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Color Discrimination: बॉलीवुड में रंगभेद के शिकार हुए ये फिल्मी सितारे, एक ने तो इंडस्ट्री ही छोड़ देनी चाही

Tue, 15 Nov 2022 08:05 AM IST
निधि पाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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मिथुन चक्रवर्ती, अजय देवगन, प्रियंका चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी सिनेमा के कल्ट स्टार मिथुन चक्रवर्ती ने हाल ही में खुलासा किया कि उनके त्वचा के रंग की वजह से हिंदी सिनेमा में उन्हें कई बार अपमानित करने की कोशिश की गई। अपनी आत्मकथा से बार बार इंकार करने की भी उनकी यही वजह रही है। मिथुन का जीवन बहुत ही संघर्षमय रहा है और वह नहीं चाहते कि कोई भी उन यादों से गुजरे और उनके संघर्ष के दिनों को देखे। अपनी पहली ही फिल्म 'मृगया' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने के बाद भी उनका संघर्ष कम नहीं हुआ था और उनके सांवले रंग को लेकर अक्सर उन पर खूब तंज कसे गए। आइए आपको बताते हैं कुछ और ऐसे सितारों के बारे में जिन्हें हिंदी सिनेमा में और निजी जीवन में अपनी त्वचा के रंग को लेकर बार बार अपमानित होना पड़ा।

 
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रेखा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रेखा 
अपने जमाने की सदाबहार अभिनेत्री रेखा ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा तो उन्हें ‘काली कलूटी’ कहकर तिरस्कृत किया जाता था। करियर के शुरुआती दौर में रेखा काफी भरे पूरे शरीर की थीं और उनकी त्वचा का रंग भी आज जैसा साफ नहीं था। इस वजह से उन्हें काफी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था। लेकिन, बाद में रेखा ने ऐसा मेकओवर किया कि उनको देखने वाले दंग रह गए और आलोचकों के मुंह पर ताले पड़ गए। साल 1970 में आई रेखा की पहली हिंदी फिल्म 'सावन भादों' उनके करियर के लिए टर्निंग पॉइंट फिल्म साबित हुई।

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अजय देवगन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अजय देवगन
अजय देवगन जब बॉलीवुड में  एंट्री कर रहे थे तब लोग उनके सांवलेपन का खूब  मजाक उड़ाया करते थे। इनके सावले रंग की वजह से एक समय ऐसा भी था कि जब अजय देवगन अपनी इस इंडस्ट्री को छोड़ना चाहते थे। लेकिन, बतौर अपनी पहली फिल्म 'फूल और कांटे' के बाद उन्होंने लोगों की सोच बदल दी। अजय देवगन कहते हैं, ‘अगर आपका काम अच्छा है और आपकी पर्सनैलिटी लोगों को नजर आती है। पर्सनैलिटी लुक वाइज नहीं होती है, इसमें शामिल होता है कि आप खुद को किस तरह रखते हैं और आप किस तरह के हैं।’

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नंदिता दास - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नंदिता दास 
अपने सशक्त अभिनय  के लिए पहचानी जाने वाली नंदिता दास कई बार अपने सांवले रंग को लेकर रंगभेद का शिकार हो चुकी हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि रंगभेद को बढ़ावा देने में बॉलीवुड के गानों का भरपूर योगदान है। अक्सर गानों के बोल गोरे रंग की ओर ही इशारा करते हैं। गानों में कलाइयां हमेशा गोरी ही रही हैं। गोरा रंग काला न पड़ जाए, गोरे रंग पे ना इतना गुमान कर, गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा जैसे गीतों से लेकर चिट्टियां कलाइयां वे तक ऐसे कई गीत हैं, जिसे सुनकर लोगों के जेहन में खूबसूरती की परिभाषा केवल गोरा रंग होकर रह गई है।

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बिपाशा बसु - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

बिपाशा बसु 
सांवले रंग को लेकर बिपाशा बसु को शुरू से ही टारगेट किया गया, लेकिन वह अपने सांवले रंग की वजह से स्टार बनी। वह कहती है, 'जब कोलकाता में पहली बार सुपर मॉडल का कॉन्टेस्ट जीता और न्यूज पेपर में छपा कि कोलकाता की सांवली लड़की बनी विनर, तो मैं हैरान रह गई कि सांवला रंग मेरी विशेषता कैसे हो सकती है? जब मैंने मॉडलिंग में करियर की शुरुआत की, तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे सांवले रंग को काफी पसंद किया जा रहा है और मुझे ज्यादा काम और अटेंशन मिली। जब मेरी पहली फिल्म 'अजनबी' आई और लोगों ने पसंद किया तब समझ में आया कि रंग रूप कोई मायने नहीं रखता है। आज भी मुझे याद है जब लोग मुझे मोटी और काली कहकर चिढ़ाते थे, तब बड़ी चिढ़ होती थी।' 

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प्रियंका चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

प्रियंका चोपड़ा 
प्रियंका चोपड़ा को उनके घर वाले ही काली काली कहकर चिढ़ाया करते थे। एक इंटरव्यू के दौरान प्रियंका चोपड़ा ने इस बात का खुलासा किया था कि उनके कजिन उन्हें काली काली कहकर चिढ़ाते थे। इतना ही नहीं, जब वह अमेरिका में पढाई कर रही थीं तो उनके सांवले रंग को लेकर लोग उन्हें ब्राउनी कहकर चिढ़ाते थे। विश्व सुंदरी बनने के बाद भी उन्हें अपने सांवलेपन को लेकर रंग भेद का शिकार होना पड़ा था और उनके हाथ से एक हॉलीवुड की फिल्म चली गई थी।

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नवाजुद्दीन सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

नवाजुद्दीन सिद्दीकी
नवाजुद्दीन सिद्द्की ने रंगभेद के खिलाफ कई सालों तक लड़ाई लड़ी।  वह कहते हैं, 'मुझे कई सालों तक केवल इसलिए रिजेक्ट कर दिया गया, क्योंकि मैं छोटा हूं और मैं सांवला दिखता हूं। अगर ये सब चीजें खत्म हो जाएंगी तो शायद हम अच्छा सिनेमा बना सकते हैं। अब इस बात को लेकर शिकायत नहीं कर सकता, क्योंकि मैं अपनी जगह बना चुका हूं, लेकिन मैं यह बात उन कलाकारों के लिए जरूर रख सकता हूं, जो आज भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं, क्योंकि वे असल में शानदार हैं और मेहनती भी हैं।'

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