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नेपोटिज्म का आरोप लगाने वालों को अनन्या पांडे ने दिया जवाब, ट्रोलर्स को भी दे डाली सलाह

Sun, 14 Jul 2019 05:38 AM IST
shrilata biswas दिल की डायरी से- अनन्या पांडे/मनोरंजन डेस्क
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ananya pandey
'दिल की डायरी' में अनन्या पांडे:
जब से मैंने होश संभाला, खुद को डिजिटल दुनिया में पाया है। 15 साल की उम्र से ही मैं सोशल मीडिया पर सक्रिय हूं और मुझे लगता है कि समय आ गया है कि हमें युवाओं को समझाना चाहिए कि जो कुछ भी वे सोशल मीडिया पर लिखते हैं या पोस्ट करते हैं, उसमें एक जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए। उन्हें यह पता होना चाहिए कि जो कुछ भी वे बस यूं ही सोशल मीडिया पर जाकर पोस्ट कर देते हैं, उसका समाज के बड़े तबके पर सीधा असर होता है। 
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ananya pandey - फोटो : social media
सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो दूसरों को अनावश्यक डराते-धमकाते रहते हैं, मैं चाहती हूं कि इस बारे में लोगों को जागरुक किया जाए और उन्हें समझाया जाए। मैंने ‘सो पॉजीटिव’ नाम से एक अभियान भी इसी के चलते शुरू किया है, जहां मैं उन लोगों से बात करने की कोशिश करती हूं, जिन्हें सोशल मीडिया पर लोग डराते-धमकाते रहते हैं। आमतौर पर टीनएजर्स इस तरह का कुछ भी होने पर मन ही मन घुटना शुरू कर देते हैं। मेरा मानना है कि ऐसा कुछ भी होने पर तुरंत किसी ऐसे शख्स से बात करनी चाहिए, जिस पर आप विश्वास कर सकते हैं।
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Ananya Pandey - फोटो : instagram
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ यह ट्रेंड काफी खतरनाक है। इससे बच्चों के मानसिक विकास पर असर पड़ता है। मैं अपने इस अभियान के तहत खुद भी ऐसे लोगों से बात करती हूं और उन्हें अपनी समझ के हिसाब से इन सबका सामना करने की जुगत बताती हूं। हमने 'सो पॉजीटिव' का एक पेज बनाया है, जहां लोग सीधे संपर्क करके इस बारे में मुझसे बात कर सकते हैं। यह सही है कि मेरी उम्र अभी इतनी नहीं है कि मैं ज्यादा बड़ी-बड़ी बातें कर सकूं, लेकिन चूंकि डिजिटल दुनिया इतनी तेजी से फैल रही है लिहाजा हमें कहीं न कहीं से तो शुरुआत करनी ही चाहिए। सोशल मीडिया एक नशे की तरह फैल रहा है। मैं भी इंस्टाग्राम या फेसबुक पर लगातार नजर बनाए रखती हूं कि मेरे आस पास क्या हो रहा है, इंडस्ट्री में क्या चल रहा है। तमाम बातें इसी तरह मुझे पता चलती हैं। 

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Ananya Pandey - फोटो : twitter
कहना बहुत मुश्किल है कि सोशल मीडिया से हमें बीच-बीच में ब्रेक लेते रहना चाहिए, क्योंकि शायद मैं खुद भी बिना मोबाइल के एक दिन भी न गुजार पाऊं। पर युवाओं को इससे बचना चाहिए। सोशल मीडिया से बीच-बीच में ब्रेक लेते रहना बहुत जरूरी है, ताकि आप अपने असली काम पर सही तरीके से ध्यान लगा पाएं। काम कोई भी हो चाहे आप किसी भी क्षेत्र में हों, कामयाब तभी होंगे, जब आप पूरे जी जान से इसमें अपना सौ फीसदी देंगे। अक्सर लोग स्टार किड्स पर वंशवाद के जरिए आगे आ जाने का आरोप लगाते हैं, लेकिन अगर मैं करण जौहर से जाकर आसानी से मिल सकती हूं या उनकी फिल्म के लिए ऑडिशन दे सकती हूं, तो बस यह फायदा यहीं तक है। अगर काम नहीं आता है, काम के प्रति आपका समर्पण नहीं है, अपने काम की चुनौतियों के लिए आप खुद को मानसिक या शारीरिक तौर पर तैयार नहीं कर पाते हैं, तो मौका चाहे जितना बड़ा मिले, वहां कामयाबी मिलना आपके लिए मुश्किल होगा।
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ananya pandey - फोटो : social media
परिवार किसी भी इंसान के लिए सबसे मजबूत सहारा होता है। आपको विरासत में जो कुछ मिला है, उसे और बेहतर बनाने की हमारी कोशिश होनी चाहिए। चर्चा में बने रहने के लिए अनावश्यक बातें जरूरी नहीं हैं। आपका नाम आपके काम से ही होना चाहिए। मेरे दादाजी देश के बड़े हार्ट सर्जन रहे, पिता ने अभिनय में नाम कमाया तो मेरी यह जिम्मेदारी है कि मैं अब इस परंपरा को आगे ले जाऊं। एक और बात जो मैं अमर उजाला की 'दिल की डायरी' कॉलम के लिए लिखना चाह रही हूं, वह यह कि माता-पिता को कभी अपने बच्चों पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाना चाहिए, जैसे कि मेरे माता-पिता ने मेरे ऊपर करियर चुनने का कभी कोई दबाव नहीं बनाया। हर युवा को यह खुद तय करना चाहिए कि उसे जीवन में क्या बनना है। इसके बारे में माता-पिता से खुलकर बात करनी चाहिए, मुझे भरोसा है कि हर अभिभावक अपने बच्चे को उसका सपना पूरा करने में मदद जरूर करते हैं।  
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