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बाइस्कोप: शादी के चार महीने बाद निकली नीतू सिंह की ये ‘बारात’, निर्देशक ने छोटा किया रोमांटिक ट्रैक

Sat, 23 May 2020 08:27 PM IST
shrilata biswas पंकज शुक्ल, मुंबई
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चोरों की बारात - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
निर्देशक हरमेश मल्होत्रा का नाम तो आपने सुना होगा? वही, नगीना और निगाहें वाले। श्रीदेवी को लेकर उन्होंने शेरनी भी बनाई थी जिसमें हीरो थे शत्रुघ्न सिन्हा। शत्रुघ्न सिन्हा और हरमेश मल्होत्रा का याराना बड़ा पुराना और काफी लंबा रहा। शेरनी से पहले हरमेश मल्होत्रा ने शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर फांसी के बाद, मंगल पांडे, चोरों की बारात, अमर शक्ति और बगुला भगत जैसी फिल्में बनाईं। हरमेश मल्होत्रा का जन्म खुशाब में हुआ था जो अब पाकिस्तान में है। कोई 15 साल पहले उनका निधन हो गया। आज यानी 23 मई के बाइस्कोप में हम आपको बताते हैं, हरमेश मल्होत्रा की एक फिल्म चोरों की बारात का किस्सा जो रिलीज हुई थी साल 1980 में। यानी आज इस फिल्म की रिलीज के 40 साल पूरे हो गए। फिल्म चोरों की बारात की ओपनिंग बहुत शानदार रही थी। वजह थी इसमें हिंदी सिनेमा के उस समय के कोई दर्जन भर खलनायकों की भरमार। अजीत से लेकर रंजीत, डैनी, जीवन, सुधीर, रूपेश सब तो थे यहां। पब्लिक इनकी बारात निकलते देखने खूब आई।
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चोरों की बारात - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
बाइस्कोप में चोरों की बारात का जिक्र इसकी कहानी, इसके खलनायकों या इसके नायक या निर्देशक की वजह से नहीं बल्कि इसके बारे में किस्सा छिड़ा है इसकी हीरोइन नीतू सिंह को लेकर। नीतू सिंह इस फिल्म की रिलीज होने से कुछ ही महीने पहले नीतू कपूर बनी थीं। चोरों की बारात बतौर हीरोइन शूट की गई उनकी आखिरी फिल्म थी। फिल्म अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको कई जगह इस बात का एहसास होगा कि वह शत्रुघ्न सिन्हा के करीब आने पर या कहीं कुछ तेजी से करने को लेकर हिचकिचा रही हैं। जैसे कि उस गाने में, तेरी मेरी दोस्ती हो गई, सारी दुनिया से दुश्मनी हो गई। दरअसल तब तक नीतू सिंह अपने होने वाले पति ऋषि कपूर के प्यार में इतनी खो चुकी थीं कि उन्हें किसी के भी पास आने में दिक्कत होती थी। फिल्म चोरों की बारात रिलीज होने के बाद कई दूसरी फिल्मों में भी नीतू सिंह नजर आती रहीं लेकिन ये सारी फिल्में पहले शूट हो चुकी फिल्में थीं। जब चोरों की बारात रिलीज हुई उस वक्त नीतू कपूर प्रेग्नेंट थीं।
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नीतू कपूर, ऋषि कपूर - फोटो : सोशल मीडिया
15 सितंबर 1980 को ऋद्धिमा को जन्म देने वालीं नीतू कपूर की शादी इसी साल 22 जनवरी 1980 को हुई। यानी कि ऋद्धिमा के जन्म से आठ महीने पहले। फिल्म चोरों की बारात की शूटिंग के समय नीतू सिंह ने काफी सावधानियां बरतीं और फिर इसकी शूटिंग खत्म होते ही उन्होंने बतौर हीरोइन पैकअप बोल दिया। चोरों की बारात के बाद बतौर हीरोइन नीतू सिंह की पहले ही शूट हो चुकी फिल्में जो अगले दो तीन साल तक रिलीज होती रहीं, उनमें शामिल थीं, एक और एक ग्यारह, खून का रिश्ता, याराना, वक्त की दीवार, चोरनी आदि।

