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Majrooh Sultanpuri: कांग्रेस पर पीएम मोदी का तंज, कहा- एक कविता लिखने पर पंडित नेहरू ने मजरूह सुल्तानपुरी को भेज दिया था जेल

Tue, 08 Feb 2022 04:30 PM IST
वर्तिका तोलानी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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पीएम नरेंद्र मोदी और मजरूह सुल्तानपुरी - फोटो : सोशल मीडिया

राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस पर तीखा वार करते हुए प्रधानमंत्री ने ख्यात शायर मजरूह सुल्तानपुरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पं. नेहरू के पीएम कार्यकाल में मजरूह सुल्तानपुरी को एक कविता लिखने पर जेल भेज दिया गया था। 

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मजरूह सुल्तानपुरी - फोटो : सोशल मीडिया

कौन थे मजरूह सुल्तानपुरी?
मजरूह सुल्तानपुरी एक भारतीय उर्दू शायर, हिंदी फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार और आंदोलनकारी थे। उनका नाम 20वीं सदी के उर्दू साहित्य जगत के बेहतरीन शायरों में गिना जाता है। 

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मजरूह सुल्तानपुरी - फोटो : सोशल मीडिया

क्या था मामला?
हिंदुस्तान की आजादी के कुछ समय बाद की बात है। बंबई में मजदूरों की एक हड़ताल में मजरूह सुल्तानपुरी ने एक ऐसी कविता पढ़ी कि नेहरू सरकार आग-बबूला हो गई। तत्कालीन गवर्नर मोरार जी देसाई ने मजरूह सुल्तानपुरी को ऑर्थर रोड जेल में डाल दिया। मजरूह सुल्तानपुरी को अपनी कविता के लिए माफी मांगने को कहा गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जिसकी वजह से मजरूह सुल्तानपुरी को दो सालों तक जेल में ही रहना पड़ा। 

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मजरूह सुल्तानपुरी और पंडित नेहरू - फोटो : सोशल मीडिया
क्या थी कविता?
मन में ज़हर डॉलर के बसा के,
फिरती है भारत की अहिंसा।
खादी की केंचुल को पहनकर,
ये केंचुल लहराने न पाए।
ये भी है हिटलर का चेला,
मार लो साथी जाने न पाए।
कॉमनवेल्थ का दास है नेहरू,
मार लो साथी जाने न पाए।
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मजरूह सुल्तानपुरी

जेल से लिखते रहे गीत
सजा के दौरान मज़रूह को बेटी हुई। परिवार आर्थिक तंगी से गुजरने लगा। जिसकी वजह से मजरूह साहब ने जेल से ही कुछ फिल्मों के लिए गीत लिखना शुरू कर दिया। 1951-52 के दौर में मजरूह जेल से बाहर आए और तब से लेकर 2000 तक मुसलसल फिल्मी गीत लिखते रहे। 24 मई 2000 को मुंबई में उनका देहांत हो गया था। 

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मजरूह सुल्तानपुरी - फोटो : सोशल मीडिया
ये हैं उनके कभी न भुलाए जाने वाले गीत
उन्होंने नासिर हुसैन के साथ ‘तुम सा नहीं देखा’, ‘अकेले हम अकेले तुम’, ‘ज़माने को दिखाना है’, ‘हम किसी से कम नहीं’, ‘जो जीता वही सिकंदर’ और ‘क़यामत से क़यामत तक’ जैसी कभी न भुलाई जाने वाली फिल्मों के गीत लिखे थे।
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