बॉलीवुड में अपनी अलग जगह बना चुके कपूर खानदान के वारिस रणबीर कपूर का आज जन्मदिन है। आज रणबीर 35 साल के हो गए। जानें, रणबीर के बारे में खास बातें...
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रणबीर कपूर
- फोटो : INUTH
रणबीर कपूर अभिनेता ऋषि कपूर और अभिनेत्री नीतू कपूर के बेटे हैं। वह कपूर खानदान की चौथी पीढ़ी के वारिस हैं। रणबीर का जन्म 28 सितंबर 1982 को मुंबई में हुआ। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक फिल्में दी। आगे जानें, फिल्मों के बारे में...
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ranbir kapoor
रणबीर के अब तक के फिल्मी करियर पर गौर करें तो फिल्म 'सांवरिया' से 2007 में रणबीर ने करियर की शुरुआत की जिसमें उन्होंने एक ऐसे किरदार को साकार किया है जो अपनी जिंदगी खुलेआम जीना पसंद करता है, जो उसे अच्छा लगता है उसके बारे में वह बता देता है, जो बुरा लगता है उसे बोले बिना भी नहीं झिझकता। एक ऐसा प्रेमी जो अपने प्यार का खुलेआम इजहार करने से भी नहीं डरता लेकिन वहीं अपने प्यार को बदनाम होने से बचाने के लिए हर मर्यादा का भी ख्याल रखता है।
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ranbir kapoor and katrina kaif
रोमांटिक छवि ने धड़काए दिल: इस फिल्म के बाद 2008 में रणबीर ने 'बचना-ए-हसीनों' फिल्म में युवाओं के बीच अहम जगह तो बनाई ही, साथ ही उन्होंने युवतियों के दिलों को धड़काए बिना भी नहीं छोड़ा। लड़कियां भी रणबीर का इंतजार करने लगी कि कब वह 'बचना-ए-हसीनों' गाते हुए उनके बीच आ जाए। कहने को रणबीर इस फिल्म में प्यार को खेल समझकर एक के बाद एक लड़की को धोखा देते गए लेकिन जब उसे सचमुच प्यार हुआ तो अपनी गलतियों को सुधारने के लिए इस प्रेमी ने हर संभव प्रायश्चित किया। फिर चाहे उसके लिए उसे नौकर, सेक्रेटरी या फिर वेटर ही क्यों नहीं बनना पड़ा हो। इस फिल्म के बाद रणबीर फिल्म 'लक बॉय चांस' में कैमियो की भूमिका निभाने में भी नहीं झिझके।
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रणबीर कपूर
फिल्म 'वेक अप सिड' से रणबीर कॉलेज जाने वाले युवक-युवतियों के रोल मॉडल बन गए। युवा उन्हीं की नकल करते हुए अपने कॉलेज में मस्ती करने लगे। इस फिल्म से रणबीर न सिर्फ युवाओं की पहली पंसद बने बल्कि इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में उनका नामांकन भी किया गया। इसके बाद 2009 में रिलीज हुई 'अजब प्रेम की गजब कहानी' में हैप्पी क्लब के अध्यक्ष रूप में रणबीर जितने कूल दिखे, उतने ही मासूम दिखार्ई पड़े जो फिल्म की नायिका जेनी (कैटरीना कैफ) का दिल जीते बिना न रह सके। इस फिल्म के लिए रणबीर का एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में नामांकन हुआ।
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Ranbir kapoor
फिल्म 'वेक अप सिड' से रणबीर कॉलेज जाने वाले युवक-युवतियों के रोल मॉडल बन गए। युवा उन्हीं की नकल करते हुए अपने कॉलेज में मस्ती करने लगे। इस फिल्म से रणबीर न सिर्फ युवाओं की पहली पंसद बने बल्कि इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में उनका नामांकन भी किया गया। इसके बाद 2009 में रिलीज हुई 'अजब प्रेम की गजब कहानी' में हैप्पी क्लब के अध्यक्ष रूप में रणबीर जितने कूल दिखे, उतने ही मासूम दिखार्ई पड़े जो फिल्म की नायिका जेनी (कैटरीना कैफ) का दिल जीते बिना न रह सके। इस फिल्म के लिए रणबीर का एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के रूप में नामांकन हुआ।
