जयललिता के करीबी रहे रामचंद्रन ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। एक बार जब वह तमिलनाडु विधानसभा पहुंची तो उनके साथ काफी बुरा बर्ताव हुआ। 1989 को विपक्ष की नेता जयललिता अपना फोन टैप किए जाने का आरोप लगाकर सदन से निकलने लगीं तो एक डीएमके सदस्य ने उन्हें रोकने के लिए उनकी साड़ी तक खींच ली, जिससे वह गिर गईं। जयललिता ने तब शपथ ली थी कि वह सदन में तब लौटेंगी जब सदन महिलाओं के लिए सुरक्षित होगा। जिसके बाद जयललिता मुख्यमंत्री बनकर लौंटी। 1991 में वह पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री चुनी गईं।