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Balraj Sahni: इन 10 किरदारों ने दिलाई बलराज साहनी को बड़े परदे पर बुलंदी, हर फिल्म अभिनय की अनोखी टेक्स्ट बुक

Mon, 01 May 2023 09:33 AM IST
ज्योति वर्मा अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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बलराज साहनी - फोटो : social media
बीते जमाने के दिग्गज अभिनेता बलराज साहनी ने हिंदी सिनेमा को अपने सहज अभिनय से एक अलग मुकाम तक पहुंचाया। जिस तरह से फिल्मों में सहजता से अपने किरदार निभाए हैं, उसे देखकर ऐसा नहीं कभी नहीं लगा कि वह अभिनय कर रहे हैं। वह मेथड एक्टिंग का आविष्कार होने से पहले के मेथड एक्टर थे। प्रभावशाली अभिनय के प्रचलन में आने से बहुत पहले  बलराज साहनी ने अपने पात्रों को अपनाना सीख लिया था, जैसे कि वे उनके डीएनए का हिस्सा हों। एक मई 1913 को ब्रिटिश भारत के रावलपिंडी में जन्मे बलराज साहनी के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनके द्वारा निभाए गए 10 चर्चित किरदार के बारे में...
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फिल्म: धरती के लाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: धरती के लाल (1946)

किरदार: निरंजन

साल 1943 में बंगाल में पड़े अकाल को केंद्र में रखकर ख्वाजा अहमद अब्बास ने फिल्म 'धरती के लाल'  का निर्माण और निर्देशन किया था जो साल 1946 में रिलीज  हुई। इस फिल्म में किसानो की दुर्दशा को दिखया था। उन दिनों किसानों का इतना शोषण होता था कि भीख मांगने और आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाने के बाद भी अपनी घरती मां को नहीं बेचते थे।  इस फिल्म में बलराज साहनी ने ऐसे ही एक गरीब किसान के बेटे निरंजन का किरदार निभाया था, जो अपने उसूलों का बहुत पक्का होता है। तमाम मुश्किलों के बावजूद वह अपनी जमीन को बेचने के लिए तैयार नहीं होता है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की यथार्थवादी सिनेमा की नींव डालने वाली फिल्म साबित हुई। भारत के साथ -साथ अंतरराष्ट्रीय स्टार पर भी इस फिल्म को खूब सराहा गया था। पूरे सोवियत संघ में देखी जाने वाली यह पहली भारतीय फिल्म है।
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फिल्म: दो बीघा जमीन (1953) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: दो बीघा जमीन (1953)

किरदार: शंभू महतो

फिल्म 'दो बीघा जमीन' अपने समाजवादी विषय के लिए जानी जाने वाली फिल्म है, जिसे भारत के शुरुआती समानांतर सिनेमा में एक महत्वपूर्ण फिल्म और एक ट्रेंडसेटर माना जाता है। बिमल रॉय के निर्देशन में बनी इस फिल्म में  इस फिल्म में बलराज साहनी और निरूपा रॉय की मुख्य भूमिका थी। बलराज साहनी ने इस फिल्म में  एक किसान शंभू महतो का किरदार निभाया था। दो बीघा जमीन शंभू महतो के परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। लेकिन स्थानीय जमींदार कुछ व्यापारियों के साथ मिलकर एक मिल का निर्माण करना चाहता है और वह शंभू की जमीन खरीद सकता है। शंभू अपनी आजीविका के एकमात्र साधन को बेचने से असहमत है और जमींदार का कर्ज उतारने के लिए तपते डामर पर नंगे पांव कोलकाता (कलकत्ता) की सड़कों पर रिक्शा चलाता है। जिस तरह से बलराज साहनी ने  फिल्म  में रिक्शा चालक के  किरदार को  निभाया है, वह आज भी ‘मेथड एक्टिंग’ में विश्वास रखने वाले अभिनेताओं के लिए एक मानक है। रिक्शा दौड़ाते बलराज साहनी की छवि अपनी मार्मिकता में हिंदी सिनेमा में अद्वितीय रही है। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए ऑल इंडिया सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया, यह फिल्मफेयर बेस्ट फिल्म का  अवार्ड जीतने वाली पहली फिल्म बन गई और कान फिल्म फेस्टिवल में 'नीचा नगर' के बाद अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी।

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फिल्म: घर संसार (1958) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: घर संसार (1958)

