Shubh Mangal Zyada Saavdhan
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आयुष्मान कहते हैं, 'यह कहानी उस समय की है जब समान लिंग के बीच प्यार को अपराध से मुक्त कर दिया गया था। लेकिन, मुझे लगता है कि समाज को इसे पूरी तरह स्वीकारने के लिये काफी वक्त लगेगा। इस फिल्म में भारत में फैले होमोफोबिया को एक हल्के-फुल्के रूप में दिखाया गया है। साथ ही इस तरह की अलग हटकर कहानी भी पेश की गई है।'