फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

13 की उम्र में एक राजा की करतूत से गर्भवती हो गई थीं बेगम अख्तर, बेटी जन्मी तो बताया बहन

Tue, 08 Oct 2019 05:18 PM IST
भावना शर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 11
begum akhtar - फोटो : social media
गजल मल्लिका बेगम अख्तर का आज जन्मदिन है । उन्हें दादरा और ठुमरी की साम्राज्ञी भी कहा जाता है। उन्होंने कुछ फिल्मों में अदाकारी का जौहर भी दिखाया । उनके गीतों-गजलों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। लेकिन आज हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े ऐसे रोचक पहलुओं के बारे में बताएंगे जिनके बारे में आपने नहीं सुना होगा । बेगम अख्तर के बचपन का नाम बिब्बी था। वो फैजाबाद के शादीशुदा वकील असगर हुसैन और उनकी दूसरी पत्नी मुश्तरीबाई की बेटी थीं। 
विज्ञापन

2 of 11
begum akhtar
मुश्तरीबाई को जुड़वा बेटियां पैदा हुई थीं। चार साल की उम्र में दोनों बहनों ने जहरीली मिठाई खा ली थी। इसमें बिब्बी तो बच गईं लेकिन उनकी बहन का देहांत हो गया था। असगर ने भी मुश्तरी और बेटी बिब्बी को छोड़ दिया था जिसके बाद दोनों को अकेले ही जिंदगी में संघर्ष करना पड़ा। बिब्बी का मन पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगता था। 
विज्ञापन

3 of 11
begum akhtar
एक बार शरारत में उन्होंने अपने मास्टरजी की चोटी काट दी थी। मामूली पढ़ाई के बावजूद उन्होंने उर्दू शायरी की अच्छी जानकारी हासिल की। सात साल की उम्र से उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। मां मुश्तरी, बिब्बी के गाने-बजाने से खुश नहीं थीं। उनकी तालीम का सफर शुरू हो चुका था। उन्होंने कई उस्तादों से संगीत की शिक्षा ली लेकिन ये सफर आसान नहीं था। 13 साल की उम्र में बिब्बी को अख्तरी बाई के नाम से जाना जाने लगा था। 

4 of 11
begum akhtar
उसी समय बिहार के एक राजा ने कद्रदान बनने के बहाने उनका रेप किया। इस हादसे के बाद अख्तरी प्रेग्नेंट हो गईं और उन्होंने छोटी सी उम्र में बेटी सन्नो उर्फ शमीमा को जन्म दिया। दुनिया के डर से इस बेटी को वह अपनी छोटी बहन बताया करती थीं। बाद में दुनिया को पता चला कि यह उनकी बहन नहीं बल्कि बेटी है। 15 साल की उम्र में अख्तरी बाई फैजाबादी के नाम से पहली बार मंच पर उतरीं।
विज्ञापन

5 of 11
begum akhtar
यह कार्यक्रम बिहार के भूकंप पीड़ितों के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए कोलकाता में हुआ था। कार्यक्रम में भारत कोकिला सरोजिनी नायडू भी मौजूद थीं। वो अख्तरी बाई के गायन से बहुत प्रभावित हुईं और उन्हें आशीर्वाद दिया। बाद में नायडू ने एक खादी की साड़ी भी उन्हें भेंट में भिजवाई। बेगम अख्तर की शिष्या रीता गांगुली का कहना है कि पहली परफॉर्मेंस के समय अख्तरी बाई की उम्र 15 साल थी।
विज्ञापन

6 of 11
begum akhtar
उस समय कुछ लोग उन्हें तवायफ भी समझते थे। बेगम अख्तर की शिष्या रीता गांगुली ने उन पर एक किताब भी लिखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि मुंबई के एक तवायफ संगठन ने मुश्तरी बाई से उनकी बेटी को उन्हें सौंपने का अनुरोध किया था। बदले में एक लाख रुपए देने का प्रस्ताव रखा था लेकिन मां मुश्तरी ने इस पेशकश को ठुकरा दिया था। धीरे-धीरे शोहरत बढ़ी और अख्तरी बाई के प्रशंसक भी बढ़ गए।
विज्ञापन

