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'कोर्ट रूम ड्रामा' बॉलीवुड का हिट फॉर्मूला?

Thu, 08 Sep 2016 03:19 PM IST
सुनीता पाण्डेय/संवाद्दाता, बीबीसी
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- फोटो : bbc
आम जिंदगी में कानूनी पचडों में फंसे लोगों के लिए कोर्ट के अंदर चल रही कार्यवाही, वकीलों के दांव-पेंच और जज के बजते हथौडे किसी बुरे सपने से कम नहीं होते। लेकिन जब यही अदालत फिल्मी पर्दे पर अपने रोमांच के साथ उतरती है, तो दर्शक तालियों की बौछार कर देते हैं।
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1960 में बनी बीआर चोपडा की फिल्म 'कानून' से लेकर हालिया रिलीज 'रुस्तम' तक की कामयाबी बताती है कि कोर्ट रूम ड्रामा में दर्शकों की दिलचस्पी बनी हुई है। बीआर चोपडा की ट्रेंडसेटर फिल्म 'कानून' के बाद फिल्मों में अदालत के दृश्य एक तरह से जरूरी मान लिए गए।
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1983 में आई अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी और रजनीकांत स्टारर 'अंधा कानून' से अदालत एक बार फिर फिल्मों में छा गई। इस फिल्म की कामयाबी के बाद कानून, फिल्मी सीन से आगे बढकर फिल्मों के नाम में भी शामिल हो गया और ऐसे नाम वाली फिल्मों की बाढ आ गई।

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1985 में सुभाष घई के निर्देशन में बनी अनिल कपूर, मीनाक्षी शेषाद्री स्टारर फिल्म 'मेरी जंग' भी अदालत के सीन से दर्शकों को अपनी ओर खीचने में कामयाब रही।
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लेकिन इसी दौर की 'आज का अंधा कानून', 'फर्ज और कानून', 'कानून अपना-अपना', 'कानून क्या करेगा', 'कायदा-कानून' और 'कुदरत का कानून' जैसी करीब दर्जन भर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर पिट गईं और इस सब्जेक्ट से निर्माताओं का भरोसा उठने लगा।
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फिर 1993 में आई राजकुमार संतोषी की फिल्म 'दामिनी' के जरिए कानून एक बार फिर फिल्मों के केंद्र में आ गया। 90 के दशक में भी इस फिल्म ने लगभग 17 करोड रुपए कमाए थे। इस फिल्म में कानून की सुस्त रफ्तार और अदालती कार्यवाहियों को लेकर आम जनता के गुस्से को सनी देओल ने जो तेवर दिया, वह आज भी लोगों की जेहन में ताजा है। तारीख पर तारीख जैसे डायलॉग के बाद तो फिल्मों में कोर्ट रूम सीन्स, जैसे एक बार फिर से जरूरी हो गए और फिल्म निर्माता अपने-अपने हिसाब से कानून की व्याख्या करते रहे।
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साल 2004 में अब्बास-मस्तान की फिल्म 'ऐतराज' ने भी बॉक्स ऑफिस पर 24 करोड कमा कर साबित कर दिया कि इसके दांव-पेंच अभी भी दर्शकों को पसंद आते हैं। कोर्ट में अमरीश पुरी और परेश रावल के बीच चली नोंक-झोंक के बाद अक्षय कुमार को बचाने के लिए एक पत्नी (करीना कपूर) का वकील के किरदार में आना दर्शकों को पसंद आया।

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साल 2011 में आई फिल्म 'ओ माई गॉड' ने तो भगवान को ही अदालत में लाकर खडा कर दिया और सबूतों और दलीलों की कसौटी पर कसी इस फिल्म को देखने के बाद, दर्शक वाह-वाह कर उठे। 20 करोड की लागत में बनी इस फिल्म ने 181 करोड का बिजनेस किया था।

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अदालत की गंभीर कार्यवाही को कॉमिक तरीके से दिखाने की कोशिश की निर्देशक सुभाष कपूर ने अपनी फिल्म 'जौली एलएलबी' में। 10 करोड की लागत में बनी इस फिल्म में भारत की एक निचली अदालत में कानून को तोड मरोड कर पेश करने की वकीलों की कलाओं को बखूबी दिखाया गया। यह फिल्म 35 करोड की कमाई कर निर्माताओं के लिए फायदे का सौदा साबित हुई।

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कोर्ट रूम ड्रामा एक सक्सेफुल विषय है, इसकी गवाह है अक्षय कुमार की हालिया रिलीज 'रुस्तम'। यह साल 2016 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है। एक नौसेना अधिकारी की खुद को बेगुनाह साबित करने की कोशिश बॉक्स ऑफिस पर अब तक 150 करोड से ज्यादा कमा चुकी है। लेकिन कोर्ट की जिस कार्रवाई से आम आदमी दूर ही रहना चाहता है, वही फिल्मों में दर्शकों की दिलचस्पी की वजह कैसे बन जाती है? रुस्तम के निर्देशक टीनू सुरेश बताते हैं, 'कोर्ट के अंदर चलने वाली बहस, वकीलों के तर्क, गवाहों की चालाकी और जज की पैनी नजर दर्शकों में दिलचस्पी पैदा कर देती है। और जब कठघरे में खुद हीरो खडा होकर अपनी पैरवी कर रहा हो, तो भला कौन उसे हारता देखना चाहेगा?' वो कहते हैं,'दरअसल हीरो के बहाने दर्शक खुद को जीतता हुआ देखना चाहता है। कानूनी पेचीदगियों से नाराज दर्शकों को, हीरो की यह जीत सुकून पहुंचाती है और दर्शकों को सुकून पहुंचाना ही ऐसी फिल्मों की कामयाबी का राज है।'
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कोर्ट रूम ड्रामा पर ही बनी निर्माता निर्देशक शुजीत सरकार की फिल्म 'पिंक' रिलीज होने वाली है। इस फिल्म में अमिताभ एक वकील के किरदार में हैं और एक रेप पीडित के केस के बहाने कानूनी खामियों को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं। शुजीत ने बीबीसी हिंदी को बताया,'कोर्ट रूम ड्रामा में डिबेट का मौका होता है। मौजूदा कानून ढांचे से नाराज दर्शक फिल्मों में जब खुद कानून को ही कटघरे में खडा देखता है, तो उसे सुकून मिलता है।' वहीं फिल्म समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज का मानना है,'जब तक दलीलें हीरो के साथ जाएं, तब तक आम आदमी की दिलचस्पी बनी रहती है, क्योंकि दर्शक हीरो में अपना ही अक्स तलाशते हैं। अगर पलडा विपक्ष का भारी होने लगे तो परिणाम बदल भी सकते हैं। बहरहाल जब तक कानून में कमियां मौजूद हैं, तब तक दर्शक फिल्मी कोर्ट में अपनी जीत पर मुस्कुराते रहेंगे।'
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