बस यूं ही से लेकर ब्रिक लेन, देख इंडियन सर्कस, पार्चड, जल और रोड जैसी फिल्मों के जरिए तनिष्ठा चटर्जी ने सिनेमा में अपनी अदाकारी की एक अलग छाप छोड़ी है। पुणे में जन्मी तनिष्ठा दुनिया घूम चुकी हैं और दिल्ली की आबोहवा ने उनके भीतर अदाकारी का पौधा रोपा। उनकी अगली फिल्म झलकी नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के जीवन से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है।
फिल्म झलकी में आप एक बच्ची को उसके भाई से मिलाने के जतन करने वाली पत्रकार बनी हैं? आप तो खुद भी इन सबसे जुड़ी रही हैं, तो कितना आसान रहा ये रोल निभाना?
जी हां, बाल मजदूरी को लेकर मैं लंबे समय से काम करती रही हूं। अनाथालय के बच्चो के लिए भी काम किया। मेरे बहुत सारे दोस्त पत्रकार हैं। मुझे उनकी दुनिया भी पता है। कह सकते हैं कि इस रोल के लिए मुझे अलग से बहुत कुछ तैयारी नहीं करनी पड़ी।