अमिताभ बच्चन ने अपने अस्पताल जाने के अनुभव को इस कविता में उकेरा है। आइए पढ़ते हैं...
'जी हाँ जनाब मैं अस्पताल जाता हूँ
बचपन से ही इस प्रतिक्रिया को जीवित रखता हूँ ,
वहीं तो हुई थी मेरी प्रथम पयदाइशि चीत कार
वहीं तो हुआ था अविरल जीवन का मेरा स्वीकार
इस पवित्र स्थल का अभिनंदन करता हूँ मैं
जहाँ इस्वर बनाई प्रतिमा की जाँच होती है तय
धन्य है वे ,
धन्य हैं वे'
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