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Bday Spl : शाहरुख खान पहला हीरो जो विलेन बनकर हुआ हिट

Wed, 02 Nov 2016 10:04 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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दिल्ली की गलियों में अपना बचपन गुजारने वाले शाहरुख खान हमेशा रंगीन मिजाज वाले रहे हैं। कॉलेज की बदमाशियों से लेकर मुंबई के जुहू बीच पर सरेआम अपने प्यार, गौरी का हाथ मांगने की कहानी लाजवाब रही हैं। इस हीरो ने हिंदी सिनेमा के परदे पर अपना अलग ही साम्राज्य कायम किया है। शाहरुख ने छोटे परदे पर फौजी बन कर अपनी एक्टिंग की चाहत को एक रूप दिया था पर ये उनकी मंजिल नहीं थी। उनका लक्ष्य तो कुछ और ही था...
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बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी ने शाहरुख खान नाम के 25 साल के दुबले पतले लड़के की आखों में कुछ और ही देखा था। 1990 में उन्होंने अपनी फिल्म 'दिल आशना है' में शाहरुख को पहला ऑफर दिया लेकिन 25 जून 1992 को 'दीवाना' फिल्म से शाहरुख खान को बॉलीवुड में सही रूप में इंट्रोडक्शन मिला।
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दिव्या भारती की खूबसूरती और ऋषि कपूर के स्टारडम के बावजूद 'दीवाना' में शाहरुख की दीवानगी ने सबका दिल जीत लिया। हलांकि इसके बाद शाहरुख को 'राजू बन गया जैंटिलमैंन' और 'माया मेमसाहब' जैसी फिल्में भी मिली लेकिन उनकी असली कहानी 'बाजीगर' से शुरू हुई।

ये ऐसा समय था जब हीरो के सपने सजा कर करियर की शुरुआत करने वाला कोई भी, विलेन बनने से डरता था लेकिन शाहरुख ने इस चुनौती को ना सिर्फ कबूल किया बल्कि इसके लिए बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी जीता। 

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टैलेंट, लुक्स और सही रणनीति नहीं होती तो शाहरुख खान का बॉलीवुड में कोई अस्तित्व ही नहीं होता। इसका सबूत 90 के दशक में आईं 'डर', 'अंजाम', 'करन अर्जुन', 'यस बॉस' और 'परदेस' जैसी फिल्मों से मिलता है। लेकिन परदे पर खून खराबा करने या हंसाने-रुलाने के लिए तो शाहरुख बने ही नहीं हुए थे। रोमांस उनके नस नस में बसा था और उस दौर में बॉलीवुड को भी एक फ्रेश 'दिलवाला' चाहिए था।
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1995 में यशराज की फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' आई और इस फिल्म के साथ ही किंग खान का बॉलीवुड में पुनर्जन्म हुआ। केवल 4 करोड़ की इस फिल्म पर शाहरुख का प्यार भरा अंदाज ऐसा हावी हुआ कि बॉक्स ऑफिस पर करीब 125 करोड़ रुपये की बरसात हो गई। कहा जाता है कि 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे' के बाद तो पूरे देश में रोमांस की एक नई लहर दौड़ गई थी। जिसे कभी प्यार नहीं हुआ था, वो भी आशिक बन बैठा था।
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दरअसल डीडीएलजे शाहरुख के लिए सिर्फ यूं ही बनी कोई फिल्म नहीं थी। ये एक प्लान था बॉलीवुड में रोमांस के राजा बनने का क्योंकि शाहरुख को इसके बाद आदित्य चोपड़ा और करण जौहर का साथ मिल गया था। 'दिल तो पागल है' ने रोमांस की एक नई कहानी बनाई।

कुछ कुछ होता है' ने ना जाने कितने कपल्स को प्यार करना सिखाया। 'मोहब्बतें' में प्यार में बलिदान तो 'कभी खुशी कभी गम' में परिवार से परे प्यार करनेवालों की कहानी बताई गई।  शाहरुख का ये रोमांटिक अंदाज पूरी तरह से दर्शकों के दिलो दिमाग पर छाने लगा। 
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'कल हो ना हो' में शाहरुख ने लोगों को रुलाया तो वहीं 'कभी अलविदा ना कहना' में वो सीनियर और जूनियर बच्चन पर भारी पड़ गए। फिल्में एक के बाद एक आती गईं और बॉक्स ऑफिस पर शाहरुख का दावा और मजबूत होता गया। 2002 में संजय लीला भंसाली ने शाहरुख को 'देवदास' के रूप में पेश किया। दिलीप कुमार के 'देवदास' का मुकाबला करना शाहरुख के लिए बिल्कुल आसान नहीं था लेकिन 'देवदास' के दर्द में शाहरुख ने अपना जादू चला दिया। 

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इसके बाद शाहरुख ने अमिताभ बच्चन की 'डॉन' को अपने तरीके से पेश किया। शाहरुख ने अपने फिल्मी करियर में 'चलते चलते' और 'स्वदेश' जैसी फिल्में भी की और 'वीर जारा' और 'पहेली' जैसी भी। 40 की उम्र तक पहुंचते हुए शाहरुख ने 'मै हूं ना', 'ओम शांति ओम' और 'रब ने बना दी जोड़ी' में अपना रोमांस दिखाया। 

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इसके बाद शाहरुख ने 'माई नेम इज खान' के जरिए पूरी दुनिया को एक नई बात कहने की कोशिश की तो 'रा.वन' के जरिए नए जमाने से तालमेल बनाने की भी कोशिश की। उन्होंने 'चक दे' जैसी फिल्म के साथ एक नई पारी खेली तो कभी एक्शन फिल्मों का भी रुख किया। शाहरुख केटरीना और अनुष्का के साथ भी जबरदस्त रोमांस करते नजर आएं हैं।
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बॉक्स ऑफिस की ओवेर्सीज टेरिटरी तो एक समय जैसे सिर्फ शाहरुख खान के लिए ही बनी थी। विदेशों में शाहरुख का जलवा रहा है। वो प्रोड्यूसर बने तो भी जमकर कारोबार किया। बॉलीवुड में विलेन से अपनी शुरुआत करने वाले इस हीरो का आज अपना एक अलग दबदबा है।
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