अनुराग कश्यप
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उन्होंने कहा, “एक छोटी फिल्म के पास बड़ी फिल्म से प्रतिस्पर्धा करने के लिए मार्केटिंग बजट नहीं होता है। यही वजह है कि इस तरह की फिल्में नहीं चल पातीं, लेकिन दक्षिण में चीजें ऐसी नहीं हैं। वहां समानता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह किसी नए कलाकार की फिल्म है या मोहनलाल की। उन्हें समान जगह मिलती है। हिंदी इंडस्ट्री में हमारे पास ऐसा नहीं है।”