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चोरों की बारात - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सेकेंड इनिंग्स में नीतू कपूर फिर सीधे दिखाई दीं इम्तियाज अली की फिल्म लव आज कल में अपने पति ऋषि कपूर के साथ साल 2009 में। ऋषि कपूर के साथ ही नीतू सिंह ने दो दूनी चार और बेशरम भी की। बेशरम में इन दोनों के साथ इनका बेटा रणबीर कपूर भी है। बुलबुल चौटाला के किरदार में नीतू कपूर ने फिल्म में खूब रंग जमाया लेकिन अपने भाई अनुराग कश्यप की देखा देखी सेट पर आकर सीन, कहानी, डायलॉग बदल देने के चक्कर में अभिनव ने वह फिल्म ही नहीं बनाई जो इसके राइटर ने कागज पर लिखकर उन्हें दी थी। कहानी फिल्म चोरों की बारात की भी कमाल की रही।
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चोरों की बारात - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
एक द्वीप पर रहने वाले रईस की बेटी अंजू को शहर में शेखर से इश्क हो जाता है। वह शेखर को अपने साथ इस द्वीप पर लाती है और इसी बीच कुछ और लोग भी इस द्वीप पर पहुंच जाते हैं। इन लोगों को अंजू के पिता से अपना पुराना हिसाब चुकता करना है। जब अंजू की जान मुश्किल में फंसती है तो खुलासा होता है कि आखिर शेखर है कौन और यहां कर क्या रहा है। अपने जमाने के स्टार कलाकार नवीन निश्चल को लेकर भी चोरों की बारात नाम की एक फिल्म लेखक निर्देशक नरेंद्र बेदी ने साल 1975 में शुरू की थी लेकिन तब तक अमिताभ बच्चन नए एंग्री यंग मैन बनकर पर्दे पर आ चुके थे और नवीन निश्चल के करियर को अपनी छांव से ढक चुके थे।
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चोरों की बारात - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आपको शायद इस बात की जानकारी न हो कि फिल्म चोरों की बारात के निर्माता सलीम अख्तर ने ही हिंदी सिनेमा में अभिनेत्री रानी मुखर्जी को उनके करियर का पहला ब्रेक दिया। ये फिल्म थी, राजा की आएगी बारात। इस फिल्म में हीरो थे मशहूर अभिनेता अमजद खान के बेटे शादाब खान। फिल्म चोरों की बारात में संगीत था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का और गाने लिखे थे आनंद बक्षी ने। फिल्म का एक गाना, आगे आगे दूल्हा, पीछे चोरों की बारात, खूब हिट हुआ था। दिक्कत इस फिल्म की ये थी कि हरमेश मल्होत्रा ने फिल्म के गाने फिल्माए कहानी के खलनायकों पर और अभिनेता जीवन इन गानों पर वैसा रंग नहीं जमा पाए जैसा प्राण इस तरह के गानों पर जमा दिया करते थे। शत्रुघ्न सिन्हा और नीतू सिंह की केमेस्ट्री तो ठीक थी लेकिन दोनों के बीच का रोमांटिक ट्रैक हरमेश मल्होत्रा ज्यादा बड़ा नहीं कर पाए और फिल्म पर इसके खलनायक इसके नाम के अनुसार ज्यादा हावी रहे।

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चोरों की बारात - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म तब लगी थी कानपुर के निगार सिनेमा में। अब तो सुना है कि ये सिनेमाघर बंद हो चुका है। नहीं तो पीपीएन कॉलेज के सामने बनी इस टॉकीज में फिल्म देखना और कॉलेज के सामने पाकड़ के पेड़ के नीचे मिलने वाले छोले भटूरे खाना कानपुर के किशोरों और युवाओं का सबसे प्रिय शगल हुआ करता था। चोरों की बारात को इसकी कहानी और म्यूजिक के कमजोर होने का तो खामियाजा उठाना पड़ा। साल 1980 था भी कुछ ऐसी बेहतरीन फिल्मों का साल, जिसमें हिट हुई हर फिल्म की कहानी लाजवाब थी और म्यूजिक उससे भी ज्यादा शानदार।
 
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चोरों की बारात - फोटो : सोशल मीडिया
साल 1980 की कमाई के मामले में नंबर वन फिल्म रही थी, फिरोज खान और विनोद खन्ना स्टारर कुर्बानी, जीतेंद्र, रीना रॉय और परवीन बाबी की फिल्म आशा ने भी उस साल खूब रंग दिखाए और दूसरे नंबर पर रही। अमिताभ बच्चन ने शत्रुघ्न सिन्हा के साथ मिलकर फिल्म दोस्ताना में और धर्मेंद्र के साथ मिलकर फिल्म राम बलराम में रंग जमाया। ये दोनों फिल्में कमाई की लिस्ट में तीसरे और चौथे नंबर पर रहीं। फिल्म चोरों की बारात उस साल कमाई के मामले में पहले 10 नंबर की फिल्मों में भी शामिल नहीं थी। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल यानी 24 मई को बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की। सिलसिला जारी है।

(बाइस्कोप अमर उजाला डिजिटल का दैनिक कॉलम है जिसमें हम उस दिन रिलीज हुई किसी पुरानी फिल्म के बारे में चर्चा करते हैं।)

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