फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'ऑस्कर' में शामिल होने के बाद 'न्यूटन' पर उठे सवाल, अनुराग कश्यप ने दिया मुंह तोड़ जवाब

Mon, 25 Sep 2017 11:04 AM IST
amarujala.com- Presented by: कुशमिता राणा
विज्ञापन
1 of 5
newton
राजकुमार राव की फिल्म 'न्यूटन' को जब से भारत की और से ऑस्कर के लिए चुना गया है तभी से ये फिल्म खबरों में बनी हुई है। पहले पायरेसी फिर ईरानी फिल्म की कॉपी... इसी को हाल ही में डायरेक्ट अनुराग कश्यप ने बयान दिया है। आगे जानें आखिर क्या राय है इस मामले में अनुराग की। 


 
विज्ञापन

2 of 5
anurag kashyap
'न्यूटन' को ईरानी फिल्म 'सीक्रेट बैलेट' की कॉपी बताए जाने पर अनुराग कश्यप ने 'न्यूटन' का समर्थन किया है। कश्यप ने ट्वीट किया, 'सीक्रेट बैलेट' से 'न्यूटन' उतनी ही प्रेरित है, जितनी ‘द एवेंजर्स’ (हॉलीवुड फिल्म) ‘वतन के रखवाले’ से है।

 
विज्ञापन

3 of 5
Newton
उन्होंने कहा, 'न्यूटन' को बर्लिन फिल्मोत्सव में पुरस्कार दिया गया था और मैं ये वादा कर सकता हूं कि वहां के क्यूरेटर एक साल में इतनी फिल्में देखते हैं, जितनी हम अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखते। 
  That day when you wake up to the news that a deserving film makes a deserving box office .. Newton Shines .. super happy.. — Anurag Kashyap (@anuragkashyap72) September 24, 2017


 

4 of 5
Newton
अनुराग का कहना है कि राजकुमार राव की ये फिल्म एक सरकारी कर्मचारी के इर्द गिर्द घूमती है, जो छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित क्षेत्र में मतदान की निगरानी करने में संघर्ष कर रहा होता है, जबकि ‘सीक्रेट बैलेट’ एक महिला मतदान अधिकारी की एक दिन की कहानी बयां करती है, जो ईरान के लोगों को मतदान के लिए रजामंद करने की खातिर दूरदराज के इलाके में जाती है।
  "Newton" is as much a copy of "Secret Ballot" as The Avengers is of Watan Ke Rakhwale — Anurag Kashyap (@anuragkashyap72) September 24, 2017


 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Newton - फोटो : Newton
​अमित मसुरकर द्वारा निर्देशित ‘न्यूटन’ अगले साल के ऑस्कर पुरस्कार समारोह के लिए भारत की ओर से चुनी गयी है। अनुराग ने टि्वटर पर फिल्म की तारीफ करते हुए उन लोगों पर निशाना साधा, जो उसकी तुलना 2001 में आई ईरानी फिल्म 'सीक्रेट बैलेट' से कर रहे हैं।
  Newton is an award winner from Berlin Fest and I can promise you those curators watch more films in a year than rest of us do in a lifetime. — Anurag Kashyap (@anuragkashyap72) September 24, 2017
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें