समीर वाजिब
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गीतकारों की ये शिकायत रही है कि अच्छे और हिट गीत लिखने के बाद भी उन्हें वो मौके नहीं मिलते, जिसके वो हकदार होती है। ऐसे में ये सवाल उठने लाजिम हैं कि इसकी वजह क्या है? समीर कहते हैं, "यही तो दुर्भाग्य है, इसी का रोना है, एक बार जिसने अच्छा काम किया है, वो हजार बार भी अच्छा ही काम करेगा। मजरूह सुल्तानपुरी, हरसत जयपुरी और भी कई बड़े लोग आखिरी सांस तक लिखते रहे लेकिन आज जब मौका ही नहीं दिया जाएगा तो काम कैसे करेंगे?" "जबकि ये लोग मेरे कई गाने उठा कर रीक्रिएट कर रहे हैं, अंखियों से गोली मारे... या दिलबर दिलबर..., दुर्भाग्य ये है कि अभी हम हैं, उसके बाद भी हमसे ना लिखवाकर हमारे ही गाने को किसी और से लिखवाया जा रहा है। जिस आदमी ने पूरा गाना लिखा तो क्या रीक्रिएट करते वक्त वो और नई चार लाइन नहीं लिख सकता क्या? पता नहीं उन्हें क्या तकलीफ है। उन्होंने हमें बॉयकॉट ही कर दिया है। काम ही नहीं करना उनको हमारे साथ।" "हमारे यहां एकता की सबसे बड़ी समस्या है। आज भी कुछ लोग उनके समर्थन में खड़े हैं और ये वो ही चार लोग हैं जो उनके साथ काम करते आ रहे हैं। लेकिन अगर हर बार उन्हीं चार लोगों को काम देते रहेंगे तो चार हजार लोग कहां जाएंगे। आप काम सबके साथ करो, आपकी पसंद के ऊपर है। आपको पसंद आए तो करो, मगर आप सुनने को ही तैयार नहीं हैं और ना ही काम देने को। अगर आपको मेरा गाना पसंद है तो फिर काम देने में क्या परेशानी है।"