चश्मे बद्दूर
सई परांजपे की फिल्मों की खासियत यह होती है कि उनमें बैकग्राउंड म्यूजिक न के बराबर होता है। दर्शक जब सई परांजपे की फिल्में देख रहा होता है तो वह फिल्म के पात्रों के साथ पूरी तरह से जुड़ जाता है। कॉमेडी फिल्म 'चश्मे बद्दूर' बनाने के साथ सई ने 'कथा', 'स्पर्श' और 'दिशा' जैसी फिल्में बनाई। उनकी फिल्म का हर पात्र दर्शकों को खुद की जिंदगी का ही एक हिस्सा लगता। बॉक्स ऑफिस पर 'चश्मे बद्दूर' को छोड़कर कोई भी फिल्म बड़ी सफल साबित नहीं हुई लेकिन उनकी सफलता इस बात में थी कि उन्होंने इंडस्ट्री को बताया कि इस तरह की फिल्में भी बनाई जा सकती हैं।