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Bioscope S2: ‘जय-वीरू’ ने रचा कॉमेडी का अद्भुत संसार, धर्मेंद्र की जिद पर इस हीरोइन की हुई छुट्टी

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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अमिताभ बच्चन को पिछली सदी के महानायक का बीबीसी से मिला खिताब दिलाने में जिन फिल्मों का बड़ा योगदान रहा, उनमें से एक फिल्म रही है, ‘चुपके चुपके’। जिस साल फिल्म ‘शोले’ का जय, ‘अगर किसी ने हिलने की कोशिश की तो भून कर रख दूंगा’ वाले तेवर दिखा रहा था, उसी साल फिल्म ‘चुपके चुपके’ का सुकुमार अपने दोस्त परिमल के जीजाजी को सबक सिखाने के साथ साथ वसुधा का प्रियतम भी बना था। फिल्म ‘चुपके चुपके’ को शनिवार को 46 साल पूरे हुए तो इसी सुकुमार यानी अमिताभ बच्चन ने एक ट्वीट में फिल्म की एक फोटो साझा करते हुए लिखा, ‘ये घर जो इस पिक्चर में आप देख रहे हैं, वह मेरा घरा है। खरीदा हुआ। फिर से बनाया हुआ। तमाम फिल्में यहां शूट हुईं, ‘आनंद’, ‘नमक हराम’, ‘चुपके चुपके’, ‘सत्ते पे सत्ता’। ये तब फिल्म निर्माता एन सी सिप्पी का मकान हुआ करता था।’ इस ट्वीट में अमिताभ ने बहुत चतुराई से जलसा को अपना  ‘घर’ और एन सी सिप्पी का ‘मकान’ बताया है। एन सी सिप्पी से अमिताभ बच्चन ने ये ‘घर’ कैसे हासिल किया, इसकी भी अलग ही कहानी है। इसके बारे में भी बताता हूं लेकिन, पहले बात आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘चुपके चुपके’ की मेकिंग की। और, उससे पहले देख लेते हैं फिल्म का ये सुपर हिट गाना, ‘अबके सजन सावन में...!’




 
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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘चुपके चुपके’ का संगीत एस डी बर्मन ने कमाल का लिखा है। फिल्म के गीत आनंद बक्षी के लिखे हुए हैं। और, इसका हर गाना पहले से इक्कीस ही साबित होता है। मोहम्मद रफी और किशोर कुमार का गाया फिल्म का गाना ‘सा रे गा मा’ दोनों की जुगलबंदी की मिसाल बन चुका है। निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म ‘चुपके चुपके’ बंगाली सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार और माधवी मुखर्जी की फिल्म ‘छद्मवेशी’ के रीमेक के तौर पर बनाई है। फिल्म में धर्मेंद्र और आशा पारेख की जोड़ी बननी थी। ऋषिकेश मुखर्जी ने आशा पारेख से इस फिल्म में कॉमेडी कराने का पक्का वादा कर रखा था। लेकिन, धर्मेंद्र का मन उन दिनों शर्मिला टैगोर पर अटका हुआ था। उन्होंने अपने निर्देशक को फिल्म में अपनी पसंद की हीरोइन लेने के लिए जो बन सकता था, सब किया।
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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
ऋषिकेश मुखर्जी के लिए ये एक बहुत ही प्रयोगात्मक फिल्म थी और उस समय के माचो मैन या कहें कि ही मैन का कॉमिक अवतार बड़े परदे पर दिखाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार थे। धर्मेंद्र की ही बात मानी गई। आशा पारेख फिल्म से बाहर हुईं। शर्मिला टैगोर अपने डिंपल वाले गालों के साथ फिल्म की हीरोइन बनीं। धर्मेंद्र की बल्ले बल्ले हुई। लेकिन, आशा पारेख की इसके बाद फिर ऋषिकेश मुखर्जी से ढंग से बात नहीं हुई। ऋषिकेश मुखर्जी ने भी बाद की फिल्मों में उन्हें लेने के लिए बात भी चलाई, लेकिन आशा पारेख जैसी खुद्दार महिला ने उनकी बात ही दोबारा नहीं सुनी। ये और बात है कि ये उनकी ये दबंगई धर्मेंद्र के सामने कभी नहीं चली।

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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी दोनों इस फिल्म में बहुत चिरौरी करने के बाद आए। एक तरह से कहें तो बालहठ जैसा करके आए। ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘आनंद’ ने ही अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा में पहला ऐसा रोल दिया था जिससे लोगों ने उन्हें राह चलते पहचानना शुरू किया। जया भादुड़ी  को भी फिल्म ‘गुड्डी’ के लिए ऋषिकेश मुखर्जी ही पूना फिल्म इंस्टीट्यूट से खोज कर लाए थे। अमिताभ बच्चन के गाढ़े वक्त में काम आने वाले तमाम लोग भले उनसे बाद में किसी न किसी बात पर नाराज होते रहे। लेकिन, ऋषिकेश मुखर्जी ने ताउम्र कभी अमिताभ को लेकर कुछ नहीं कहा। अमिताभ ने भी उनकी ताउम्र उन्हें अपना उस्ताद ही माना। जया का हालांकि बहुत ज्यादा रोल फिल्म में है नहीं। और, वह फिल्म की शूटिंग करते वक्त गर्भवती भी थीं। ऋषिकेश मुखर्जी ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि बच्चन परिवार की जल्द आने वाली लाडली उनकी फिल्म के सेट पर गर्भ में ही ग्लैमर सीख रही है। पूरी फिल्म में जब भी जया कैमरे के सामने होतीं तो वह या तो साड़ी से अपना बदन छुपाए रखतीं या फिर कैमरा कुछ यूं रखा जाता कि जया परदे पर गर्भवती न दिखें। फिल्म में वह वसुधा हैं। सुकुमार के प्रेम में पागल। ‘एस’ अक्षर लिखी अंगूठी वाला सीन तो आपको याद ही होगा।
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चुुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अब आगे बढ़ने से पहले थोड़ी सी बात फिल्म ‘चुपके चुपके’ के प्रोड्यूसर एन सी सिप्पी की कर लेते हैं, जिनके ‘मकान’ को अमिताभ बच्चन ने अपना ‘घर’ बनाया। कम लोगों को ही पता होगा कि जया भादुड़ी को हिंदी सिनेमा में स्थापित करने वाली फिल्म ‘गुड्डी’ और अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा में पहली हिट का स्वाद चखाने वाली फिल्म ‘आनंद’, दोनों के निर्माता एन सी सिप्पी ही हैं। एन सी सिप्पी के हां कहने पर ही अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ मिली जिसे देख प्रकाश मेहरा ने उन्हें उनकी पहली सोलो हिट फिल्म ‘जंजीर’ के लिए साइन किया था। एन सी सिप्पी ने अमिताभ बच्चन और जया को लेकर फिल्म ‘चुपके चुपके’ के बाद ‘मिली’ बनाई और अमिताभ बच्चन व रेखा को लेकर ‘आलाप’।
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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
एन सी सिप्पी के दो बेटे हुए राज एन सिप्पी व रोमू एन सिप्पी। उनकी एक बेटी भी हुई मोहिनी एन सिप्पी। राज एन सिप्पी आगे चलकर फिल्म ‘सत्ते पे सत्ता’ के निर्माता बने। कहते हैं कि एन सी सिप्पी के बेटे अपहरण करने की कोशिशें भी उनके इसी घर से हो चुकी थीं। जिन फिल्मों का जिक्र अमिताभ बच्चन ने शनिवार को अपनी ट्वीट में किया, वे सारी फिल्में एन सी सिप्पी की बनाई हुई हैं और जिस वक्त ये फिल्मे बनीं एन सी सिप्पी ने पैसे बचाने के लिए अपने घर का इस्तेमाल इन फिल्मों की शूटिंग के लिए किया था। इन फिल्मों से ही अमिताभ बच्चन इतने बड़े सुपरस्टार बने कि कहते हैं उनकी एक फिल्म ‘सत्ते पे सत्ता’ की फीस के एवज में बाद में सिप्पी परिवार का ये ‘मकान’ अमिताभ बच्चन का ‘घर’ बन गया। हालांकि, फिल्म ‘चुपके चुपके’ में काम करने के वक्त अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी ने निर्माता एन सी सिप्पी से दमड़ी तक नहीं ली थी।
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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘चुपके चुपके’ के रिलीज पोस्टर में मुख्य चेहरा ओम प्रकाश का ही है। ये काम भी ऋषिकेश मुखर्जी ही कर सकते थे कि फिल्म का मेन लीड कलाकार वह ओम प्रकाश जैसे अभिनेता को बनाएं और अमिताभ बच्चन व धर्मेंद्र जैसे कलाकारों को सहायक भूमिकाओं में पेश करने की सोचें। ये अलग बात है कि धर्मेंद्र ने अपनी कमाल की कॉमिक टाइमिंग से ये फिल्म न सिर्फ अपने नाम कर ली बल्कि दर्शकों के दिल भी जीत लिए। फिल्मफेयर को उनका ये रोल पुरस्कार लायक भले न लगा हो पर जनता ने ये इस फिल्म को हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्मों में शुमार कर दिया। ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्में आम जिंदगी से सांसें पाने वाली फिल्में रही हैं। वह हमारे आसपास की ही कहानी कहते रहे। हमारे जाने पहचाने से किरदार तलाशते और उनको लेकर परदे पर बुन देते भावनाओं का एक ऐसा ताना बाना, जिसमें डूबते उतराते कब फिल्म पूरी हो जाती लोगों को पता ही नहीं चलता। फिल्म ‘चुपके चुपके’ ऋषिकेश मुखर्जी के करियर का माउंट एवरेस्ट कही जा सकती है। इस फिल्म के बाद ऋषिकेश मुखर्जी के करियर का अवरोह शुरू होता है। उन्होंने हालांकि अमोल पालेकर के साथ ‘गोलमाल’, रेखा के साथ ‘खूबसूरत’ जैसी कामयाब फिल्में फिल्म ‘चुपके चुपके’ के बाद बनाईं लेकिन, ‘चुपके चुपके’ तो बस ‘चुपके चुपके’ है।

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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर की जोड़ी ने फिल्म ‘चुपके चुपके’ में जो रोमांस परदे पर जिया है, वह बहुत कम देखने को मिलता है। परिमल और सुलेखा की नई नई शादी हुई है। दोस्तों, रिश्तेदारों के यहां 30 डिनर, 30 लंच, 25 ब्रेकफास्ट और 15 टी पार्टी करके दोनों बोर हो गए हैं। लेकिन, परिमल ज्यादा परेशान है सुलेखा के बार बार अपने जीजाजी के यशगान से। ये जीजाजी का किरदार किया है शानदार अभिनेता ओमप्रकाश ने। फिल्म ‘बुड्ढा मिल गया’  में इससे पहले ऋषिकेश मुखर्जी ने ओम प्रकाश को फिल्म का टाइटल रोल दिया था, लेकिन यहां फिल्म की पूरी कहानी ही जीजाजी को चारों खान चित करने की परिमल की प्लानिंग पर है। उसका दोस्त सुकुमार इसमें उसकी मदद करता है। और, बाकी फिर जो कुछ होता है वह बस देखने से समझ आ सकता है, बताने से नहीं।
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चुपके चुपके - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

फिल्म ‘चुपके चुपके’ में धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी, ओम प्रकाश, असरानी, डेविड, केश्टो मुखर्जी, उषा किरन सभी ने शानदार अभिनय किया है। ऋषिकेश मुखर्जी को फिल्म के संवादों से भी खूब मदद मिली। एक बानगी देखिए:
- कौन है?

- हम हैं साहेब

- खड़े खड़े क्या कर रहे हो?

- खड़ा खड़ा कुछ नहीं कर रहा, बस आके आके खड़े हुए हैं

- आके आके क्या होता है?

- आपने खड़े खड़े का दो बार प्रयोग किया, अच्छा लगा, इसीलिए हमने भी उसी छंद में आके आके बोलकर कविता का रस ले लिया।

ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म ‘चुपके चुपके’ से पहले धर्मेंद्र की छवि बदलने का कोशिश फिल्म ‘सत्यकाम’ में भी की थी। लेकिन, फिल्म ‘चुपके चुपके’ ने कामयाबी की इतनी लंबी लकीर खींची कि बाकी सब इसके आगे फीका पड़ गया। ये फिल्म सरकार को भी इतनी संपूर्ण पारिवारिक मनोरंजक फिल्म लगी कि इसे साल 1980 में पूर्ण सूर्यग्रहण के समय दोपहर में दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। वह इसलिए कि लोग अपने घरों में ही रहें और नंगी आंखों से सूर्यग्रहण देखने की कोशिश न करें। ये फिल्म इन दिनों अमेजन प्राइम वीडियो के अलावा यू ट्यूब पर भी देखी जा सकती है।

(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)



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