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कोरोना काल में रणवीर ने टटोली पुरानी यादें, प्रशंसकों के साथ साझा किया अपने पहले नाटक का पोस्टर

Sun, 22 Mar 2020 11:57 AM IST
भावना शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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ranveer singh - फोटो : instagram
कोरोना के डर से सिनेमा के सभी कलाकारों ने खुद को घर में कैद कर रखा है। रणवीर अपने अतरंगी पहनावे और अजीब हरकतों की वजह से हमेशा लोगों की नजरों में बने रहते हैं। वे अब घर में बंद रहने के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस से जुड़े हुए हैं, और अपनी कुछ खास पोस्टों को साझा करके अपने प्रशंसकों का मनोरंजन कर रहे हैं।
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ranveer singh poster - फोटो : amar ujala
उन्होंने अपनी एक फोटो में अपनी पहली 'बैंड बाजा बारात' से पहले थिएटर में किए संघर्ष का जिक्र किया है। रणवीर ने सबसे पहले दिनकर जानी के निर्देशन में बने एक कॉमेडी नाटक 'कैरी ऑन' में एक छोटा सा किरदार किया था। अपने उस छोटे से किरदार से ही रणवीर ने बड़ा प्रभाव छोड़ा था। उन्होंने कहा, 'यह मेरे एक नाटक का पोस्टर है जिसमें मैंने एक छोटा सा किरदार किया था। उस समय मैं बहुत संघर्ष कर रहा था। मैं पृथ्वी थिएटर में अपने जैसे 2-3 अन्य लोगों के साथ बैठता था। एक दिन उनमें से एक को जानकारी मिली कि अंधेरी के एक कॉलेज में नाटक के एक छोटे से किरदार के लिए ऑडिशन हो रहा है। उनमें से कोई भी उस ऑडिशन के लिए जाना नहीं चाहता था। उन समय मेरे पास कुछ काम नहीं था, तो मैंने कहा कि मैं ये ऑडिशन दूंगा।'
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ranveer singh - फोटो : instagram
रणवीर ने आगे कहा, 'हमने यह नाटक सेंट एंड्रयूज में किया। मुझे तब और ज्यादा गर्व महसूस हो रहा था, क्योंकि मैं एक छात्र के रूप में सेंट एंड्रयूज के मंच पर पहले भी प्रदर्शन कर चुका था। इस नाटक में मेरा किरदार एक इंटीरियर डेकोरेटर का था, जो अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए एक समलैंगिक पुरुष होने की कोशिश कर रहा था। यह एक पुरानी अंग्रेजी का डबल मीनिंग कॉमेडी नाटक था जिसे दर्शन जरीवाला ने निर्मित और दिनकर जानी ने निर्देशित किया था।'

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ranveer singh - फोटो : instagram
रणवीर बताते हैं, 'पिछले साल एक अवॉर्ड शो के दौरान मेरी मुलाकात उस नाटक के निर्माता योगेश सांघवी से हुई। मैं उनसे लंबे समय बाद मिला था, और हमारी मुलाकात भावनाओं से भरी थी। उनकी आंखें नम थी, और उनमें मेरे लिए गर्व भरा हुआ था। उन्होंने कहा 'तू कहां से कहां पहुंच गया मेरे दोस्त'। यह सुनकर मैं भी भावुक हो गया, क्योंकि मैं उन्हें काफी समय बाद मिला था, और वह मुझे बहुत पसंद करते थे। उस नाटक को करते समय हमारे पास पैसे नहीं थे, लेकिन वह जितना कर सकते थे उन्होंने मेरे लिए किया। यह मेरे संघर्ष के दिनों की कुछ प्यारी यादें हैं।'
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