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नागरिकता संशोधन विधेयक पर जावेद जाफरी का ट्वीट, कहा- 'एक आम हिंदुस्तानी को मुसलमान कर दिया'

Sat, 14 Dec 2019 02:26 PM IST
Avinash Pal एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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javed jaffrey - फोटो : file photo
नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर बॉलीवुड दो हिस्सो में बंटा हुआ नजर आ रहा है। कुछ सितारे जहां इसके पक्ष में हैं तो वहीं कुछ सेलेब्स इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। स्वरा भास्कर और जीशान के अलावा जावेद जाफरी ने भी  इस मुद्दे पर अपनी बात सोशल मीडिया पर रखी है। 
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salman and Jaaved Jaaferi
जावेद जाफरी ने ट्विटर पर एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट की तस्वीर में लिखा है, 'इस्लामी नाम, नमाजी बाप, खुदा का ताब, जो कर न सका...एक कागज के पुरजे ने वो काम कर दिया, एक आम हिंदुस्तानी को मुसलमान कर दिया।' बता दें कि ये कौसर मुनीर की पंक्तियां हैं।
 
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जावेद जाफरी
बता दें कि इससे पहले भी जावेद इस मुद्दे को लेकर ट्वीट कर चुके हैं। जावेद ने एक ट्वीट में लिखा था, 'क्या CAB ड्राइवर से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि जहां पैसेंजर जाना चाहे वहां लेकर जाए न कि जहां वह ले जाना चाहता है?' इस तरह जावेद जाफरी ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर तंज कसा था।

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zeeshan ayyub - फोटो : social media
गौरतलब है कि  नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ शुक्रवार के बाद आज शनिवार को भी दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र कैब के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच जामिया विश्वविद्यालय में NRC और नागरिकता संशोधन कानून (CAB) के विरोध प्रदर्शन में हुई हिंसा में डेढ़ दर्जन से ज्यादा छात्र घायल हो गए हैं और कई छात्रों को हिरासत में भी लिया गया है। इस मामले में जीशान ने ट्वीट में लिखा है, 'असम से वीडियोज नहीं आ ही नहीं पा रहे। जब दिल्ली में ये हाल है तो असम की तो क्या बात करें। उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा-  #jamia के दोस्तों, लड़ाई जारी रखना, जल्द मैं भी आऊंगा साथ जुड़ने।'
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Anurag Kashyap - फोटो : Social Media
इससे पहले अनुराग कश्यप ने नागरिकता संशोधन विधयेक (CAB) पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक कार्यक्रम में पहुंचे अनुराग कश्यप ने कहा कि 'यह रुकने वाला नहीं है। हमने इसके लिए उन्हें वोट दिया था। हमें यही मिलना चाहिए और यही मिलता रहेगा। मैंने खुद को इन सबसे अलग कर लिया है। मैं किसी भी बात का समर्थन नहीं करता हूं। यह एक ऐसी प्रकिया है जिसमें या तो आप शामिल हो जाएं या उन्हें छोड़ दें। हमें यह समझना होगा कि यह किसी के साथ भी हो सकता है। तभी हम एक समाज के तौर पर विकसित होंगे।'
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