अंत में इसका अंत करके ही दम लेते हैं। लीला प्यार में इतनी पागल होती है कि उसे अपने आसपास घट रही घटनाओं से भी कोई लेना देना नहीं था। राम से मिले बिना उसे चैन नहीं आता था। राम की भी कुछ ऐसी ही हालत थी। चुपके से मिलना और प्यार में हदों को पार करना देखने में काफी वास्तविक और अच्छा महसूस कराता है। इस फिल्म में दीपिका का प्रदर्शन उनके सबसे अच्छे अभिनयों में से एक माना जाता है। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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RACE 2

किरदार : अलीना मलिक
फिल्म : रेस 2 (2013)


यह किरदार फिल्म में ध्यान देने लायक तो नहीं था लेकिन फिर भी इस किरदार ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उसका पूरा श्रेय दीपिका पादुकोण की अलीना मलिक के रूप में किए अभिनय को जाता है। अलीना फिल्म में रणवीर (सैफ अली खान) की पत्नी और अरमान मलिक (जॉन अब्राहम) की सौतेली बहन के किरदार में हैं। अलीना का किरदार कहानी को कई रुचिकर मोड़ देता जिसपर लोग तालियां बजा सकें। अपने प्यार रणवीर के लिए वह अरमान को भी धोखा दे देती है क्योंकि उसे अपने भाई पर भरोसा नहीं था। यह एक ऊंचे लेवल का खेल है जिसे अलीना और रणवीर, अरमान के खिलाफ खेल रहे होते हैं। और अंत में उसे मात भी देते हैं। इस फिल्म में अलीना की अदाओं के सब दीवाने थे। वह अपने अभिनय के हुनर से सब कुछ इतना अप्रत्याशित रूप से करती है, जिसकी पर्दे से बाहर बैठे और फिल्म में काम कर रहे कलाकारों को भी भनक तक नहीं लगती। और इसी अंदाज ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा।

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bajirao mastani

किरदार : मस्तानी
फिल्म : बाजीराव मस्तानी (2015)


मस्तानी (दीपिका पादुकोण) अपने नाम के मुताबिक एक मस्त औरत है, जो एक योद्धा भी है। योद्धाओं का आकर्षण ही अलग होता है। अपनी धुन में ही खोए रहते हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी जान तक देने के लिए तैयार रहते हैं। मस्तानी एक राजपूत राजा छत्रसाल की बेटी है। उनके राज्य पर कुछ बाहरी शक्तियां आक्रमण करती हैं, तो ऐसे में उन्हें बाजीराव (रणवीर सिंह) की याद आती है। बाजीराव दुश्मन को उनके राज्य से खदेड़ने में मदद भी करते हैं। बाजीराव और मस्तानी एक दूसरे की बहादुरी पर मोहित हो जाते हैं और प्यार करने लगते हैं। उन दोनों की मोहब्बत को जोर तब मिलता है जब उन्हें साथ में वक्त बिताने का मौका मिलता है। दोनों की नजदीकियां बढ़ती हैं और दोनों एक दूसरे में खो जाते हैं। बाजीराव पहले से शादीशुदा हैं, फिर भी वह अपनी पनाह में मस्तानी को रखते हैं। बाजीराव की पत्नी काशीबाई (प्रियंका चोपड़ा) और मस्तानी के बीच वार्तालाप के कुछ सीन आपको व्यथित कर सकते हैं। मस्तानी के किरदार में घुसीं दीपिका पादुकोण उसमें इतने गूढ़ तरीके से रमी हुई हैं कि उनके साथ आप भी फिल्म को जी सकते हैं। इस फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।

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piku

किरदार : पीकू बैनर्जी
फिल्म : पीकू (2015)


