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सोशल मीडिया पर प्रमोशन से करोड़ों कमाते हैं सितारे, अब 15 अप्रैल से बदलने जा रहे नियम, जानें क्यों

Sat, 27 Feb 2021 01:42 PM IST
shrilata biswas एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
सोशल मीडिया एक बड़ा बाजार बन चुका है। बॉलीवुड सितारे, क्रिकेटर या फिर अन्य इन्फ्लुएंसर हों, सोशल मीडिया पर ब्रांड्स का प्रचार करते नजर आते हैं और कई बार वह इसके जरिए लाखों-करोड़ों रुपये तक कमाते हैं। इंस्टाग्राम हो, यूट्यूब चैनल हो या फिर सोशल मीडिया के अन्य माध्यम, इन्फ्लुएंसर्स अपने ज्यादा से ज्यादा फॉलोअर्स बढ़ाना चाहते हैं जिससे ब्रांड्स उनके पास आएं और वह उन उत्पादों का प्रचार करें। अब यहां उपभोक्ताओं के साथ धोखा तब हो जाता है जब इन्फ्लुएंसर्स केवल पैसे की वजह से उस उत्पाद का प्रचार करते हुए दिखाई देते हैं। उपभोक्ताओं की परेशानी को समझते हुए एडवरटाइजिंग स्टैंडर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने सेल्फ रेगुलेशन बढ़ाने के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइन जारी कर दी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
एएससीआई द्वारा जारी यह गाइडलाइन 15 अप्रैल 2021 से लागू हो जाएगी जिसके बाद आपके चहेते सितारे हों या अन्य इन्फ्लुएंसर उनके पोस्ट बदले हुए नजर आएंगे। दरअसल एएससीआई ऐसे विज्ञापनों पर नजर रखती है और सेल्फ रेगुलेशन को बढ़ावा देती है जिससे उपभोक्ता को भटकाया ना जा सके और ब्रांड्स गलत दावे ना कर सकें।



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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी चैनल्स को गाइडलाइंस जारी की है इसके लिए एएससीआई के व्हाट्सएप नंबर 7710012345 को स्क्रॉल करने के निर्देश दिए हैं। उपभोक्ता को अगर किसी विज्ञापन के दावे झूठे लगते हैं या फिर उन्हें उससे कोई अन्य आपत्ति है तो इस नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
विशेषज्ञों का मानना है कि अब एएससीआई के सामने बड़ी चुनौती है कि वह इन नियमों का पालन कैसे करवाते हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है और उन्हें पता होना चाहिए कि सोशल मीडिया पर वह जो भी देख रहे हैं वह प्रमोशन है या ऑर्गेनिक है। माना जा रहा है एएससीआई के बनाए नियमों से उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंडस्ट्री दिनों दिन बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक इस समय यह इंडस्ट्री 100 करोड़ से ज्यादा की है। एएससीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण और शहरी इलाकों के उपभोक्ताओं में व्यूअरशिप का बहुत बड़ा अंतर नहीं है। ग्रामीण इलाकों की 82 फीसदी भागीदारी है वहीं शहरी इलाकों की यह 83 फीसदी की भागीदारी है। एएससीआई की इस ड्राफ्ट गाइडलाइन पर इंडस्ट्री, इन्फ्लुएंसर्स और उपभोक्ता आठ मार्च तक अपनी राय दे सकते हैं। 31 मार्च 2021 से पहले फाइनल गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी। 15 अप्रैल 2021 या उसके बाद रिलीज होने वाले सभी पोस्ट पर इन्फ्लुएंसर्स को इन गाइडलाइन का पालन करना होगा।
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