किच्चा सुदीप
उन्होंने आगे कहा, 'आखिरकार जब प्रधानमंत्री ने इस पर अपना बयान दिया, तब मैंने वापस बोलने का फैसला किया क्योंकि मुझे लगता है कि यह अद्भुत था। मैंने एक नागरिक के रूप में बात की, मैंने एक कन्नड़ के रूप में भी बात की, चाहे मैं यहां बैठा हूं, मुझे लगता है कि मैं सभी की ओर से बात कर रहा हूं। आपकी मातृभाषा जो भी हो, आप जो कुछ भी लेकर पैदा हुए हैं वह हमेशा आपके करीब है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम दूसरी भाषाओं का अनादर करते हैं, हम हर भाषा का सम्मान करते हैं। मुझे खुशी है कि एक विषय जिसे मैंने कुछ समय के लिए शुरू किया था, उसे देश प्रधानमंत्री ने इतने सुंदर तरीके से समाप्त किया और मैं उसका स्वागत करता हूं।'