किरदार: कैलाश 

फिल्म 'घर संसार' पारिवारिक फिल्म थी, जिसमें बलराज साहनी ने एक पत्र लेखक कैलाश की भूमिका निभाई थी। कैलाश उन लोगों को अपनी सेवाएं  देता है, जो लिख नहीं सकते हैं। इस फिल्म में नरगिस ने बलराज साहनी की पत्नी का किरदार निभाया था। बलराज साहनी और नरगिस दोनों अपनी भूमिकाओं में एक शांत गरिमा लाते हैं और दयालु और मधुर लोगों के रूप में लोगों से पेश आते हैं। बड़े भाई का जो कर्तव्य होता है, उस किरदार को बड़ी ही बखूबी से बलराज साहनी ने निभाया था। बलराज साहनी और नरगिस के अलावा इस फिल्म में राजेन्द्र कुमार और कुमकुम की मुख्य भूमिकाएं थी।  इस फिल्म का निर्माण एए नाडियाडवाला  ने किया था और फिल्म के निर्देशक वी एम व्यास थे ।  
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फिल्म: लाजवंती (1959 ) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: लाजवंती (1959 )

किरदार: निर्मल 

फिल्म 'लाजवंती' में बलराज साहनी और नरगिस की  मुख्य भूमिकाएं हैं। इस फिल्म में गृहस्थी की साधारण समस्या को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से दिखाया है। बलराज साहनी ने इस फिल्म में  शहर के नामी वकील निर्मल का किरदार निभाया। नरगिस ने बलराज साहनी की पत्नी कविता का किरदार निभाया। निर्मल काम में ज्यादा व्यस्त रहता है इसलिए अपनी पत्नी को ज्यादा समय नहीं दे पाता है, यह बात कविता को बहुत अखरती है। उसी दौरान कविता की मुलाकात अपने कॉलेज के दिनों के दोस्त के होती है और दोनों के बीच मुलाकात का सिलसिला बढ़ता है। बात जब निर्मल तक पहुंचती है, तो वह कविता को घर से निकाल देता है। घर में सभी सुविधाएं हो और पति के पास समय न हो तो सब कुछ बेकार होता है। इस विषय को इस फिल्म में बहुत ही प्रभावशाली ढंग से पेश किया गया था। बलराज साहनी का इस फिल्म में बहुत ही बेजोड़ अभिनय रहा है। उस समय यह फिल्म कान फिल्म फेस्टिवल में शामिल  हुई थी। इस फिल्म को साल 1959 में नेशनल अवार्ड मिला था, यह अवार्ड सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट के रूप में मिला था। फिल्म का निर्माण मोहन सहगल ने किया था और फिल्म के निर्देशक नरेंद्र सूरी थे। 
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फिल्म: अनुराधा (1960 ) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: अनुराधा (1960 )

किरदार:  डॉ. निर्मल चौधरी

फिल्म 'अनुराधा' आम आदमी और उसके दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं आधारित फिल्म है। इस फिल्म में बलराज साहनी ने एक आदर्शवादी डॉक्टर, डॉ. निर्मल चौधरी का किरदार निभाया। प्रसिद्ध रेडियो गायिका और नृत्यांगना अनुराधा रॉय को निर्मल चौधरी  से प्यार हो जाता है। उसके पिता इस रिश्ते के खिलाफ हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि एक धनी व्यक्ति के रूप में उनकी स्थिति और विनम्र मूल और अल्प साधनों के डॉक्टर के बीच एक व्यापक अंतर है। अनुराधा रॉय अपने जीवन के प्यार के साथ रहने के लिए अपने सपनों को छोड़ देती। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बलराज साहनी का काम सराहनीय रहा ही है, साथ ही लीला नायडू के भी परफॉर्मेंस को खूब पसंद किया गया था। लीला नायडू ने इसी फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी।
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फिल्म: काबुलीवाला (1961) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: काबुलीवाला (1961)

किरदार: अब्दुल रहमान खान 

फिल्म 'काबुलीवाला' रवींद्रनाथ  टैगोर की लघु कहानी काबुलीवाला पर आधारित है। फिल्म का निर्माण बिमल रॉय और लीला देसाई में किया और इस फिल्म के निर्देशक रहे हेमन गुप्ता। बलराज साहनी ने इस फिल्म में अब्दुल रहमान खान काबुलीवाला का किरदार निभाया। अब्दुल रहमान खान एक अफगानी पठान है, जो अपनी विधवा मां और बेटी अमीना के साथ साधारण और गरीब जीवन व्यतीत कर रहा है। बेटी की इलाज के लिए उसने साहूकार से पैसे उधार लिए थे जिसे  वह चुकाने में असमर्थ है। पैसे कमाने के लिए वह अफगानिस्तान से कोलकाता (कलकत्ता) आ गया और यहां सूखे मेवे बेचने का काम करता है। कोलकाता में एक लड़की में उसे अपनी बेटी नजर आती है जिसे वह अफगानिस्तान छोड़कर आया है। बाप और बेटी के बीच प्रेम का इस फिल्म में  बहुत ही मार्मिक  चित्रण किया गया है और इस किरदार को बलराज साहनी ने बहुत ही सहजता से निभाया है।  

