केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) के मुंबई स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का विवादों से पुरना नाता रहा है। इस दफ्तर का हाल ये है कि यहां जाने पर कोई सीधे मुंह बात तक नही करता। बिना बिचौलियों की सेवा लिए सिर्फ ऑन लाइन आवेदन करने वाले फिल्मकारों को लंबा इंतजार करना होता है। और, अगर किसी निर्माता ने पहले से ही अपनी फिल्म की रिलीज की तारीख तय कर रखी है तो फिर उसका हाल वही होना होता है जो फिल्म ‘मार्क एंटनी’ के हिंदी संस्करण के साथ हुआ। और, ऐसा आज से नहीं कई साल से होता आ रहा है। इसके एक सीईओ भी इसी चक्कर में हवालात पहुंच चुके हैं।