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हीरो-हीरोइन बनने आए थे और क्या बन गए पूजा, डीनो, दिव्या, आशुतोष

Fri, 11 Mar 2016 11:24 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : getty images
बॉलीवुड में कई सितारे आते हैं और चले जाते हैं। कुछ नाम कमा कर जाते हैं तो कुछ बस कोशिश में ही लगे रह जाते हैं। ऐक्टिंग न सही तो निर्देशन, प्रोडक्शन में ही हाथ आजमाते हैं। ऐसे ही कुछ सितारें ये भी हैं, जिन्होंने शुरुआत तो ऐक्टिंग से की लेकिन जब करियर नीचे जाने लगा तो नइया बचाने के  लिए निर्देशन के समंदर में उतर गए।
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ऐक्टर से डायरेक्टर-प्रोड्यूसर बने सितारे

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इसमें सबसे ताजा उदाहरण हैं दिव्या खोसला। इन्होंने 2004 में फिल्म 'अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों' से बतौर हीरोइन डेब्यू किया। लेकिन वो उनकी इकलौती फिल्म थी। ऐक्टिंग में वो सफल नहीं हो पाईं तो वो निर्देशन की तरफ बढ़ गईं। 2014 में आई 'यारियां' उनकी पहली निर्देशित फिल्म थी। फिर 2016 में आई 'सनम रे'। हालांकि इस क्षेत्र में भी वो कमाल नहीं दिखा पाई हैं। वे फिल्म 'रॉय' की निर्माता भी थीं।
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आशुतोष गोवारिकर भी एक जमाने में ऐक्टर हुआ करते थे। शाहरुख खान की फिल्म 'कभी हां कभी न' में उनका रोल आपको जरूर याद होगा। लेकिन आशुतोष ऐक्टर के बजाए बतौर निर्देशक ज्यादा सफल रहे। उन्होंने 'लगान', 'स्वदेस', 'जोधा अकबर' जैसी हिट फिल्में बनाईं और इन्हें प्रोड्यूस भी किया। अब वे जल्द ही 'मोहनजो दारो' लेकर आ रहे हैं।

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पूजा भट्ट बतौर हीरोइन कुछ समय तक चलीं लेकिन फिर उनका ऐक्टिंग करियर गिरने लगा। उन्होंने निर्माता-निर्देशक बन कर वापसी की। 'दुश्मन', 'जख्म', 'सुर', 'जिस्म', 'पाप', 'रोग', 'हॉलीडे' जैसी फिल्मों की वे निर्माता हैं और इन्हीं में से कुछ फिल्मों की निर्देशक भी।
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अगर आपको याद हो तो दीपक तिजोरी वहीं हैं जिन्होंने 'आशिकी', 'दिल है कि मानता नहीं', 'खिलाड़ी', 'बेटा', 'जो जीता वही सिकंदर' जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया। अफसोस कि बतौर लीड हीरो वो महीं चल सके। आखिरकार वे एक्टिंग छोड़ निर्देशक बन गए। उन्होंने 'ऊप्स', 'फरेब', 'टॉम डिक हैरी' जैसी फ्लॉप फिल्में बनाईं।
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जुगल हंसराज ने तो फिल्म 'मासूम' में बाल कलाकार के तौर पर भी काम किया है। इसके बाद वे 'सल्तनत', 'कर्मा', 'आ गले लग जा', 'पापा कहते हैं', 'मोहब्ब्तें', 'कभी खुशी कभी गम', 'सलाम नमस्ते' में भी दिखे। 2008 में उन्होंने पहली और इकलौती फिल्म 'रोडसाइड रोमियो' बनाई, लेकिन फ्लॉप हो गई।
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डीनो मोरिया की पहली फिल्म 'प्यार में कभी कभी' साल 1999 में आई थी। उन्हें सफलता मिली दूसरी फिल्म 'राज' से। लेकिन उसके बाद वे ज्यादा हिट नहीं हो पाए। फिल्में तो कई की लेकिन चली नहीं। बिपाशा बसु के साथ रिलेशनशिप में होने के लिए भी लंबे वक्त तक चर्चा में रहे। उन्होंने फिर निर्माता बनने की सोची और 2012 की फिल्म 'जिस्म 2' में पैसा लगाया।
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अतुल अग्निहोत्री ने 1983 में बाल कलाकार के रूप में पहली फिल्म की थी। काफी वक्त तक वे बतौर साइड ऐक्टर भी काम करते रहे। फिर उन्होंने निर्देशन में हाथ आजमाया। 2004 में फिल्म 'दिल ने जिसे अपना कहा' बनाई और 2008 में 'हेलो'। वे 'हेलो', 'बॉडीगार्ड', 'जय हो' के प्रोड्यूसर भी हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि वे सलमान खान के जीजा हैं और ये फिल्में सलमान की हैं।
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