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फिल्म: हकीकत (1964) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: हकीकत (1964)

किरदार: मेजर रंजीत सिंह 

फिल्म 'हकीकत' की कहानी 1962 के चीन और भारत के बीच हुए युद्ध पर आधारित है। इस फिल्म को भारत सरकार और सेना के सहयोग से बनाया गया। बलराज साहनी ने इस फिल्म में मेजर रंजीत सिंह की भूमिका निभाई और काम करने के बदले बलराज साहनी ने पैसे भी नहीं लिए थे। इस फिल्म को व्यापक रूप से भारत की सबसे महान ब्लैक एंड व्हाइट युद्ध फिल्मों में से एक के रूप में याद किया जाता है। इस फिल्म को साल 1965 में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। फिल्म के निर्माता, निर्देशक चेतन आनंद थे। बलराज साहनी के अलावा इस फिल्म में धर्मेन्द्र, संजय खान, प्रिया राजवंश, विजय आनंद और सुधीर की मुख्य भूमिकाएं हैं। 

 

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फिल्म: वक्त (1965) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: वक्त (1965) 

किरदार: लाला केदारनाथ

अभिनेता बलराज साहनी के करियर की 'वक्त' पहली मल्टीस्टारर हैं जिसमे सुनील दत्त, राजकुमार, शशि कपूर, मदन पुरी, शर्मिला टैगोर, साधना, जीवन, मोती लाल, शशि कला व अन्य की मुख्य भूमिकाएं हैं। फिल्म की कहानी एक प्राकृतिक आपदा मे बिछड़े परिवार के लोगों की है, जो भले ही एक नहीं है लेकिन उनका जीवन अजीबो -गरीब तरीके से आपस मे जुड़ा हुआ है। इस फिल्म में बलराज सहानी ने लाला केदारनाथ का किरदार निभाया। यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी इस फिल्म के निर्माता बी आर चोपड़ा थे। इस फिल्म में बलराज साहनी पर फिल्माया गया गाना, 'ऐ मेरी जोहराजबीं' आज भी सबसे हिट गानों में से एक है।

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फिल्म: दो रास्ते (1969) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: दो रास्ते (1969)

किरदार: नवेन्द्रू गुप्ता

निर्माता निर्देशक  राज खोसला की फिल्म 'दो रास्ते' एक मध्यम वर्गीय परिवार की आकांक्षाओं और निराशाओं आधारित फिल्म है। इस फिल्म में बलराज साहनी ने गुप्ता परिवार के मुखिया नवेंद्र गुप्ता का किरदार निभाया। नवेंद्र गुप्ता अपने अपने पैतृक घर को गिरवी रख कर अपने छोटे भाई को विदेश पढ़ता है। लेकिन उसका भाई जब एक अमीर लड़की से शादी करके वापस लौटता है तो उनकी पत्नी के व्यवहार के कारण तनाव पैदा होता है। पूरी फिल्म की कहानी  बलराज साहनी के किरदार की उम्मीदों, जिम्मेदारियों, आकांक्षाओं और दुर्भाग्य के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में बलराज साहनी के अलावा राजेश खन्ना, मुमताज, प्रेम चोपड़ा और बिंदु की मुख्य भूमिकाएं हैं।

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फिल्म: गरम हवा (1973) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म: गरम हवा (1973)

किरदार: सलीम मिर्जा

फिल्म 'गरम हवा' की कहानी भारत- पाकिस्तान के बंटवारे के बाद की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे  एक मुस्लिम व्यापारी और उसके लोग एक ऐसे देश में अपने अधिकारों के लिए प्रयास करते हैं जो कभी उनका अपना था। इस फिल्म में बलराज साहनी ने सलीम मिर्जा का किरदार निभाया था। यह भारत के विभाजन पर बनी सबसे मार्मिक फिल्मों में से एक है। इस फिल्म के रिलीज से पहले ही बलराज साहनी की 13 अप्रैल 1973 को मृत्यु हो गई। अभिनेता फारुख शेख ने इस फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। यह ऑस्कर पुरस्कार की सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि थी। इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और तीन फिल्मफेयर पुरस्कार मिले थे। फिल्म का निर्देशन एमएस सथ्यू ने किया था।

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