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कब लड़ा गया था सिंहगढ़ का युद्ध, जिसके बाद शिवाजी ने कहा था- 'गढ़ आला, पन सिंह गेला'

Tue, 04 Feb 2020 04:52 PM IST
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सिंहगढ़ का युद्ध - फोटो : Self
अजय देवगन की फिल्म 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' ने बॉक्स ऑफिस पर 250 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर चुकी है। फिल्म ने रिलीज से अभी तक बॉक्स ऑफिस पर मजबूत पकड़ बनाई हुई है। तानाजी 2020 की पहली 250 करोड़ी फिल्म है। फिल्म में अजय देवगन तानाजी बने हैं। काजोल ने तानाजी की पत्नी सावित्री बाई का किरदार निभाया है और सैफ अली खान राजपूत कमांडर उदयभान राठौड़ के किरदार में हैं। यह फिल्म तानाजी मालुसरे की कोंधना किले (जिसका नाम बदलकर शिवाजी ने सिंहगढ़) पर विजय की कहानी पर आधारित है।

 आइए जानते हैं क्या था मराठों द्वारा लड़ा गया सिंहगढ़ का युद्ध, क्या निकले थे इसके परिणाम।
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छत्रपति शिवाजी - फोटो : अमर उजाला
  • तानाजी से पहले थोड़ी सी बात मराठा शक्ति के उदय पर की जानी जरूरी है। 18वीं शताब्दी में एक छोटे भूमिया स्तर से उठकर बड़े शासक के स्तर तक पहुंचने वाली मराठा शक्ति ने दक्कनी राजनीति को एक नया आयाम दिया था। वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी कंपनी के भारत में क्षेत्रीय विस्तार में भी मराठा शक्ति एक निर्णायक तत्व बनी थी।
  • मुगल शासकों की कमजोर स्थिति का लाथ उठाकर मराठों ने अपनी शक्ति को मजबूत कर दिल्ली पर पकड़ बनानी शुरू कर दी। शिवाजी की बढ़ती हुई शक्ति से चिंतित होकर मुगल बादशाह औरंगजेब ने दक्षिण में नियुक्त अपने सूबेदार को उन पर चढ़ाई करने का आदेश दिया।
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shivaji
  • शिवाजी के पास बड़ी संख्या में किले थे। शिवाजी ने सबसे पहले जिस किले को अपने अधीन किया था वह था तोरण का किला। इस जीत ने उन्हें रायगढ़ और प्रतापगढ़ जैसे किलों पर कब्जा करने के लिये प्रेरित किया। लेकिन कभी युद्ध को कभी संधि के माध्यम से मुगलों ने ये किले हथिया लिए।
  • इसमें से एक किला था कोंधाना का किला जो कि शिवाजी ने 1665 ई. में पुरंदर की संधि के बाद मुगलों के दे दिया था। शिवाजी अपने इस किले को वापस पाना चाहते थे। ये किला शिवाजी के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि कहा जाता था कि ये किला जिस किसी के पास भी होगा उसका 'पूना' पर अधिकार होगा।

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तानाजी मालुसरे - फोटो : amar ujala
  • ऐसे में शिवाजी महाराज ने अपने घनिष्ठ मित्र और सेनापति तानाजी मालुसरे को इसे फतह करने के लिए भेजा। तानाजी अपने भाई सूर्या जी को साथ लेकर करीब 300 सेना के साथ इस किले को फतह करने चल दिए।
  • किले की दीवार इतनी सीधी सपाट थी कि उसपर आसानी से चढ़ना संभव नहीं था। इतना ही नहीं इस किले की रक्षा करने के लिए किले में करीब 5000 मुगल सेना तैनात की गई थी। किले के नीचे पहुंचने के बाद तानाजी योजना के तहत रस्सी की मदद से इस किले में दाखिल होने में सफल हुए।
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सिंहगढ़ का युद्ध - फोटो : Twitter
  • आखिरकार 4 फरवरी 1670 को रात के समय शुरू हुआ सिंहगढ़ का युद्ध। यह युद्ध न सिर्फ मुगलों के लिए बल्कि मराठों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण था। यह युद्ध छत्रपति शिवाजी के सेनानायक तानाजी मालुसरे और उदयभान राठौड़ के बीच हुआ था। उदयभान राठौड़ सिंहगढ़ के किले का किलापति था और मुगल सेना के सेनानायक जय सिंह प्रथम के अधीन कार्यरत था।
  • 4 फरवरी को तानाजी बनाम मुगल सेना के बीच एक युद्ध हुआ। मुगल सेना का नेतृत्व उदयभान सिंह राठौड़ (जो एक राजपूत सरदार था) ने किया। लंबी लड़ाई के बाद तानाजी मालुसरे की ढाल टूट गई और लड़ाई में तानाजी और उदयभान दोनों मारे गए। आखिर में मराठों ने बहादुरी का परिचय देते हुए ये युद्ध जारी रखा और अंत में मराठाओं ने इस किले पर फतह हासिल की।
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छत्रपति शिवाजी महाराज को प्रणाम करते पीएम मोदी - फोटो : PTI
  • तानाजी की मृत्यु की खबर सुन शिवाजी ने कहा था- 'गढ़ आला, पन सिंह गेला' यानी किला तो जीत लिया लेकिन अपना शेर खो दिया। बाद में शिवाजी ने कोंधना किले का नाम बदलकर सिंहगढ़ रख दिया। 
  • इसी कोंधना किले में तानाजी और उदयभान के बीच हुए युद्ध को तानाजी फिल्म में दिखाया गया है। सिंहगढ़ के युद्ध नाम से मशहूर इस जंग का किस्सा महाराष्ट्र सरकार की संस्था बाल भारती द्वारा प्रकाशित कक्षा चार की किताब में प्रकाशित है।
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