रानी चटर्जी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
ओटीटी पर आपने एमएक्स प्लेयर की सीरीज ‘मस्तराम’ में जो किया, उसे लेकर आपको काफी आलोचनाएं सुनने को मिलीं, ये सीरीज करते समय आपके मन में क्या था?
ओटीटी का दर्शक वर्ग सिनेमा औऱ टेलीविजन से बिल्कुल अलग है। सिनेमा आप अकेले भी देखते हैं और परिवार के साथ भी, उसी लिहाज से आप फिल्में चुनते हैं। टीवी जरूर ड्राइंगरूम में होने की वजह से सब साथ में देखते हैं। लेकिन, ओटीटी बहुत ही ‘पर्सनल व्यूइंग’ के लिए बना है। मुझे डर था कि ‘मस्तराम’ में मेरा काम देखकर मेरे प्रशंसकों के बीच मेरी नकारात्मक छवि बन सकती है, लेकिन सीरीज रिलीज हुई तो मेरे प्रशंसकों की तादाद और बढ़ गई। लोग अपनी फंतासियों में मुझे देखने लगे हैं।