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सिक्का ने कहा, 'किताब की कहानी के अंत में सहमत तिरंगे को सलाम करती है। मैंने निर्देशक से कहा था कि आप अगर इस सीन को काटोगे तो यह फिल्म राष्ट्रीय पुरस्कार पाने से वंचित रह जायेगी। हालांकि, यह फिल्म निर्माताओं की मर्जी से हुआ था, लेकिन मैं अभी भी इससे नाराज हूं।
किताब के बारे में बात करते हुए हरिंदर कहते हैं, 'मैं एक ऐसा व्यक्ति हूं जिसने कभी कोई किताब नहीं लिखी। और मेरी पहली किताब 'कॉलिंग सहमत' की लगभग पांच लाख प्रतियां बिकीं। सहमत ने मुझे जीने का तरीका सिखाया। हम बड़ी आसानी से सभी कश्मीरी मुस्लिमों को आतंकवादी कहकर एक ही तराजू में तोल देते हैं।'