पीकू (दीपिका पादुकोण) अनुशासित बहुत हैं। पीकू शुरुआत से ऐसी नहीं थी। वह एक खुशमिजाज, खुलकर जीने वाली और बेपरवाह लड़की थी, लेकिन उसके बूढ़े पिताजी भास्कर (अमिताभ बच्चन) की बीमारी ने उसे ऐसा बना दिया। पीकू एक आर्किटेक्ट है और अपनी नौकरी के साथ वह अपने पापा का ख्याल भी रखती है। वैसे वह बहुत दयालु हृदय वाली और सबसे प्यार करने वाली लड़की है लेकिन अगर वह किसी चीज में ढील देगी तो कहीं ऐसा न हो कि उसके पिताजी अपनी सेहत का ख्याल न रखें, समय पर अपनी दवाई न लें। उनको सही तरह से रखने के लिए ही वह बहुत मजबूत औरत के रूप में नजर आती है। पीकू अपने पापा को खुश भी देखना चाहती है और उन्हें लापरवाही भी नहीं बरतते देखना चाहती। ये चीजें एक साथ उसे कहीं न कहीं चुभती हैं। उसे ये बात भी अंदर ही अंदर खाए जाती है कि वह इतने वक्त से क्या कर रही है? न जिंदगी में कोई मजा है और न ही उसका कोई बॉयफ्रेंड है। बस रोज नौकरानी और उसके पापा के बीच की खिचखिच सुननी है। इन सब चीजों को सोचकर वह कभी कभी स्वार्थी बनने की कोशिश भी करती है लेकिन फिर दूसरे ही पल अपने बूढ़े, बीमार पिता जी का ख्याल आया जाता है। एक बेटी के रूप में मां जैसा किरदार दीपिका ने बखूबी निभाया। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड से सुशोभित किया गया।

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Tamasha - फोटो : amar ujala mumbai

किरदार : तारा माहेश्वरी
फिल्म : तमाशा (2015)


तारा माहेश्वरी (दीपिका पादुकोण) एक हंसमुख लड़की है लेकिन अपने आप को छुपा कर रखना चाहती है। लोगों से मिलना झुलना, बातें करना उसे खास पसंद नहीं है। जब वह कोर्सिका में छुट्टियां मना रही है होती तब वहां उसकी मुलाकात उसके बचपन के दोस्त वेद (रणबीर कपूर) से होती है जो इससे एक लंबे समय से मिली नहीं होती है। दोनों मिलते हैं और जान पहचान भी होती है। लड़कियां अक्सर मजाकिया किस्म के लड़कों को पसंद करती हैं ताकि वह उनकी जिंदगी को हमेशा खिलखिलाती हुई रखे। वेद बहुत मजाकिया किस्म का लड़का था और काफी अच्छा समय दोनों एक साथ बिताया। इसलिए तारा उसे पसंद करने लगती है। लेकिन वेद इन सब चीजों से दूर रहने के लिए ही तो घर से बाहर आया था। वे दोनों हिंदी सिनेमा के मशहूर किरदारों की नकल करके खूब मजे किया करते थे। तारा के इस किरदार ने कई जिंदगियों का अनुभव कराया, जो हम रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर करते हैं।
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padmavati

किरदार : रानी पद्मावती 
फिल्म : पद्मावत (2018)


यह कहानी मेवाड़ के राजा महारावल रतन सिंह (शाहिद कपूर) की पत्नी रानी पद्मावती (दीपिका पादुकोण) के मान और सम्मान की है। इस फिल्म में रानी पद्मावती के किरदार में दीपिका पादुकोण ने राजपूतों की आन, बान और शान के लिए महल की सभी औरतों के साथ जौहर कर लिया था। कहानी उस वक्त की है जब मुगल सम्राट अलाउद्दीन खिलजी (रणवीर सिंह) अपने साम्राज्य को भारत में फैला रहा था। लेकिन उसके आगे एक बहुत बड़ी रुकावट मेवाड़ था। मेवाड़ अपनी बहादुरी के लिए हमेशा मशहूर रहा है। क्योंकि वहां की औरतें भी किसी योद्धा से कम नहीं थी। मेवाड़ के राजा रावल रतन सिंह रानी पद्मावती को सिंघला प्रदेश से ब्याह कर लाए थे। रानी पद्मावती बला की खूबसूरती थीं। दिल्ली के तख्त पर कब्जा कर लेने वाले मुगल बादशाह खिलजी से वह बिल्कुल नहीं डरती थीं। उन्होंने ही राज्य की बाकी औरतों को निडर और साहसी बनाया। उन्होंने ही औरतों को उनकी ताकत का एहसास कराया। फिल्म में रानी के रूप में दीपिका का चाल-ढाल और बात करने का लहजा काफी प्रभावी है। यह किरदार औरतों के लिए बहुत प्रेरणादायी है, साथ ही मर्दों के औरतों के प्रति नजरिए को भी बदलने वाला है। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए दीपिका को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया। 
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