Amitabh Bachchan
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वीडियो में अमिताभ कहते हैं, 'है अंधेरी रात पर, दीया जलाना कब मना है, क्या घड़ी थी एक भी चिंता नहीं थी पास आई, कालिमा तो दूर छाया भी पलक पर थी न छाई आंख से मस्ती झपकती, बात से मस्ती टपकती, थी हंसी ऐसी जिसे सुन बादलों ने शर्म खाई, वो गई तो ले गई उल्लास के आधार मानक, पर अधीरता के समय भी मुस्कुराना कब मना है।'