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जानिए कौन है वो शख्स जिसकी वजह से सलमान के सारे दावे फेल और जाना पड़ा जेल

Fri, 06 Apr 2018 04:06 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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salman khan
जोधपुर सेशन कोर्ट ने 20 साल पुराने केस में बॉलीवुड एक्टर सलमान खान को साल 5 साल की सजा सुनाई है। आमतौर पर ऐसे बड़े सेलिब्रिटीज का मामला सजा तक नहीं पहुंचता लेकिन सलमान को जेल भेजने तक कई लोगों ने अहम रोल निभाया। 
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सलमान खान
पुलिस ने जहां केस की चार्जशीट में हर बारीक चीज को कवर किया और कोई पेंच नहीं छोड़ा। वहीं मामले के मुख्य गवाह पूनमचंद आखिर तक डटे रहे। इन सबके बीच सरकारी पक्ष के वकीलों ने भी कोर्ट में सलमान खान के वकीलों के हर दांव को फेल कर दिया।
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भवानी सिंह भाटी
काला हिरण शिकार मामले में सबसे अहम रोल निभाया सरकारी वकील भवानी सिंह भाटी ने। सेलिब्रिटीज से जुड़े मामलों में मीडिया का काफी ध्यान होता है और दबाव भी काफी पड़ता है लेकिन भवानी सिंह ने सबूतों और गवाहों को बेहतर तरीके से कोर्ट में रखा जिसका नतीजा यह रहा कि सलमान को 5 साल की सजा हुई। 

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सलमान खान
न्यूज 18 वेबसाइट के मुताबिक, भवानी सिंह ने कहा कि 'सरकार ने इस मामले में पूरा सहयोग दिया। बचाव पक्ष में सेलिब्रिटी थे। उनके पास काफी रिसोर्स होते थे। मुंबई, पुणे से उनके लिए बड़े-बड़े वकील आए। वहीं प्रॉसिक्यूशन के वकील स्थानीय थे। कई बार वह बदल भी जाते हैं। जिसके बाद नए वकील को शुरू से पूरा केस पढ़ना और समझना होता है। इसमें काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ता है।' 
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salman khan
भवानी सिंह भाटी के केस से जुड़ने के बाद तेजी से इस पर सुनवाई हुई। भाटी के पास 3 साल पहले 2015 में यह केस आया जिसके बाद सलमान को कई बार जोधपुर कोर्ट में आना पड़ा हालांकि इससे पहले वह ऐसा करने से बचते थे। भाटी ने बताया कि 'मामला काफी लंबे समय से कोर्ट में विचाराधीन था और मीडिया में इसकी काफी हाइप रही लेकिन प्रॉसिक्यूशन ने इससे प्रभावित हुए बिना अपना काम किया।'
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फाइल फोटो
भाटी ने आगे बताया कि 'पुलिस की जांच भी इस मामले में काफी अहम रही। तत्कालीन जांच अधिकारी ललित बोड़ा ने काफी बारीकी से मामले को सुलझाया। वहीं मुख्य गवाह पूनमचंद भी झुका नहीं। वह लगातार 20 साल तक जब भी जरूरत पड़ी तब कोर्ट आया। बचाव पक्ष के बड़े-बड़े वकीलों के कड़े सवालों और पूछताछ का उसने जवाब दिया। उसके अडिग रहने से भी यह केस मजबूत बना रहा।'
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सलमान खान के साथ शेरा
बता दें कि यह घटना फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान 1 अक्टूबर  1998 को जोधपुर के पास कांकणी गांव में हुई थी। गवाहों के मुताबिक गोलियों की आवाज सुनने पर जब वह कांकणी गांव की सीमा पर पहुंचे तो दो काले हिरण मृत पड़े थे।
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