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शबाना की मां के इंतकाल से बॉलीवुड में शोक, अंतिम संस्कार में अमिताभ-रेखा समेत पहुंचे कई सितारे

Sun, 24 Nov 2019 01:34 PM IST
anand anand एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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amitabh bachchan, Shaukat Kaifi, rekha - फोटो : amar ujala
बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी की मां और मशहूर अदाकारा, लेखिका शौकत कैफी आजमी का शुक्रवार को निधन हो गया। शौकत कैफी की पहचान मशहूर शायर, लेखक व गीतकार कैफी आजमी की पत्नी के तौर पर भी होती है। 90 साल की शौकत कैफी लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, इसी बीमारी के चलते शुक्रवार शाम को उनका जुहू स्थित आवास पर इंतकाल हो गया। उनके इंतकाल के समय उनकी बेटी शबाना आजमी भी वहीं मौजूद थीं। 
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amitabh bachchan - फोटो : social media
शुक्रवार की रात से लेकर शनिवार तक शौकत कैफी को अतिंम विदाई देने के लिए कई फिल्मी सितारे शबाना आजमी के घर नजर आए। महानायक अमिताभ बच्चन भी शौकत कैफी के अंतिम संस्कार में पहुंचे। उनके अलावा अभिनेत्री रेखा, उर्मिला मातोंडकर, तब्बू , ऋषि कपूर और संजय कपूर जैसे कलाकार भी शौकत को अतिंम विदाई देने पहुंचे। 
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rekha - फोटो : social media
शौकत आजमी इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन (इप्टा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की सांस्कृतिक शाखा प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन से जुड़ी हुई थीं। फिल्म जगत में उन्हें एमएस सथ्यू की ‘गर्म हवा’ और मुजफ्फर अली की ‘उमराव जान’ तथा सागर सरहदी की ‘बाजार’ जैसी कला फिल्मों में बेहतरीन अभिनय के लिए याद किया जाता है। शौकत और कैफी आजमी के निकाह के किस्से भी खासे दिलचस्प हैं, जिनमें कहा जाता है कि शौकत ने हैदराबाद के एक मुशायरे में कैफी की मशहूर नज्म ‘औरत’ को सुनने के बाद अपनी मंगनी तोड़कर उनके सामने निकाह का प्रस्ताव रख दिया था। 

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Shaukat Kaifi Funeral - फोटो : social media
कैफी आजमी जब भी मुशायरों में आते थे तो लोगों की दाद नहीं रुकती थी। वह प्रगतिशील लेखक संघ के सदस्य थे और समाज को लेकर अपनी लेखनी मुखर रखते थे। कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य बनने के बाद वह उन्हीं के बनाए कम्यून में रहा करते थे। वहीं शबाना और बाबा का जन्म भी हुआ था। उनकी बेग़म शौकत कैफी ने उनका हर स्थिति में साथ दिया। कैफ़ी ने भी अपनी बीबी को प्रेरणा मान कर कई नज्में कहीं, 'औरत' उन्हीं नज्मों में से एक है। 
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Shaukat Azmi - फोटो : Social Media
जब शौकत ने पहली बार कैफी को देखा तो वह मुशायरे में ग़ज़ल सुना रहे थे। इसके बाद जब वह स्टेज से उतरे तो ऑटोग्राफ लेने के लिए उनके आस-पास कॉलेज की लड़कियों की भीड़ लग गयी थी। यह देखकर शौकत पहले अली सरदार जाफरी से ऑटोग्राफ़ी लेने चली गयीं। उन्हें वहां जाते हुए कैफी ने कनखियों से देख लिया। भीड़ कम होने पर जब शौकत कैफी का ऑटोग्राफ़ लेने आईं तो उन्होंने शेर लिखा- 

वही अब्रे-जाला चमकनुमा वही, ख़ाके-बुलबुले-सुर्ख़-रू ज़रा
राज़ बन के महल में आओ, दिले घंटा तुन तो बिजली कड़के धुन
तो फबन झपट के लगन में आओ


इस शेर पर शौकत नाराज होकर कैफी साहब से पूछा कि उन्होंने ऐसा शेर उनकी डायरी में क्यूं लिखा। इस पर कैफी ने जवाब दिया कि क्यूंकि शौकत पहले सरदार जाफ़री से ऑटोग्राफ लेने चली गयीं थीं। यहां से शुरु हुई कैफी और शौकत की प्रेम कहानी। 
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