अरुण गोविल का अगर परिचय दिया जाए तो वह एक काबिल अभिनेता कहलाए जाएंगे। एक पूरी पीढ़ी ने उन्हें राम के रूप में जाना है। और... यही उनके शानदार कलाकर होने का प्रमाण है। आज से करीब तीन दशक पहले के किस्से जब बताए जाते हैं तो उनमें एक किस्सा रामायण के प्रसारण का होता है। बताया जाता है कि कि जब टेलिविजन पर रामायण प्रसारित होती तो सड़कें वीरान हो जाया करतीं। लोग टीवी के आगे समूह में बैठा करते। रामायण शुरू होती तो बुजुर्ग महिलाएं यों हाथ जोड़कर बैठतीं जैसे किसी धार्मिक स्थल पर हों या साक्षात श्रीराम ने दर्शन दिए हों। सिर्फ शहर ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी रामानंद सागर की रामायण की वैसी ही दीवानगी थी। बिजली न होने पर लोग ट्रैक्टर की बैटरी एडवांस में निकालकर रखते,ताकि रामायण देखी जा सके। सिर्फ एक टेलिविजन पर पूरा गांव रामायण देख लिया करता। मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जो चरित्र रामायण में है, पर्दे पर उसके साथ अरुण गोविल पूरी तरह न्याय करने में कामयाब रहे। धीर-गंभीर, त्यागी और मर्यादित राम। रामानंद सागर की रामायण में अरुण गोविल ने राम के रोल को इस तरह जीया कि दर्शकों ने फिर किसी अन्य किरदार में उन्हें स्वीकार ही नहीं किया। हालांकि एक बार फिर अरुण गोविल राम के ही किरदार में दिखाई देंगे। वह अक्षय कुमार की फिल्म 'ओह माय गॉड 2' में राम के रोल में नजर आएंगे।