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'रुस्तम-ए-हिंद', सीना 53 इंच, 200 किलो वजनी रेसलर को उठाकर फेंक दिया था, 5 अनसुनी बातें

Mon, 19 Nov 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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मिलिए एक ऐसे पहलवान से, जिनका सीना 53 इंच का था। वे इतने लंबे-चौड़े थे कि उन्होंने 200 किलो वजनी रेसलर को उठाकर फेंक दिया था, जानिए ऐसी ही 5 अनसुनी बातें।
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एक भी मुकाबला नहीं हारे

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धारावाहिक रामायण में हनुमान का यादगार रोल निभाने वाले पहलवान दारा सिंह ने अपनी जिंदगी में 500 से ज्यादा फाइट लड़ी और वे एक भी मुकाबला नहीं हारे। दारा सिंह ने अपने समय के सभी बड़े पहलवानों को हराया था, जिसके लिए उन्हें 'रुस्तम-ए-पंजाब' और 'रुस्तम-ए-हिंद' का खिताब दिया गया था।
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दारा सिंह रन्धावा का जन्म 19 नवम्बर 1928 को अमृतसर (पंजाब) के गांव धरमूचक में श्रीमती बलवन्त कौर और श्री सूरत सिंह रन्धावा के यहां हुआ था। कम आयु में ही घर वालों ने उनकी मर्जी के बिना उनसे आयु में बहुत बड़ी लड़की से उनकी शादी कर दी। मां ने इस उद्देश्य से कि पट्ठा जल्दी जवान हो जाए, उसे सौ बादाम की गिरियों की खांड मक्खन में कूटकर खिलाना व ऊपर से भैंस का दूध पिलाना शुरू कर दिया।

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नतीजा यह हुआ कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही दारा सिंह प्रद्युम्न नामक बेटे के बाप बन गए। दारा सिंह का एक छोटा भाई सरदारा सिंह भी था, जिसे लोग रंधावा के नाम से जानते थे। दारा सिंह और रंधावा दोनों ने मिलकर पहलवानी करनी शुरू कर दी और धीरे-धीरे गांव के दंगलों से लेकर शहरों तक में ताबड़तोड़ कुश्तियां जीतकर अपने गांव का नाम रोशन किया।
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दारा सिंह की लंबाई 6 फीट 2 इंच थी और छाती 53 इंच की थी। लंबा चौड़ा शरीर होने की वजह से उन्हें रेस्लिंग में हाथ आजमाने को कहा जाता था। जिसकी शुरुआत उन्होंने मेलों और बाजारों में छोटी-छोटी फाइट से की थी। आप को विश्वास नही होगा, लेकिन दारा सिंह ने एक मुकाबले में अपने से कहीं ज्यादा वजनी 200 किलो के ऑस्ट्रेलिया के किंग कांग को पहले तो रिंग में पटखनी दी और फिर उन्हें उठाकर रिंग के बाहर ही फेंक दिया था।
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दारा सिंह अपनी जिंदगी में कोई रेसलिंग मैच नही हारे। महाबली के नाम से मशहूर दारा सिंह कुश्ती में कभी ना हारने वाले चैम्पियन्स के भी चैम्पियन हैं। 1968 की वर्ल्ड चैम्पियन शिप के साथ ही उन्होंने कुश्ती में हमेशा जीत हासिल की। कुश्ती के बाद दारा सिंह ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी किस्तम को आजमाया। बॉलीवुड में दारा सिंह की एंट्री फिल्म ‘संगदिल’ से हुई, जो सन 1952 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में एक्टर दिलीप कुमार और मधुबाला थे।
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दारा सिंह की बतौर हीरो पहली फिल्म थी ‘जग्गा डाकू’, जिसके बाद वो बॉलीवुड के पहले एक्शन हीरो के तौर पर छा गए। उसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम क्या और लोगो ने भी बेहद प्यार और सम्मान दिया। फिल्म जब वी मेट में वो आखिरी बार करीना कपूर के दादा जी के रूप में नजर आये थे। 1996 में उन्हें रेसलिंग ऑब्जर्व न्यूजलेटर में हाल ऑफ फेम चुना गया था।

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दारा सिंह ने कई वर्ल्ड क्लास चैम्पियनों के खिलाफ कुश्ती लड़ी। 1970 में दारा सिंह ने पहली फिल्म डॉयरेक्ट की, जिसका नाम नाकन दुखिया सब संसार था। पहली बार दारा सिंह ने फिल्म बजरंग बली में हनुमान जी का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने टीवी स्क्रीन पर भी धारावाहिक रामायण में हनुमान का किरदार निभाया था। उसके बाद लोग कहने लगे की आज हनुमान होते तो बिल्कुल उनकी कदकाठी उनकी तरह होती।
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भले ही दारा सिंह आज हमारे बीच नही है, लेकिन फिर भी करोड़ों हिन्दुस्तानियों के दिलों में वे राज करते हैं। रेसलिंग से एक्टिंग में आने वाले दारा सिंह सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा सर्च होने वालों में से एक हैं। दारा सिंह को 7 जुलाई 2012 को दिल का दौरा पड़ा तो उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ। परिजन घर ले आए और 12 जुलाई 2012 को वे दुनिया से चले गए।
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