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जग्गा जासूस ट्रेलर रिलीज
- फोटो : self
इसके बाद 2009 में ही 'रॉकेटसिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर' फिल्म में रणबीर ने एक मंदबुद्धि लेकिन अपनी पेरशानियों से खुद लडऩे वाले इंसान की भूमिका निभाई जो अपनी परेशानियों को भाग्य का नाम न देकर उनसे लडने की क्षमता रखता है। रणबीर को लगातार 'वेक अप सिड', 'अजब प्रेम की गजब कहानी' और 'रॉकेट सिंह' में उनकी परफॉर्मेंस के लिए फिल्म फेयर क्रिटिक अवार्ड से नवाजा गया। इस समय में तो जैसे हर किसी की जुबां पर सिर्फ रणबीर कपूर का नाम ही चढ़ा हुआ था। इतना होता तो बस था।
फिल्म 'राजनीति' में तो रणबीर कपूर ने कमाल ही कर दिया। समर प्रताप के किरदार में रणबीर ऐसे रमे कि समीक्षक भी वाह-वाह किए बिना न रह सके। विदेश से पढ़कर आने के बाद भी समर प्रताप भारतीय राजनीति में इस तरह से रमा कि किसी को विश्वास ही नहीं हुआ कि यह वही रणबीर है जो कभी मंदबुद्धि की, कभी लेजी ब्वॉय की, तो कभी युवा प्रेमी की भूमिका में नजर आता है। युवा राजनेता के रूप में अपने गंभीर किरदार से रणबीर ने इस फिल्म में जान डाल दी। इसके बाद भी रणबीर रूके नहीं बल्कि बच्चों को खुश करने के लिए ‘चिल्लर पार्टी’ में ‘टॉय टॉय फिश’ गाने पर थिरकते भी दिखे।
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इन सबके बीच रणबीर की रॉकस्टार की भूमिका को कैसे भूलाया जा सकता है। ‘रॉकस्टार’ में रणबीर ने साबित कर दिया की उनका सानी कोई नहीं। रणबीर जितने पैशन के साथ अभिनय करते हैं, उतने ही पैशन के साथ रणबीर एक जुनूनी लवर भी है, जिसे अपनी मंजिल पाने से कोई नहीं रोक सकता। रणबीर की ‘बर्फी’ में रणबीर नहीं बल्कि उनका अभिनय बोल रहा था। कहते हैं न कई लोगों को कुछ चीजें विरासत में ही मिलती हैं। रणबीर को देखकर कुछ ऐसा ही लगता है कि उन्हें अभिनय विरासत में मिला है।
वैसे भी बॉलीवुड में बहुत ही कम ऐसे अभिनेता हैं जो अपने अभिभावकों के इंडस्ट्री में होने के बाद भी अपनी अलग पहचान बना पाए। लेकिन रणबीर ऐसे हैं जिन्होंने न सिर्फ अपने अभिभावकों का नाम रोशन किया बल्कि यह साबित कर दिया कि कपूर खानदान में अभिनय कूट-कूटकर भरा है। उनके समकालीन अभिनेता भी इतने अच्छे मुकाम पर नहीं पहुंच पाएं जितना कि रणबीर कुछ ही सालों में पहुंच गए।
किसी ने सच ही कहा है कि किस्मत भी उसी का साथ देती है जिसमें कुछ करने की प्रतिभा है। तभी तो रणबीर को इतने कम समय में अनुराग बसु, इम्तियाज अली, संजय लीला भंसाली, राजकुमार संतोषी, प्रकाश झा और सिद्धार्थ आनंद जैसे निर्देशकों के साथ काम करने का अवसर मिला।
रणबीर के अब तक के कैरियर को तो देखकर लगता है कि सिद्धार्थ आनंद की बात सच हो रही है। तभी सिद्धार्थ ने रणबीर के बारे में कहा था कि, रणबीर एंथनी ('अमर अकबर एंथनी' फिल्म में अमिताभ का किरदार) का किरदार निभाने के लिए एकदम सही कलाकार हैं। वह 'कुली' की भूमिका कर सकते हैं, वह वे सभी भूमिकाएं कर सकते हैं जो अमिताभ की अच्छी भूमिकाएं मानी जाती हैं।