7 of 11
begum akhtar
अख्तरी बाई अकेलेपन से बहुत घबराती थीं। वो अपने होटल के कमरे में अकेले जाने से डरती थीं। क्योंकि अकेले में उन्हें पुरानी यादें घेर लेती थीं। उन्होंने अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए शराब और सिगरेट पीना शुरू कर दिया। उन्हें सिगरेट की तलब इतनी ज्यादा थी कि रमज़ान में वो केवल आठ या नौ रोज़े ही रख पाती थीं। वो एक चेन स्मोकर थीं। एक बार वो ट्रेन में सफर कर रही थीं। उस दौरान रात में एक स्टेशन पर गाड़ी रुकी लेकिन उन्हें वहां सिगरेट नहीं मिली।

8 of 11
begum akhtar
तब बेगम अख्तर ने गार्ड से सिगरेट मंगाने के लिए उसकी लालटेन और झंडा छीन लिया था। तब गार्ड उनके दिए सौ रुपए का सिगरेट का पैकेट लाया और इसके बाद ट्रेन स्टेशन से आगे बढ़ी। सिगरेट के कारण ही बेगम अख्तर ने ‘पाकीज़ा’ फिल्म छह बार देखी थी। दरअसल, सिगरेट पीने के लिए उन्हें सिनेमाहॉल से बाहर जाना पड़ता था और वापस लौटने तक फिल्म आगे बढ़ चुकी होती थी। इस पर वो दोबारा फिल्म देखने जातीं और इस प्रकार पूरी फिल्म छह बार में देख सकीं।

9 of 11
begum akhtar
अख्तरी बाई गायन के साथ अभिनय भी करती थीं। 1939 में उन्होंने फिल्म जगत से नाता तोड़ा और लखनऊ आकर रहने लगीं। यहां आकर उन्हें उनका प्यार मिला। 1945 में उन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर बैरिस्टर इश्तियाक अहमद अब्बासी से शादी कर ली। तभी से उनका नाम बेगम अख्तर पड़ गया। पति के कहने पर उन्होंने गाना छोड़ दिया था। गाना छोड़कर शायद बेगम अख्तर ने अपनी जान को छोड़ दिया था, इसीलिए वो बीमार रहने लगीं। सिगरेट बहुत पीती थीं इसलिए उन्हें फेफड़े की बीमारी के साथ डिप्रेशन की समस्या हो गई।

10 of 11
begum akhtar
संतान ना पैदा होने के कारण वो बहुत दुखी रहने लगी थीं। तब डॉक्टरों ने कहा कि गाने से उनकी बीमारी ठीक हो सकती है। तब पति की रजामंदी के बाद 1949 में वे ऑल इंडिया रेडियो लखनऊ से जुड़कर गायन की दुनिया में वापस आ गईं। एक बार बेगम अख्तर एक संगीत सभा में भाग लेने मुंबई गईं। वहीं उन्होंने अचानक तय किया कि वो हज करने मक्का जाएंगी। जब तक वो मदीना पहुंची, उनके सारे पैसे खत्म हो चुके थे। उन्होंने जमीन पर बैठकर नात पढ़ना शुरू कर दिया। लोगों की भीड़ लग गई और इस तरह उन्होंने पैसे जमा किए। हज से आने के बाद दो साल तक बेगम अख्तर ने शराब को हाथ नहीं लगाया, मगर धीरे-धीरे फिर से पीना शुरू कर दिया।
विज्ञापन

11 of 11
बेगम अख्तर - फोटो : SELF
भारत सरकार ने इस सुर साम्राज्ञी को पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित किया था। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। 30 अक्टूबर 1974 को बेगम अख्तर अहमदाबाद में मंच पर गा रही थीं। तबीयत खराब थी, अच्छा नहीं गाया जा रहा था। ज्यादा बेहतर की चाह में उन्होंने खुद पर इतना जोर डाला कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां से वो वापस नहीं लौटीं। हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया। लखनऊ के बसंत बाग में उन्हें सुपुर्दे-खाक किया गया। उनकी मां मुश्तरी बाई की कब्र भी उनके बगल में ही थी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें