अनुपम खेर
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अनुपम बताते हैं, “मेरी उस दिन सुबह सात बजे की शिफ्ट थी तो मैं मेकअप वगैरह करके दाढ़ी लगाकर रेडी था। कोई 11 बजे दिलीप कुमार आए। आते ही सुभाष घई से बोले, अरे भई कुछ चाय वगैरह मिलेगी क्या? मैं दिलीप कुमार को सामने देख हतप्रभ। बस उन्हें निहारे जा रहा था, निहारे जा रहा था। सुभाष घई ने ये देखा तो मुझे उठाकर एक कोने में ले गए और बोले, ये क्या कर रहे हो। इतना प्रभावित हो जाओगे इनके आभा मंडल से तो कैमरे के सामने सामना कैसे करोगे? मैंने तब अपने अभिनय की तालीम में सीखा गया वाक्य उनके सामने दोहराया, अभी अनुपम खेर जो है वह दिलीप कुमार को देख रहा है। कैमरा ऑन होगा तो राणा विश्व प्रताप सिंह को डॉक्टर डैंग देखेगा। आप चिंता मत करिए।” और इसके बाद दोनों के बीच परदे पर जो हुआ, उसकी गूंज आज तक ये फिल्म देखने वालों के जेहन से गई नहीं हैं। अनुपम खेर से ये एक्सक्लूसिव बातचीत विस्तार से आप अमर उजाला अखबार में शनिवार को पढ़ सकते हैं।