Amitabh Bachchan
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उन्होंने कहा- मेरी सलामती हमेशा उस बस के ड्राइवर के सुरक्षित हाथों में थी, जो मुझे स्कूल से लाता, ले जाता था, जब मैं खाना खाता मैं निश्चिंत था कि वो मेरे भरोसेमंद हाथों से ही बना था। हमें हमेशा उन हाथों की जरूरत पड़ी है। और अब भी पड़ेगी, उन भरोसेमंद हाथों की उन सरपरस्त हथेलियों की, मार्गदर्शक उंगलियों की। आज हाथ धोना, सामाजिक दूरी बनाना सर्वोपरि है। और आज मैं अपने हाथ जोड़कर आपसे विनती कर रहा हूं कि हमें इंसानियत से हाथ नहीं धोना चाहिए। हमें इंसान होना चाहिए।