पंकज त्रिपाठी
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त्रिपाठी ने बताया, "मेरे जेहन में बाबा नागार्जुन की कविता-'जो न हो सके पूर्ण काम, उनका करता हूं मैं प्रणाम' चलती थी। हमारा जो अतीत होता है, वह हमेशा ठीक ही होता है। मेरा मानना है कि जो कुछ भी होता है, अच्छे के लिए होता है। इसलिए वह सारी विफलताएं ठीक ही थी। मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो चीजों को ठहराव के साथ करना पसंद करता है और इसलिए मैं कालीन भैया के किरदार में 'ठहराव' लाया। वह नकारात्मक है। मैं अपने किरदार इस उम्मीद के साथ निभाता हूं कि कहीं वे अच्छे होंगे या बेहतरी के लिए खुद को बदल सकते हैं।"